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गोवत्स द्वादशी

गाय और बछड़े का शुक्रिया अदा करके दिवाली की शांत शुरुआत।

5नवगुरुवार, 5 नवंबर 2026द्वादशी शुक्र, 6 नव, सुबह 10:31 तक
  • 20 दिन बाकी
  • दिवाली · दिन 1 / 6

पूजा कब करें?

पुणे के लिए · सबसे शुभ समय

गोधूलि बेला में, सूर्यास्त के आसपास करें। समय आपके शहर के अनुसार बदलता है।

  • पूजा का समय
  • प्रदोष काल
  • रात
  • द्वादशी शुरूसुबह 10:36गुरु, 5 नव
  • द्वादशी समाप्तसुबह 10:31शुक्र, 6 नव
  • प्रदोष कालशाम 5:57 से रात 8:29 तक
दूसरे शहरों का समय
  • पुणेशाम 5:57 से रात 8:29 तक
  • मुंबईशाम 6:00 से रात 8:33 तक
  • ठाणेशाम 6:00 से रात 8:32 तक
  • नासिकशाम 5:56 से रात 8:29 तक
  • नागपुरशाम 5:33 से रात 8:06 तक
  • कोल्हापुरशाम 5:58 से रात 8:29 तक
  • दिल्लीशाम 5:30 से रात 8:08 तक
  • बेंगलुरुशाम 5:49 से रात 8:18 तक
  • इंदौरशाम 5:44 से रात 8:18 तक
  • लंदनशाम 4:22 से रात 7:19 तक
  • न्यू जर्सीशाम 4:45 से रात 7:31 तक
  • दुबईशाम 5:33 से रात 8:08 तक

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामगोवत्स द्वादशी
  • कहाँमहाराष्ट्र
  • किसकी पूजागाय और बछड़ा
  • एक पंक्ति मेंदिवाली का पहला दिन, गाय और बछड़े की पूजा का।

पूजा कैसे करें?लगभग 15 से 20 मिनट

संक्षेप में: पैर धोएँ, हल्दी-कुमकुम लगाएँ, दीया और आरती, चारा और नैवेद्य, फिर प्रणाम।

  1. 1शाम का इंतज़ार करें। पूजा गोधूलि बेला में होती है, जब गायें घर लौटती हैं।गोधूलि यानी सूर्यास्त के आसपास, जब गायें घर लौटती हैं।
  2. 2गाय और बछड़े के पैर धोएँ।सादा पानी चलता है, जल्दी की ज़रूरत नहीं।
  3. 3उन्हें हल्दी-कुमकुम लगाएँ और फूल व माला चढ़ाएँ।माथे या पैरों पर थोड़ा-सा लगाएँ।
  4. 4दीया जलाएँ और छोटी-सी आरती करें।घी का या तेल का, दोनों चलते हैं।
  5. 5उन्हें चारा और नैवेद्य खिलाएँ।हरा चारा या थोड़ी घास, और घर का नैवेद्य।
  6. 6एक परिक्रमा करें, प्रणाम करें और परिवार के लिए प्रार्थना करें।मन से करें, जल्दबाज़ी नहीं।

क्या चाहिए?टिक करते जाएँ

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गोवत्स द्वादशी, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    दिवाली की शुरुआत पटाखों से नहीं होती। वह शुरू होती है एक शांत शाम से, जब हम गाय और बछड़े का शुक्रिया अदा करते हैं। यही है वसुबारस। यह आश्विन कृष्ण द्वादशी को आता है, ज़्यादातर धनतेरस से एक दिन पहले।

  2. 02

    महाराष्ट्र की परंपराएँ

    पास में गाय नहीं है? शहर के कई परिवार गाय-बछड़े की तस्वीर की पूजा करते हैं या गौशाला जाते हैं। दरवाज़े पर पहली रंगोली, दीये और आकाशकंदील भी आमतौर पर इन्हीं दिनों लगने लगते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वसुबारस कब है?

आश्विन कृष्ण द्वादशी को, ज़्यादातर धनतेरस से एक दिन पहले। आपके शहर की तारीख ऊपर दी गई है।

पूजा किस समय करनी चाहिए?

शाम को गोधूलि बेला में। आपके शहर का समय ऊपर दिया गया है।

क्या वसुबारस और गोवत्स द्वादशी एक ही हैं?

हाँ, दिन एक ही है, नाम अलग है।

अगर घर में गाय न हो तो क्या करें?

गाय-बछड़े की तस्वीर की पूजा कर सकते हैं या पास की गौशाला जा सकते हैं।

दिवाली के छह दिन

पुणे के लिए तारीखें

पूजा से पहले याद दिलाना

एक दिन पहले और पूजा के समय से पहले सूचना। बिना इंटरनेट भी।

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