नरक चतुर्दशी
दिवाली की पहली असली सुबह: अँधेरे में दीये, तेल-उबटन का स्नान, फिर फराळ।
- 23 दिन बाकी
- दिवाली · दिन 3 / 6
पूजा कब करें?
पुणे के लिए · सबसे शुभ समय
भोर 5:03 से सुबह 6:39 तक
सूर्योदय से पहले स्नान करें। समय आपके शहर के अनुसार बदलता है।
- पूजा का समय
- प्रदोष काल
- रात
- चतुर्दशी शुरूसुबह 10:48शनि, 7 नव
- चतुर्दशी समाप्तसुबह 11:28रवि, 8 नव
- प्रदोष कालशाम 5:56 से रात 8:29 तक
- अभ्यंग स्नानसूर्योदय से पहले
दूसरे शहरों का समय
- पुणेभोर 5:03 से सुबह 6:39 तक
- मुंबईभोर 5:08 से सुबह 6:44 तक
- ठाणेभोर 5:08 से सुबह 6:44 तक
- नासिकभोर 5:06 से सुबह 6:42 तक
- नागपुरभोर 4:46 से सुबह 6:22 तक
- कोल्हापुरभोर 5:00 से सुबह 6:36 तक
- दिल्लीभोर 5:04 से सुबह 6:40 तक
- बेंगलुरुभोर 4:41 से सुबह 6:17 तक
- इंदौरभोर 5:01 से सुबह 6:37 तक
- लंदनभोर 5:32 से सुबह 7:08 तक
- न्यू जर्सीभोर 5:01 से सुबह 6:37 तक
- दुबईभोर 4:57 से सुबह 6:33 तक
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामछोटी दिवाली, रूप चतुर्दशी
- कहाँमहाराष्ट्र और पूरा भारत
- किसकी पूजाश्रीकृष्ण और देवता
- एक पंक्ति मेंसूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान का दिन, और वह दिन जब श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया।
पूजा कैसे करें?लगभग 45 मिनट
संक्षेप में: जल्दी उठें, तेल और उबटन, स्नान, नए कपड़े, दीया, फराळ, फिर औक्षण।
- 1सूर्योदय से पहले उठें।अलार्म लगाएँ; सुबह का समय निभाना ही असली बात है।
- 2तेल और उबटन लगाकर अभ्यंग स्नान करें।तेल थोड़ा गुनगुना करके लगाएँ, फिर उबटन।
- 3नए या साफ़ कपड़े पहनें।नए कपड़े पहनें और बड़ों के पैर छुएँ।
- 4भगवान के सामने दीया जलाएँ और प्रणाम करें।भगवान के सामने दीया जलाएँ।
- 5फराळ करें।सब साथ बैठकर फराळ करें।
- 6घर के लोगों की आरती उतारें (औक्षण)।पहले छोटों का औक्षण करें।
क्या चाहिए?टिक करते जाएँ
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नरक चतुर्दशी, थोड़ा विस्तार से
- 01
पर्व के बारे में
नरक चतुर्दशी दिवाली की पहली असली सुबह है, आश्विन कृष्ण चतुर्दशी को। इसी दिन श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था, यानी अंधेरे पर रोशनी की जीत। और इसी दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करके दिवाली सही मायने में शुरू होती है।
- 02
अभ्यंग स्नान
सूर्योदय से पहले उठें। पूरे शरीर पर तिल के तेल की मालिश करें, फिर उबटन लगाएँ और गरम पानी से नहाएँ। नहाने के बाद नए कपड़े पहनें और भगवान को प्रणाम करें।
- 03
महाराष्ट्र की परंपराएँ
सुबह के अँधेरे में दीयों की रोशनी और आतिशबाज़ी। सब साथ बैठकर फराळ करते हैं, और फिर घर के बड़े छोटों का औक्षण करते हैं। चकली, लड्डू, शंकरपाळी और करंजी इन दिनों हर घर में होती हैं।
- चकली
- लड्डू
- शंकरपाळी
- करंजी
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नरक चतुर्दशी कब है?
आश्विन कृष्ण चतुर्दशी को। आपके शहर की तारीख ऊपर दी गई है।
अभ्यंग स्नान का समय क्या है?
सुबह सूर्योदय से पहले। आपके शहर का समय ऊपर दिया गया है।
क्या नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली एक ही हैं?
हाँ, दिन एक ही है, नाम अलग है।
दिवाली के छह दिन
पुणे के लिए तारीखें
पूजा से पहले याद दिलाना
एक दिन पहले और पूजा के समय से पहले सूचना। बिना इंटरनेट भी।