ऐप पाएँ
कालदर्शीआज

मकर संक्रांति

सूर्य के मकर राशि में जाने का दिन: चंद्रमा से नहीं, सूर्य से तय होने वाला पर्व। तिल-गुड़ लीजिए, मीठा बोलिए!

15जनशुक्रवार, 15 जनवरी 2027सप्तमी दोपहर 2:13 तक
  • 77 दिन बाकी

पूजा कब करें?

पुणे के लिए · सबसे शुभ समय

  • पूजा का समय
  • प्रदोष काल
  • रात
  • सप्तमी शुरूदोपहर 1:59गुरु, 14 जन
  • सप्तमी समाप्तदोपहर 2:13शुक्र, 15 जन
  • प्रदोष कालशाम 6:15 से रात 8:50 तक
दूसरे शहरों का समय
  • पुणेशाम 6:15 से रात 8:50 तक
  • मुंबईशाम 6:18 से रात 8:54 तक
  • ठाणेशाम 6:17 से रात 8:53 तक
  • नासिकशाम 6:13 से रात 8:49 तक
  • नागपुरशाम 5:49 से रात 8:27 तक
  • कोल्हापुरशाम 6:16 से रात 8:51 तक
  • दिल्लीशाम 5:43 से रात 8:26 तक
  • बेंगलुरुशाम 6:09 से रात 8:41 तक
  • इंदौरशाम 5:59 से रात 8:38 तक
  • लंदनशाम 4:14 से रात 7:24 तक
  • न्यू जर्सीशाम 4:49 से रात 7:43 तक
  • दुबईशाम 5:47 से रात 8:27 तक

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामसंक्रांति, उत्तरायण (गुजरात), पोंगल (तमिलनाडु), खिचड़ी (उत्तर प्रदेश, बिहार)
  • कहाँपूरा भारत, हर प्रदेश में अलग नाम से
  • किसकी पूजासूर्य
  • एक पंक्ति मेंसूर्य का मकर राशि में प्रवेश। तारीख सूर्य से तय होती है, इसलिए हर साल 14 या 15 जनवरी।

मकर संक्रांति, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    हमारे ज़्यादातर पर्व चंद्रमा की तिथि से तय होते हैं। मकर संक्रांति सूर्य से तय होती है: जिस दिन सूर्य धनु से मकर राशि में जाता है। इसलिए यह लगभग हमेशा 14 या 15 जनवरी को आती है।

    तिल-गुड़ देते समय महाराष्ट्र में कहते हैं, तिळगूळ घ्या, गोड गोड बोला: तिल-गुड़ लीजिए और मीठा बोलिए। साल भर की नाराज़गी भूलिए, और रिश्तों में मिठास रखिए।

    आज काले कपड़े पहनते हैं। आम तौर पर त्योहार पर काला रंग नहीं पहनते, पर कड़ाके की ठंड में काला रंग गर्मी रखता है, इसलिए संक्रांति पर वही अच्छा लगता है।

  2. 02

    भीष्म की प्रतीक्षा

    महाभारत में भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वर था: वे स्वयं तय कर सकते थे कि मृत्यु कब आए।

    कुरुक्षेत्र में बाणों की शय्या पर गिरने के बाद भी उन्होंने प्राण नहीं छोड़े। सूर्य के उत्तरायण होने तक, लगभग अट्ठावन रातें, उन्होंने प्रतीक्षा की, और उत्तरायण में देह त्यागी।

    इसीलिए उत्तरायण को शुभ काल माना जाता है, और परंपरा में मकर संक्रांति उसकी शुरुआत है। खगोल विज्ञान के अनुसार सूर्य 21 दिसंबर को ही उत्तरायण होता है; संक्रांति राशि प्रवेश से तय होती है।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    एक दिन पहले भोगी: तिल लगी बाजरे की भाकरी, मक्खन और मिली-जुली सब्ज़ी। संक्रांति पर गुड़ की पोळी और तिल के लड्डू या वड़ी।

    महिलाएँ सुगड़ (मिट्टी के छोटे घड़े) पूजती हैं और हल्दी-कुमकुम करके एक-दूसरे को वाण देती हैं। हल्दी-कुमकुम का यह समय रथ सप्तमी तक चलता है। छोटे बच्चों का बोरन्हाण और नई दुल्हन की पहली संक्रांति भी इन्हीं दिनों होती है।

    अगला दिन किंक्रांत है: मान्यता है कि इस दिन देवी ने किंकरासुर का वध किया, इसलिए शुभ काम इस दिन टालते हैं।

    गुजरात में उत्तरायण यानी पतंगों का दिन। तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में एक रात पहले लोहड़ी, असम में माघ बिहू, और उत्तर प्रदेश व बिहार में खिचड़ी। पर्व एक, नाम अनेक।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: सुगड़ की पूजा, तिलगुड़ और गुड़ की रोटी का भोग, और शाम को हल्दी-कुमकुम: बस, यही संक्रांति है।

  1. 1सुबह जल्दी स्नान करें।कई घरों में नहाने के पानी में थोड़े तिल डालते हैं।
  2. 2काले कपड़े पहनें: महिलाएँ काली साड़ी, छोटे बच्चे काले कपड़े।सर्दी में काला रंग गर्मी देता है, इसलिए संक्रांति पर काले कपड़े।
  3. 3मिट्टी के छोटे घड़ों (सुगड़) में चने, गन्ने के टुकड़े, बेर, गेहूँ की बालियाँ और तिल भरें।घर में जितने सुगड़ रखने की रीत हो, उतने रखें।
  4. 4हल्दी-कुमकुम और फूल चढ़ाकर सुगड़ की पूजा करें, और उन्हें भगवान को अर्पित करें।पूजा के बाद सुगड़ की चीज़ें प्रसाद के रूप में बाँटी जाती हैं।
  5. 5तिलगुड़ और गुड़ की रोटी का भोग लगाएँ।तिल के लड्डू, बर्फ़ी या तिल का हलवा, जो घर में बनता हो।
  6. 6घरवालों, दोस्तों और पड़ोसियों को तिलगुड़ दें: "तिलगुड़ लो, मीठा-मीठा बोलो"।तिलगुड़ देते हुए पुरानी नाराज़गी भूल जाइए।
  7. 7अनाज भरा एक सुगड़ या भोजन दान करें।आज दान का विशेष महत्व है।
  8. 8शाम को सुहागिनों को हल्दी-कुमकुम के लिए बुलाएँ, और तिलगुड़ और उपहार (वाण) दें।यह हल्दी-कुमकुम रथ सप्तमी तक चलता है।

क्या चाहिए?टिक करते जाएँ

8 में से 0 तैयार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संक्रांति पर काले कपड़े क्यों पहनते हैं?

संक्रांति सर्दी में आती है, और काले कपड़े गर्म होते हैं। दूसरे त्योहारों पर जिस काले रंग से बचते हैं, आज उसे जान-बूझकर पहनते हैं।

उपहार (वाण) में क्या दें?

कोई छोटी, काम की चीज़: छोटा बर्तन, कंघी, रूमाल, कॉपी-पेन, या घर का बना तिलगुड़। महँगा होना ज़रूरी नहीं; प्लास्टिक के बजाय टिकाऊ चीज़ दें तो अच्छा।

बच्चे या नई बहू की पहली संक्रांति हो तो?

कई घरों में बच्चे और नई बहू को काले कपड़े और शक्कर के दानों के गहने पहनाते हैं। छोटे बच्चों का बोरन्हाण होता है: मुरमुरे, बेर, चने, गन्ने के टुकड़े और हलवा सिर पर से डालते हैं।

पतंग उड़ाते समय क्या सावधानी रखें?

सादा सूती धागा इस्तेमाल करें। नायलॉन, "चीनी" या काँच वाला माँझा नहीं: वह पक्षियों के पंख और दोपहिया सवारों के गले काटता है, और राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने उस पर रोक लगाई है। बिना मुंडेर की छत से न उड़ाएँ, और बच्चों पर नज़र रखें।

पूजा के बाद सुगड़ का क्या करें?

अंदर की चीज़ें प्रसाद के रूप में बाँटें। अनाज भरा एक सुगड़ अक्सर दान करते हैं। मिट्टी के सुगड़ बगीचे में या पेड़ के नीचे रख दें।

ऐप में याद लगाएँ

ऐप एक दिन पहले और उसी दिन सूचना भेजता है, बिना इंटरनेट भी।

ऐप पाएँ

कालदर्शी को बेहतर बनाने में मदद करेंगे?

हम कालदर्शी का उपयोग गिनने के लिए Google Analytics इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसमें कुकीज़ लगती हैं। आपका नाम या स्थान नहीं लिया जाता। गोपनीयता