त्योहार · भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
गणेश चतुर्थी 2026
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणपति बप्पा घर आते हैं! मिट्टी की मूर्ति, मोदक का भोग, और डेढ़ से दस दिन तक की मेहमाननवाज़ी।
इस रात्रि चंद्र दर्शन वर्जित है।
तारीख, तिथि और समय
समय नागपुर के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।
शहर के अनुसार तारीख
यह तारीख सभी शहरों में एक ही है।
अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामगणेशोत्सव, विनायक चविथि (आंध्र), पिल्लैयार चतुर्थी (तमिलनाडु)
- कहाँमहाराष्ट्र का सबसे बड़ा त्योहार; गोवा, कर्नाटक, आंध्र और तमिलनाडु में भी
- किसकी पूजागणेश, मिट्टी की (पार्थिव) मूर्ति में
- एक पंक्ति मेंविघ्नहर्ता का घर-घर आगमन, और पूरे शहर का सार्वजनिक गणेशोत्सव।
गणेश चतुर्थी, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
विनायक चतुर्थी साल में बारह बार आती है, पर भाद्रपद की यह सबसे बड़ी है। आज गणेश मेहमान बनकर घर आते हैं, मिट्टी की मूर्ति में।
वे कितने दिन रहेंगे, यह घर की रीत पर है: डेढ़, पाँच, सात या दस दिन। फिर उत्तरपूजा, और पानी में विसर्जन। मिट्टी की मूर्ति फिर पानी में घुल जाती है।
इसमें एक सुंदर सीख है: प्रेम से स्वागत कीजिए, मन से मेहमाननवाज़ी कीजिए, और समय आए तो मुस्कुराकर विदा कीजिए।
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गणेश को हाथी का सिर कैसे मिला
पार्वती ने मिट्टी से एक बालक बनाया, और उसे द्वार पर पहरा देने को कहा: किसी को भीतर मत आने देना।
तभी शिव आए। बालक ने उन्हें भी रोका। दोनों में युद्ध हुआ, और शिव ने बालक का सिर काट दिया।
फिर शिव ने उसे हाथी का सिर लगाया, और बालक फिर जीवित हो गया। मिट्टी से बने गणेश: आज भी गणेश चतुर्थी पर हम मिट्टी की ही मूर्ति पूजते हैं।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
घर-घर मिट्टी की मूर्ति, सुबह-शाम आरती, और मोदक का भोग। मोदक गणेश की सबसे प्रिय मिठाई है।
आज रात चाँद नहीं देखना चाहिए, ऐसा मानते हैं। कथा यह है: दावत से लौटते हुए गणेश अपने वाहन से गिर पड़े, और चंद्रमा हँस दिया। ग़ुस्से में गणेश ने अपना एक दाँत तोड़कर चंद्रमा पर फेंका, और शाप दिया: तुम कभी पूरे नहीं रहोगे।
इन्हीं दिनों गौरी आती हैं: तीन दिन आवाहन, पूजन और विदाई। कोंकण में कोली समाज धातु के मुखौटे वाली ज्येष्ठा गौरी पूजता है, और भीतरी महाराष्ट्र में ज्येष्ठा और कनिष्ठा, दो गौरी।
अंग्रेज़ों के समय लोकमान्य तिलक इस उत्सव को घर से बाहर ले आए: सार्वजनिक गणेशोत्सव, लोगों को एक करने के लिए। आज पुणे के पाँच मानाचे गणपति हैं: कसबा, तांबडी जोगेश्वरी, गुरुजी तालीम, तुलशीबाग और केसरीवाड़ा। मुंबई में लालबागचा राजा, जिसकी शुरुआत कोली मछुआरों ने अपने बाज़ार के लिए माँगी मन्नत से की।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: मूर्ति का स्वागत, मध्याह्न में प्राणप्रतिष्ठा, रोज़ सुबह-शाम पूजा और आरती, और उत्तरपूजा के बाद विसर्जन।
- 1मिट्टी की मूर्ति पहले से तय करें, और एक दिन पहले या उसी सुबह घर लाएँ।प्राकृतिक मिट्टी और प्राकृतिक रंगों की मूर्ति लें: वह पानी में घुल जाती है। प्लास्टर ऑफ़ पेरिस नहीं घुलता, और नदियाँ-समुद्र गंदे करता है।
- 2उनकी जगह तैयार करें: चौकी या पाटा, साफ़ कपड़ा, और फूलों की सजावट।दीयों को काग़ज़, कपड़े और सजावट से दूर रखें।
- 3पास में कलश रखें: जल, आम के पत्ते और नारियल।नारियल न मिले, तो पानी से भरा ढका बर्तन और पत्ते काफ़ी हैं।
- 4ऊपर दिए मध्याह्न के समय में प्राणप्रतिष्ठा करें।कई परिवार पंडित जी को बुलाते हैं; कई लोग पूजा की किताब से ख़ुद करते हैं।
- 5फिर षोडशोपचार पूजा: चंदन, हल्दी-कुमकुम, अक्षत, लाल फूल, दूर्वा और जनेऊ।कई घरों में इक्कीस दूर्वा चढ़ाई जाती है: गणेश को दूर्वा प्रिय है।
- 6मोदक का नैवेद्य चढ़ाएँ, नारियल और फलों के साथ।कई घरों में इक्कीस मोदक: भाप में पके, नारियल-गुड़ भरे उकडीचे मोदक।
- 7सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती गाएँ, और मंत्रपुष्पांजलि करें।परिवार, पड़ोसी, दोस्त: सबको आरती पर बुलाएँ।
- 8जब तक गणपति रहें, रोज़ सुबह-शाम पूजा, नैवेद्य और आरती करें।डेढ़, पाँच, सात या दस दिन: जैसी परिवार की रीत।
- 9आख़िरी दिन उत्तरपूजा करें, और अगले बरस जल्दी आने की विनती करें।उत्तरपूजा में आरती, नैवेद्य और गणपति की विदाई होती है।
- 10फिर विसर्जन करें: घर पर बाल्टी में, कृत्रिम तालाब में, या जहाँ शहर अनुमति दे।शोभायात्रा में बच्चों और बुज़ुर्गों को भारी भीड़ से दूर रखें, और गहरे पानी में न जाएँ।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणपति कितने दिन रखें?
जैसी परिवार की रीत: डेढ़, पाँच, सात या दस दिन। जितने दिन रखें, पूरे मन से रखें।
क्या प्राणप्रतिष्ठा के लिए पंडित जी ज़रूरी हैं?
नहीं। कई परिवार पंडित जी को बुलाते हैं, और कई लोग पूजा की किताब से ख़ुद करते हैं। समय और भाव सबसे ज़रूरी हैं।
घर पर विसर्जन कैसे करें?
साफ़ बाल्टी या टब में पानी भरें। उत्तरपूजा के बाद मूर्ति धीरे से पानी में रखें, और मिट्टी घुलने दें। फिर वह पानी और मिट्टी पौधों या बगीचे में डालें, नाली में नहीं।
आज भूल से चाँद दिख जाए तो?
चिंता न करें। कई घरों में तब स्यमंतक मणि की कथा सुनी या पढ़ी जाती है।
गौरी कब आती हैं?
गणपति के कुछ दिन बाद: अनुराधा नक्षत्र पर आगमन, ज्येष्ठा पर पूजन, और मूल नक्षत्र पर विसर्जन। कई परिवारों में दोनों गौरियों के बीच गणपति बिठाए जाते हैं।
क्या छोटे घर में या अकेले गणपति ला सकते हैं?
हाँ। छोटी मिट्टी की मूर्ति, सादी सजावट और रोज़ की आरती काफ़ी है। डेढ़ दिन के गणपति भी ला सकते हैं।
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