त्योहार · भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी
अनंत चतुर्दशी 2026
भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी: गणपति बप्पा की विदाई, और अनंत का व्रत। गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!
तारीख, तिथि और समय
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शहर के अनुसार तारीख
यह तारीख सभी शहरों में एक ही है।
अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामअनंत चौदस, गणेश विसर्जन
- कहाँमहाराष्ट्र (गणेश विसर्जन); नेपाल, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश (अनंत पूजा); जैन समाज
- किसकी पूजाअनंत (शेष रूप में विष्णु), और गणेश
- एक पंक्ति मेंविष्णु के अनंत रूप का व्रत, और दस दिन के गणेशोत्सव का समापन।
अनंत चतुर्दशी, थोड़ा विस्तार से
- 01
पर्व के बारे में
अनंत यानी जिसका अंत नहीं। आज विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है, और बाँह पर चौदह गाँठों वाला अनंत का धागा बाँधते हैं।
और आज गणेशोत्सव पूरा होता है। दस दिन घर या पंडाल में रहे गणपति को ढोल-ताशे के साथ विदा करते हैं।
दोनों में एक ही सीख: जो आता है वह जाता है, पर श्रद्धा अनंत रहती है। इसीलिए विदाई के साथ ही अगले बरस का न्योता भी!
- 02
सुशीला और कौंडिन्य
नदी किनारे सुशीला ने कुछ स्त्रियों को अनंत की पूजा करते देखा। उसने भी व्रत लिया, और कलाई पर चौदह गाँठों का धागा बाँधा। जल्द ही पति कौंडिन्य ऋषि के साथ उसका घर समृद्धि से भर गया।
एक दिन कौंडिन्य ने वह धागा देखा। यह धन मेरी मेहनत का है, किसी धागे का नहीं, कहकर उन्होंने उसे आग में डाल दिया। उसके बाद सब चला गया: धन, पड़ोसी, और घर भी आग में जल गया।
पछताकर कौंडिन्य अनंत को खोजते हुए भटकते रहे। आख़िर अनंत एक बूढ़े ब्राह्मण के रूप में मिले, क्षमा किया, और कहा: चौदह वर्ष यह व्रत करो। दोनों ने वैसा ही किया, और सुख लौट आया।
- 03
महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
अनंत का धागा पुरुष दाहिनी बाँह पर, कोहनी के ऊपर, और स्त्रियाँ बाईं बाँह पर बाँधती हैं। चौदह दिन बाद इसे उतारते हैं।
पुणे में विसर्जन की शोभायात्रा कसबा गणपति से शुरू होती है, और पाँच मानाचे गणपति तय क्रम में निकलते हैं। ढोल-ताशे के साथ यह यात्रा लगभग तीस घंटे चलती है।
मुंबई में लालबागचा राजा गिरगाँव चौपाटी पर अरब सागर में विसर्जित होते हैं। मुंबई में हर साल लगभग डेढ़ लाख मूर्तियों का विसर्जन होता है।
नेपाल, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अनंत पूजा क्षीरसागर से जुड़ी है: लकड़ी के पाटे पर कुमकुम के चौदह तिलक, चौदह पूरियाँ और चौदह पुए। दिगंबर जैनों के लिए यह दशलक्षण पर्व का आख़िरी दिन है, और अगले दिन क्षमावणी, क्षमा माँगने का दिन।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: दर्भ के अनंत, हल्दी का चौदह गाँठों वाला धागा, विष्णु की पूजा, और गणपति की उत्तरपूजा व विसर्जन।
- 1अगर आपके घर में अनंत का व्रत होता है, तो संकल्प लें, और पूजा तक उपवास रखें।यह व्रत हर घर में नहीं होता: परिवार की रीत से चलता है, चौदह बरस का।
- 2चौकी पर मंडल बनाएँ, और उस पर दर्भ से बना सात फनों वाला शेषनाग रखें।कुछ घरों में सर्वतोभद्र मंडल बनाया जाता है।
- 3सामने हल्दी से रँगा चौदह गाँठों वाला धागा रखें।धागा बाज़ार में बना-बनाया मिलता है।
- 4सोलह उपचारों से विष्णु के अनंत रूप की पूजा करें: सुगंधित फूल, दीया और अगरबत्ती।विष्णु का अनंत रूप: शेष पर।
- 5नैवेद्य चढ़ाएँ, और वड़े व घारगे का वाण दें।वाण घर की रीत के अनुसार।
- 6पूजा के बाद अनंत बाँधें: पुरुष दाहिनी बाँह पर, स्त्रियाँ बाईं पर।चौदह दिन बाद उसे खोलते हैं।
- 7घर के गणपति की उत्तरपूजा और आख़िरी आरती करें।विदा करें, और जल्दी लौटने की विनती करें।
- 8फिर विसर्जन: घर पर बाल्टी में, कृत्रिम तालाब में, या जहाँ शहर अनुमति दे।शोभायात्रा में बच्चों और बुज़ुर्गों को घनी भीड़ से दूर रखें, पानी साथ रखें, और गहरे पानी में न उतरें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या सबको अनंत का व्रत रखना चाहिए?
नहीं, यह हर घर के लिए नहीं है। किसी के कहने पर या अनंत का धागा मिलने पर शुरू होता है, और फिर परिवार में चलता है।
चौदह दिन बाद धागा खोलकर क्या करें?
कई घरों में उसे बहते पानी में छोड़ते हैं, या पेड़ की जड़ में रख देते हैं।
विसर्जन की शोभायात्रा में क्या सावधानी रखें?
शोभायात्रा धीमी, भीड़ भरी, शोर वाली और गर्म होती है। बच्चों और बुज़ुर्गों को घनी भीड़ से दूर रखें, पानी साथ रखें, और पानी के पास वहीं जाएँ जहाँ बचाव दल हो।
क्या आज घर पर ही विसर्जन कर सकते हैं?
हाँ। मिट्टी की मूर्ति बाल्टी में घुलने दें, और वह पानी व मिट्टी पौधों में डालें। कई शहरों में कृत्रिम तालाब भी होते हैं।
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