ठाणे
ऐप पाएँ
कालदर्शी
ठाणे

व्रत · आषाढ़ कृष्ण एकादशी

कामिका एकादशी 2026

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (उत्तर भारत में श्रावण कृष्ण) कामिका एकादशी है। आज तुलसी का मान बड़ा है: उनके दर्शन, उन्हें जल, और उनके आगे घी का दीपक!

9अगरविवार, 9 अगस्त 2026आषाढ़ कृष्ण एकादशी सुबह 11:05 तक

अगली तारीख

तारीखरविवार, 9 अगस्त 2026
हिंदू तिथिआषाढ़ कृष्ण एकादशी, सुबह 11:05 तक

समय ठाणे के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामश्रावण कृष्ण एकादशी (उत्तर भारत)
  • कहाँपूरा भारत; उत्तर भारत में श्रावण कृष्ण एकादशी के रूप में
  • किसकी पूजागदाधर विष्णु, और तुलसी
  • एक पंक्ति मेंब्रह्महत्या जैसे बड़े पाप से भी मुक्ति देने वाला व्रत, और तुलसी पूजा का दिन।

कामिका एकादशी, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    पुराण में इस एकादशी की महिमा ब्रह्मा ने नारद को बताई, और वही कृष्ण ने युधिष्ठिर को। आज शंख, चक्र, गदा और कमल धारण किए चतुर्भुज गदाधर की पूजा होती है।

    आज तुलसी का विशेष महत्त्व है: पुराण कहता है कि उनके दर्शन मात्र से पाप धुल जाते हैं, और जो उन्हें जल देता है उसे यम का डर नहीं। व्रत हमेशा जैसा, और पारण द्वादशी को।

    कथा की सीख: क्रोध के एक पल का बोझ जीवन भर ढोना पड़ सकता है। ग़लती हुई हो तो उसे मानिए, और सुधारने का रास्ता खोजिए।

  2. 02

    क्रोधी व्यक्ति की कथा

    एक गाँव में एक क्रोधी व्यक्ति रहता था। एक दिन एक ब्राह्मण से उसका झगड़ा हो गया, और क्रोध में उसके हाथों उस ब्राह्मण की जान चली गई।

    ब्रह्महत्या के पाप से वह टूट गया। उसने ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करना चाहा, पर गाँव के ब्राह्मणों ने उसे रोक दिया, और उसके घर भोजन करने से भी मना कर दिया।

    उपाय पूछने वह एक ऋषि के पास गया। ऋषि ने कहा: कामिका एकादशी का व्रत करो। उसने व्रत किया, और रात को सपने में विष्णु ने आकर उसे ब्रह्महत्या के दोष से मुक्त कर दिया।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    आषाढ़ी के पंद्रह दिन बाद यह एकादशी आती है। घर पर हमेशा जैसा व्रत, विठ्ठल के दर्शन, और तुलसी वृंदावन के पास ख़ास पूजा।

    पुराण कहता है कि तुलसी के आगे अखंड घी का दीपक जलाने वाले का पुण्य चित्रगुप्त भी नहीं गिन सकते। आज तुलसी का पौधा लगाना भी पुण्य माना जाता है।

    कृष्ण के आगे घी या तिल के तेल का दीपक जलाना भी आज ख़ास माना जाता है।

    उत्तर भारत में यह श्रावण कृष्ण एकादशी है, यानी वहाँ के श्रावण की पहली एकादशी।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: एक दिन पहले हल्का खाएँ, एकादशी को व्रत और नाम-स्मरण करें, और द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण करें।

  1. 1एक दिन पहले, दशमी को, हल्का भोजन करें।एक बार सादा भोजन काफ़ी है। रात को भारी कुछ न लें, ताकि एकादशी को पेट हल्का रहे।
  2. 2पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।कई घरों में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
  3. 3एकादशी की सुबह स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।मन में तय करें: निर्जला, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार।
  4. 4विष्णु या विट्ठल की पूजा करें।दीया, अगरबत्ती, चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएँ। फल या दूध का नैवेद्य चढ़ाएँ।
  5. 5जो व्रत चुना है, उसे दिन भर निभाएँ।चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा और दालें न खाएँ। फलाहार पहले भगवान को चढ़ाएँ, फिर खाएँ।
  6. 6दिन भगवान के नाम में बिताएँ।हरिपाठ, विष्णु सहस्रनाम, भजन, या इस पेज पर उस एकादशी की कथा।
  7. 7शाम को फिर दीया जलाकर आरती करें।कई लोग रात भर भजन करते हुए जागरण करते हैं। अगले दिन काम हो तो थोड़ी देर काफ़ी है।
  8. 8द्वादशी को सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।पंचांग में पारण का समय दिया हो तो उसी का पालन करें। पहले भगवान को नैवेद्य, फिर भोजन।

क्या चाहिए?टिक करते जाएँ

9 में से 0 तैयार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आज तुलसी के लिए क्या करते हैं?

तुलसी के दर्शन करें, उन्हें पानी दें, और उनके पास घी का दीया जलाएँ। आज नई तुलसी लगाना भी पुण्य का माना जाता है।

व्रत में क्या खा सकते हैं?

यह आपके व्रत पर निर्भर है: कुछ नहीं, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार। फलाहार में साबूदाना, समा के चावल, शकरकंद, आलू और मूँगफली चलते हैं। अनाज और दालें नहीं।

क्या पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर निर्जला व्रत नहीं है। सबसे कठिन व्रत में द्वादशी के सूर्योदय तक पानी भी नहीं होता, पर ज़्यादातर लोग हल्का व्रत रखते हैं।

व्रत कब खोलें?

द्वादशी को सूर्योदय के बाद, इसे पारण कहते हैं। अगर द्वादशी का पहला भाग, हरिवासर, सूर्योदय के बाद भी चल रहा हो, तो उसके ख़त्म होने तक रुकें। पंचांग में यह समय दिया होता है।

कभी-कभी एकादशी की दो तारीख़ें क्यों होती हैं?

जब कोई तिथि घटती या बढ़ती है, तो स्मार्त और भागवत (वारकरी) परंपराओं के नियम अलग हो जाते हैं, इसलिए दोनों की एकादशी अलग-अलग दिन पड़ सकती है। अपने घर की परंपरा का पालन करें।

किन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं?

बीमार, गर्भवती महिलाएँ और जिन्हें स्वास्थ्य की कोई समस्या है, उन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं, न छोटे बच्चों और बहुत बुज़ुर्गों को। वे दूध और फल लें और दिन प्रार्थना में बिताएँ। कोई बीमारी हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।

अगर ग़लती से व्रत टूट जाए तो?

चिंता न करें। भगवान से क्षमा माँगें, बाक़ी दिन नाम-स्मरण में बिताएँ, और अगली एकादशी ठीक से रखें।

2026 की तारीखें

इस साल 1 बार, ठाणे के समय के अनुसार।

9अगकामिका एकादशीरविवार · आषाढ़ कृष्ण एकादशी · सुबह 11:05 तक

2026 की शहर के अनुसार तारीखें

इन शहरों में नीचे की तारीखें ठाणे से अलग हैं; बाकी वही।

लंदन8 अग
न्यू जर्सी8 अग

2027 की तारीखें

2027 में 2 बार, ठाणे के समय के अनुसार।

29जुलाईकामिका एकादशी (स्मार्त)गुरुवार · आषाढ़ कृष्ण दशमी · भोर 5:13 तक
30जुलाईकामिका एकादशी (वैष्णव)शुक्रवार · आषाढ़ कृष्ण द्वादशी

ऐप में याद लगाएँ

ऐप एक दिन पहले और उसी दिन सूचना भेजता है, बिना इंटरनेट भी।

ऐप पाएँ

कालदर्शी को बेहतर बनाने में मदद करेंगे?

हम कालदर्शी का उपयोग गिनने के लिए Google Analytics इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसमें कुकीज़ लगती हैं। आपका नाम या स्थान नहीं लिया जाता। गोपनीयता