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व्रत · पौष शुक्ल दशमी

पुत्रदा एकादशी 2027

पौष शुक्ल एकादशी पौष पुत्रदा एकादशी है: संतान के लिए रखा जाने वाला व्रत। और कुछ वर्षों में दक्षिण की वैकुंठ एकादशी भी यही होती है!

18जनसोमवार, 18 जनवरी 2027पौष शुक्ल दशमी सुबह 10:27 तक

अगली तारीख

तारीखसोमवार, 18 जनवरी 2027
हिंदू तिथिपौष शुक्ल दशमी, सुबह 10:27 तक

समय पुणे के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामपौष पुत्रदा एकादशी, वैकुंठ एकादशी (कुछ वर्षों में, दक्षिण भारत)
  • कहाँपूरा भारत; उत्तर भारत में विशेष लोकप्रिय
  • किसकी पूजानारायण (केशव)
  • एक पंक्ति मेंइस व्रत से राजा सुकेतुमान को पुत्र हुआ: अगली पीढ़ी के लिए की गई प्रार्थना।

पुत्रदा एकादशी, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    पुत्रदा यानी पुत्र देने वाली। साल में ऐसी दो एकादशियाँ आती हैं: एक पौष में, एक श्रावण में। इनमें पौष वाली उत्तर भारत में ज़्यादा मानी जाती है।

    आज संतान की इच्छा रखने वाले दंपती व्रत रखकर विष्णु की पूजा करते हैं, और जिनके बच्चे हैं, वे उनके कल्याण के लिए। पुराने समय में पुत्र इसलिए चाहिए था कि पितरों का श्राद्ध वही करता था।

    कथा की सीख: राजा चिंता में सब छोड़कर निकल पड़े, और रास्ते में ही उन्हें उत्तर मिल गया। मन की चिंता भीतर दबाकर मत रखिए; सही लोगों तक पहुँचिए।

  2. 02

    राजा सुकेतुमान की कथा

    भद्रावती नगरी के राजा सुकेतुमान और रानी शैब्या के कोई संतान नहीं थी। उनके बाद पितरों को तर्पण कौन देगा, इस चिंता से राजा टूट गए। पितरों को भी यही चिंता थी।

    एक दिन वे अकेले घोड़े पर घने जंगल में निकल गए। भूख-प्यास से व्याकुल होकर भटकते हुए उन्हें मानसरोवर जैसा, कमलों से भरा एक सरोवर दिखा, और किनारे पर ऋषियों के आश्रम।

    राजा ने ऋषियों को प्रणाम किया। वे बोले: हम दस विश्वेदेव हैं, यहाँ स्नान करने आए हैं। आज पुत्रदा एकादशी है: यह व्रत करो। राजा ने पूरा उपवास किया, द्वादशी को पारण करके ऋषियों को नमन किया, और घर लौट आए। आगे रानी शैब्या को पुत्र हुआ।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    महाराष्ट्र में यह एकादशी भी हमेशा जैसी: व्रत और विठ्ठल के भजन। संतान की इच्छा रखने वाले दंपती आज यह व्रत ख़ास तौर पर रखते हैं।

    दक्षिण भारत में धनु महीने की शुक्ल एकादशी वैकुंठ एकादशी के रूप में मनाई जाती है। वह किसी साल मोक्षदा एकादशी को पड़ती है, तो किसी साल इसी पुत्रदा एकादशी को।

    उस दिन श्रीरंगम और तिरुमला के मंदिरों में साल में एक ही बार खुलने वाला वैकुंठ द्वार खुलता है।

    उत्तर भारत में यह पौष पुत्रदा ज़्यादा लोकप्रिय है; दूसरे राज्यों में श्रावण की पुत्रदा को ज़्यादा मान मिलता है।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: एक दिन पहले हल्का खाएँ, एकादशी को व्रत और नाम-स्मरण करें, और द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण करें।

  1. 1एक दिन पहले, दशमी को, हल्का भोजन करें।एक बार सादा भोजन काफ़ी है। रात को भारी कुछ न लें, ताकि एकादशी को पेट हल्का रहे।
  2. 2पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।कई घरों में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
  3. 3एकादशी की सुबह स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।मन में तय करें: निर्जला, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार।
  4. 4विष्णु या विट्ठल की पूजा करें।दीया, अगरबत्ती, चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएँ। फल या दूध का नैवेद्य चढ़ाएँ।
  5. 5जो व्रत चुना है, उसे दिन भर निभाएँ।चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा और दालें न खाएँ। फलाहार पहले भगवान को चढ़ाएँ, फिर खाएँ।
  6. 6दिन भगवान के नाम में बिताएँ।हरिपाठ, विष्णु सहस्रनाम, भजन, या इस पेज पर उस एकादशी की कथा।
  7. 7शाम को फिर दीया जलाकर आरती करें।कई लोग रात भर भजन करते हुए जागरण करते हैं। अगले दिन काम हो तो थोड़ी देर काफ़ी है।
  8. 8द्वादशी को सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।पंचांग में पारण का समय दिया हो तो उसी का पालन करें। पहले भगवान को नैवेद्य, फिर भोजन।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्रत में क्या खा सकते हैं?

यह आपके व्रत पर निर्भर है: कुछ नहीं, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार। फलाहार में साबूदाना, समा के चावल, शकरकंद, आलू और मूँगफली चलते हैं। अनाज और दालें नहीं।

क्या पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर निर्जला व्रत नहीं है। सबसे कठिन व्रत में द्वादशी के सूर्योदय तक पानी भी नहीं होता, पर ज़्यादातर लोग हल्का व्रत रखते हैं।

व्रत कब खोलें?

द्वादशी को सूर्योदय के बाद, इसे पारण कहते हैं। अगर द्वादशी का पहला भाग, हरिवासर, सूर्योदय के बाद भी चल रहा हो, तो उसके ख़त्म होने तक रुकें। पंचांग में यह समय दिया होता है।

कभी-कभी एकादशी की दो तारीख़ें क्यों होती हैं?

जब कोई तिथि घटती या बढ़ती है, तो स्मार्त और भागवत (वारकरी) परंपराओं के नियम अलग हो जाते हैं, इसलिए दोनों की एकादशी अलग-अलग दिन पड़ सकती है। अपने घर की परंपरा का पालन करें।

किन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं?

बीमार, गर्भवती महिलाएँ और जिन्हें स्वास्थ्य की कोई समस्या है, उन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं, न छोटे बच्चों और बहुत बुज़ुर्गों को। वे दूध और फल लें और दिन प्रार्थना में बिताएँ। कोई बीमारी हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।

अगर ग़लती से व्रत टूट जाए तो?

चिंता न करें। भगवान से क्षमा माँगें, बाक़ी दिन नाम-स्मरण में बिताएँ, और अगली एकादशी ठीक से रखें।

2027 की तारीखें

इस साल 2 बार, पुणे के समय के अनुसार।

18जनपुत्रदा एकादशी (स्मार्त)सोमवार · पौष शुक्ल दशमी
19जनपुत्रदा एकादशी (वैष्णव)मंगलवार · पौष शुक्ल एकादशी · सुबह 7:49 तक

2027 की शहर के अनुसार तारीखें

सभी तारीखें सभी शहरों में एक ही हैं।

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