व्रत · भाद्रपद शुक्ल पंचमी
ऋषि पंचमी 2026
भाद्रपद शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी: सप्तऋषियों को वंदन। आज बैल की मेहनत से उगा कुछ नहीं खाते, इसलिए थाली में ऋषि की भाजी!
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संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामऋषिपंचमी, सप्तऋषि पूजा
- कहाँमहाराष्ट्र, ख़ासकर गाँव और कोंकण; नेपाल
- किसकी पूजासप्तऋषि (कश्यप, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वसिष्ठ, अत्रि) और अरुंधती
- एक पंक्ति मेंसप्तऋषि और अरुंधती की पूजा, और अपने हाथ की मेहनत से उगे अन्न का आदर।
ऋषि पंचमी, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
ऋषि हमारे सबसे पुराने गुरु हैं। आज उन्हें वंदन कीजिए, और उनकी सीख याद कीजिए।
आज का नियम ख़ास है: हल से जोता, बैल की मेहनत से उगा कुछ नहीं खाना। फल और व्रत के आम पदार्थ भी नहीं: सिर्फ़ बिना जोती ज़मीन पर, इंसान के हाथ से उगा अन्न।
परंपरा से यह प्रायश्चित्त का व्रत भी माना जाता है: रोज़ के आचरण में जाने-अनजाने हुई भूलों की क्षमा माँगना। इसे मुख्यतः स्त्रियाँ करती हैं।
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आकाश के सप्तऋषि
रात को उत्तर की ओर देखिए: सात तारे करछी जैसा आकार बनाते हैं। वही सप्तऋषि हैं: कश्यप, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वसिष्ठ और अत्रि।
वसिष्ठ के ठीक पास एक छोटा, धुँधला तारा है: अरुंधती, वसिष्ठ की पत्नी। अग्नि की पत्नी स्वाहा बाक़ी छह ऋषिपत्नियों का रूप ले सकीं, पर अरुंधती का कभी नहीं। इतनी निष्ठावान थीं वे।
इसीलिए विवाह में वर वधू को अरुंधती का तारा दिखाता है: ऐसी जोड़ी बने। और ऋषि पंचमी पर सात ऋषियों के साथ अरुंधती की भी पूजा होती है।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
आज का ख़ास पकवान ऋषि की भाजी: अरबी के पत्ते, सूरन, वाल की फलियाँ, लाल कद्दू, मटर, भिंडी और कोमल चौलाई, सब साथ पकाए हुए।
सुबह अपामार्ग (आघाड़ा) की दातुन से दाँत साफ़ करते हैं, स्नान करते हैं, और सप्तऋषि व अरुंधती की षोडशोपचार पूजा करते हैं, आठ सुपारियाँ रखकर।
शेगाँव के संत गजानन महाराज ने इसी तिथि को समाधि ली। और चतुर्थी पर बिठाए कई गणपति आज विसर्जित होते हैं।
नेपाल में भी स्त्रियाँ यह व्रत करती हैं। माहेश्वरी और कायस्थ समाज में यह दिन रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: अपामार्ग से दातुन, स्नान, आठ सुपारियों पर सप्तर्षि और अरुंधती की पूजा, और दिन भर सिर्फ़ ऋषि भाजी।
- 1सुबह अपामार्ग की टहनी से दातुन करें।इन दिनों अपामार्ग की टहनियाँ बाज़ार में मिलती हैं।
- 2स्नान करें; कुछ घरों में मिट्टी, गोबर और भस्म से भी स्नान होता है।सादा स्नान भी काफ़ी है।
- 3चौकी पर आठ सुपारियाँ रखें: सात ऋषि और अरुंधती।सात ऋषि: कश्यप, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वसिष्ठ और अत्रि।
- 4सोलह उपचारों से उनकी पूजा करें: जल, चंदन, अक्षत और फूल।अरुंधती को वसिष्ठ के पास रखें।
- 5बैल की मेहनत के बिना उगी सब्ज़ियों से ऋषि भाजी बनाएँ।सारी सब्ज़ियाँ एक साथ, ज़्यादातर घरों में तेल में, कम मसाले के साथ।
- 6वही नैवेद्य में चढ़ाएँ, और दिन भर सिर्फ़ वही खाएँ।साल में एक दिन अपनी ही मेहनत का अन्न: यही आज का नियम है।
- 7अगर आपके गणपति डेढ़ दिन के हैं, तो उनका विसर्जन आज है।उत्तरपूजा, आरती, और घर पर बाल्टी में या कृत्रिम तालाब में विसर्जन।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज बैल की मेहनत का अन्न क्यों नहीं?
यह याद दिलाता है कि साल में कम से कम एक बार अपनी मेहनत का अन्न खाएँ। इसलिए जोती हुई ज़मीन का कुछ नहीं।
तो आज क्या खाएँ?
ऋषि भाजी, और जो आपके घर में हाथ से उगाया हुआ माना जाता है। आज व्रत के रोज़ के पकवान नहीं।
क्या यह व्रत सिर्फ़ महिलाएँ रखती हैं?
ज़्यादातर महिलाएँ रखती हैं। पर यह भी कहा गया है कि जिन स्त्री-पुरुषों ने श्रावणी नहीं की, वे भी इसे रखें।
बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग हों तो?
सेहत पहले। पूजा करें, और ज़रूरत का सादा भोजन लें। शक हो तो डॉक्टर से पूछें।
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