न्यू जर्सी
ऐप पाएँ
कालदर्शी
न्यू जर्सी

व्रत · मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी

मोक्षदा एकादशी 2026

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी मोक्षदा एकादशी है, और इसी दिन गीता जयंती है। यही वह दिन है जब कुरुक्षेत्र में कृष्ण ने अर्जुन को गीता सुनाई!

19दिसशनिवार, 19 दिसंबर 2026मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी सुबह 11:39 तक

अगली तारीख

तारीखशनिवार, 19 दिसंबर 2026
हिंदू तिथिमार्गशीर्ष शुक्ल दशमी, सुबह 11:39 तक

समय न्यू जर्सी के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामगीता जयंती, मत्स्य द्वादशी
  • कहाँपूरा भारत; गीता जयंती का बड़ा उत्सव कुरुक्षेत्र में
  • किसकी पूजाविष्णु और कृष्ण
  • एक पंक्ति मेंमोक्ष देने वाली एकादशी: पितरों की मुक्ति के लिए व्रत, और गीता का जन्मदिन।

मोक्षदा एकादशी, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    मोक्षदा यानी मोक्ष देने वाली। यह एकादशी अपने लिए तो रखते ही हैं, पर अपने पितरों के लिए भी, यही इस दिन की ख़ास पहचान है।

    और इसी दिन गीता जयंती: महाभारत युद्ध की शुरुआत में कृष्ण ने अर्जुन को सात सौ श्लोकों की भगवद्गीता सुनाई। व्रत हमेशा जैसा, और पारण द्वादशी को।

    गीता का सार सीधा है: फल की चिंता छोड़कर अपना काम कीजिए। आज एक अध्याय भी पढ़ लिया, तो दिन सार्थक!

  2. 02

    राजा वैखानस और उनके पिता

    चंपक नगरी के राजा वैखानस प्रजा का ध्यान रखने वाले राजा थे। एक रात उन्होंने सपना देखा कि उनके पिता नरक में यातना भोग रहे हैं, और बेटे से मुक्ति की गुहार कर रहे हैं।

    राजा ने ब्राह्मणों से पूछा, और उन्होंने उन्हें पर्वत मुनि के पास भेजा। मुनि ने ध्यान लगाकर देखा: पिता ने जीवन में अपनी पत्नी के प्रति कर्तव्य की अनदेखी की थी, यह उसी का फल था। उपाय एक ही है, उन्होंने कहा: मोक्षदा एकादशी का व्रत।

    राजा ने पत्नी, बच्चों और संबंधियों के साथ यह व्रत पूरा किया, और उसका पुण्य पिता को अर्पित किया। उसी क्षण पिता नरक से मुक्त हुए, और देवता उन्हें स्वर्ग ले गए।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    घर पर व्रत, विष्णु और कृष्ण की पूजा, और गीता का पाठ। कुछ लोग आज पूरी गीता पढ़ते हैं, तो कुछ एक अध्याय।

    महाराष्ट्र में गीता की बात हो तो ज्ञानेश्वरी भी याद आती है: संत ज्ञानेश्वर का मराठी में लिखा गीता भाष्य। कई घरों और मंदिरों में आज ज्ञानेश्वरी का पारायण भी होता है।

    हरियाणा के कुरुक्षेत्र में, जहाँ गीता कही गई, ब्रह्म सरोवर के किनारे गीता महोत्सव लगता है: सैकड़ों स्टॉल, गीता आरती, और कुरुक्षेत्र की अड़तालीस कोस की परिक्रमा।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: एक दिन पहले हल्का खाएँ, एकादशी को व्रत और नाम-स्मरण करें, और द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण करें।

  1. 1एक दिन पहले, दशमी को, हल्का भोजन करें।एक बार सादा भोजन काफ़ी है। रात को भारी कुछ न लें, ताकि एकादशी को पेट हल्का रहे।
  2. 2पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।कई घरों में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
  3. 3एकादशी की सुबह स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।मन में तय करें: निर्जला, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार।
  4. 4विष्णु या विट्ठल की पूजा करें।दीया, अगरबत्ती, चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएँ। फल या दूध का नैवेद्य चढ़ाएँ।
  5. 5जो व्रत चुना है, उसे दिन भर निभाएँ।चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा और दालें न खाएँ। फलाहार पहले भगवान को चढ़ाएँ, फिर खाएँ।
  6. 6दिन भगवान के नाम में बिताएँ।हरिपाठ, विष्णु सहस्रनाम, भजन, या इस पेज पर उस एकादशी की कथा।
  7. 7शाम को फिर दीया जलाकर आरती करें।कई लोग रात भर भजन करते हुए जागरण करते हैं। अगले दिन काम हो तो थोड़ी देर काफ़ी है।
  8. 8द्वादशी को सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।पंचांग में पारण का समय दिया हो तो उसी का पालन करें। पहले भगवान को नैवेद्य, फिर भोजन।

क्या चाहिए?टिक करते जाएँ

9 में से 0 तैयार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्रत में क्या खा सकते हैं?

यह आपके व्रत पर निर्भर है: कुछ नहीं, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार। फलाहार में साबूदाना, समा के चावल, शकरकंद, आलू और मूँगफली चलते हैं। अनाज और दालें नहीं।

क्या पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर निर्जला व्रत नहीं है। सबसे कठिन व्रत में द्वादशी के सूर्योदय तक पानी भी नहीं होता, पर ज़्यादातर लोग हल्का व्रत रखते हैं।

व्रत कब खोलें?

द्वादशी को सूर्योदय के बाद, इसे पारण कहते हैं। अगर द्वादशी का पहला भाग, हरिवासर, सूर्योदय के बाद भी चल रहा हो, तो उसके ख़त्म होने तक रुकें। पंचांग में यह समय दिया होता है।

कभी-कभी एकादशी की दो तारीख़ें क्यों होती हैं?

जब कोई तिथि घटती या बढ़ती है, तो स्मार्त और भागवत (वारकरी) परंपराओं के नियम अलग हो जाते हैं, इसलिए दोनों की एकादशी अलग-अलग दिन पड़ सकती है। अपने घर की परंपरा का पालन करें।

किन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं?

बीमार, गर्भवती महिलाएँ और जिन्हें स्वास्थ्य की कोई समस्या है, उन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं, न छोटे बच्चों और बहुत बुज़ुर्गों को। वे दूध और फल लें और दिन प्रार्थना में बिताएँ। कोई बीमारी हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।

अगर ग़लती से व्रत टूट जाए तो?

चिंता न करें। भगवान से क्षमा माँगें, बाक़ी दिन नाम-स्मरण में बिताएँ, और अगली एकादशी ठीक से रखें।

2026 की तारीखें

इस साल 2 बार, न्यू जर्सी के समय के अनुसार।

19दिसमोक्षदा एकादशी (स्मार्त)शनिवार · मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी
20दिसमोक्षदा एकादशी (वैष्णव)रविवार · मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी · सुबह 9:45 तक

2026 की शहर के अनुसार तारीखें

सभी तारीखें सभी शहरों में एक ही हैं।

2027 की तारीखें

2027 में 1 बार, न्यू जर्सी के समय के अनुसार।

9दिसमोक्षदा एकादशीगुरुवार · मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी · शाम 4:50 तक

ऐप में याद लगाएँ

ऐप एक दिन पहले और उसी दिन सूचना भेजता है, बिना इंटरनेट भी।

ऐप पाएँ

कालदर्शी को बेहतर बनाने में मदद करेंगे?

हम कालदर्शी का उपयोग गिनने के लिए Google Analytics इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसमें कुकीज़ लगती हैं। आपका नाम या स्थान नहीं लिया जाता। गोपनीयता