व्रत · भाद्रपद शुक्ल तृतीया
हरतालिका तीज 2026
भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरतालिका: वह व्रत जो पार्वती ने शिव को पाने के लिए किया। आज कठोर उपवास, और रेत के शिवलिंग की पूजा।
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संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामहरितालिका, तीज
- कहाँमहाराष्ट्र; बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान और नेपाल में हरतालिका तीज
- किसकी पूजाशिव और पार्वती, पार्वती की सखी के साथ
- एक पंक्ति मेंपार्वती के तप की याद: शिव को पति रूप में पाने के लिए किया गया व्रत।
हरतालिका तीज, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
नाम में ही कथा है: हरित यानी जिसे ले जाया गया, और आलिका यानी सखी। सखी पार्वती को घर से दूर ले गई, इसलिए हरतालिका।
पार्वती ने शिव के लिए कठोर तप किया, और आख़िर वे प्रसन्न हुए। आज स्त्रियाँ उन्हीं की राह चलती हैं: दिन भर कठोर उपवास, और शिव-पार्वती की पूजा।
इसमें सीख: मन ने जो ठान लिया, उसके लिए धैर्य और निष्ठा से डटे रहिए। पार्वती ने यही किया।
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पार्वती और उनकी सखी
पार्वती के मन में केवल शिव थे। पर उनके पिता, हिमालय, उनका विवाह विष्णु से कराने चले।
पार्वती को यह स्वीकार नहीं था। उनकी सखी उन्हें घर से दूर एक वन में ले गई, जहाँ कोई ढूँढ न सके।
वहाँ पार्वती ने शिवलिंग की पूजा की और कठोर तप किया। उनके तप से शिव प्रसन्न हुए, और उन्होंने पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
घर पर रेत का शिवलिंग बनाते हैं, या शिव, पार्वती और सखी की मूर्तियाँ लाते हैं। फिर षोडशोपचार पूजा, सुहाग की सामग्री, नैवेद्य, आरती और कथा।
महाराष्ट्र में विवाहित स्त्रियाँ, विधवाएँ और लड़कियाँ भी यह व्रत करती हैं। रात को जागरण: खेल, गीत और देवी की आराधना।
अगले दिन आक (रुई) के पत्ते पर लगा घी चाटकर व्रत खोलते हैं।
बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान और नेपाल में यह हरतालिका तीज है: कई विवाहित स्त्रियाँ पति के लिए पानी तक न पीकर निर्जला व्रत रखती हैं।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: संकल्प, बालू का शिवलिंग, सोलह उपचारों की पूजा, रात का जागरण, और सुबह आक के पत्ते से पारण।
- 1सुबह स्नान करके संकल्प लें, और उपवास शुरू करें।कई महिलाएँ पानी तक नहीं पीतीं, कई पानी या फल लेती हैं। उतना ही करें जितना सेहत इजाज़त दे।
- 2साफ़ बालू से शिवलिंग बनाएँ, या शिव, पार्वती और सखी की मूर्तियाँ रखें।मूर्तियाँ बाज़ार में मिलती हैं। नदी की या कोई भी साफ़ बालू लें।
- 3सोलह उपचारों से पूजा करें: जल, चंदन, हल्दी-कुमकुम, अक्षत, फूल और पत्ते।कई घरों में बेल समेत कई पेड़ों के पत्ते चढ़ाए जाते हैं।
- 4पार्वती को सुहाग का सामान चढ़ाएँ: हरी चूड़ियाँ, कुमकुम, कंघी, शीशा।घर में जो सामान है वही काफ़ी है: नया लेना ज़रूरी नहीं।
- 5नैवेद्य चढ़ाएँ, आरती करें, और हरतालिका की कथा पढ़ें या सुनें।कथा पार्वती और उसकी सखी की है, जो ऊपर दी गई है।
- 6रात को सहेलियों के साथ जागरण करें: गीत, खेल और देवी का नाम।नींद आए तो कम से कम कुछ देर जागें।
- 7अगली सुबह उत्तरपूजा करें, और आक के पत्ते पर लगा थोड़ा घी चाटकर उपवास खोलें।कई घरों में बाद में बालू का शिवलिंग पानी में विसर्जित किया जाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पानी के बिना ही व्रत रखना ज़रूरी है?
नहीं। महाराष्ट्र में कई महिलाएँ पानी या फल लेकर व्रत रखती हैं। निर्जला व्रत उत्तर भारत में ज़्यादा रखा जाता है। जो हो सके, मन से करें।
क्या बालू के शिवलिंग की जगह मूर्तियाँ चलेंगी?
हाँ। शिवलिंग के साथ पार्वती और सखी की मूर्तियाँ लाकर पूजा करना भी आम है।
पूजा के बाद बालू के शिवलिंग का क्या करें?
उत्तरपूजा के बाद उसे बहते पानी में, या घर पर एक बर्तन के पानी में विसर्जित करें, और वह पानी पौधों में डाल दें।
बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग हों तो?
सेहत पहले। फल, दूध और पानी लें, या सिर्फ़ पूजा करें। शक हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।
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