व्रत · ज्येष्ठ कृष्ण दशमी
योगिनी एकादशी 2026
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी (उत्तर भारत में आषाढ़ कृष्ण) योगिनी एकादशी है। कर्तव्य भूले हेममाली को इसी व्रत से उसका पुराना रूप वापस मिला!
अगली तारीख
समय मुंबई के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामआषाढ़ कृष्ण एकादशी (उत्तर भारत)
- कहाँपूरा भारत; उत्तर भारत में आषाढ़ कृष्ण एकादशी के रूप में
- किसकी पूजाविष्णु; महाराष्ट्र में विठ्ठल
- एक पंक्ति मेंशाप से मुक्ति: कुबेर का माली हेममाली इस व्रत से फिर स्वस्थ हो गया।
योगिनी एकादशी, थोड़ा विस्तार से
- 01
पर्व के बारे में
योगिनी आषाढ़ी से पहले की एकादशी है। इस समय पालकियाँ पंढरपुर की राह पर होती हैं, और वारकरी चलते-चलते ही यह व्रत रखते हैं।
पुराण में इसका फल बहुत बड़ा बताया गया है: अठासी हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना। व्रत हमेशा जैसा, और पारण द्वादशी को।
कथा की सीख: प्रेम हो या काम, दोनों को अपना-अपना समय दीजिए। एक को भूले, तो दूसरा भी हाथ से जा सकता है।
- 02
हेममाली की कथा
अलकापुरी में कुबेर रहते थे, शिव के बड़े भक्त। उनका माली हेममाली रोज़ मानसरोवर से फूल लाता था, कुबेर की शिवपूजा के लिए।
एक दिन फूल तोड़कर वह सीधे लौटने के बजाय पत्नी स्वरूपवती के पास चला गया, और उसके साथ लौटना ही भूल गया। पूजा का समय हुआ, पर फूल नहीं थे। क्रोधित कुबेर ने शाप दिया: तुम्हें कोढ़ होगा, और तुम पत्नी से बिछड़ जाओगे।
भयानक जंगल में भटकते हुए वह हिमालय में मार्कंडेय ऋषि के आश्रम पहुँचा। ऋषि ने कहा: योगिनी एकादशी का व्रत करो। हेममाली ने उपवास किया, उसे अपना सुंदर यक्ष रूप वापस मिला, और वह पत्नी के पास लौट आया।
- 03
महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
पंढरपुर की वारी लगभग इक्कीस दिन चलती है, इसलिए योगिनी एकादशी पर आळंदी और देहू की पालकियाँ राह में ही होती हैं। पड़ाव पर भजन-कीर्तन होते हैं।
घर पर हमेशा जैसा व्रत: साबूदाना, राजगिरा, आलू और मूँगफली। विठ्ठल के दर्शन, और द्वादशी को पारण।
उत्तर भारत में यही आषाढ़ कृष्ण एकादशी है, क्योंकि वहाँ महीना पूर्णिमा को पूरा होता है। नाम और कथा वही रहते हैं।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: एक दिन पहले हल्का खाएँ, एकादशी को व्रत और नाम-स्मरण करें, और द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण करें।
- 1एक दिन पहले, दशमी को, हल्का भोजन करें।एक बार सादा भोजन काफ़ी है। रात को भारी कुछ न लें, ताकि एकादशी को पेट हल्का रहे।
- 2पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।कई घरों में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
- 3एकादशी की सुबह स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।मन में तय करें: निर्जला, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार।
- 4विष्णु या विट्ठल की पूजा करें।दीया, अगरबत्ती, चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएँ। फल या दूध का नैवेद्य चढ़ाएँ।
- 5जो व्रत चुना है, उसे दिन भर निभाएँ।चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा और दालें न खाएँ। फलाहार पहले भगवान को चढ़ाएँ, फिर खाएँ।
- 6दिन भगवान के नाम में बिताएँ।हरिपाठ, विष्णु सहस्रनाम, भजन, या इस पेज पर उस एकादशी की कथा।
- 7शाम को फिर दीया जलाकर आरती करें।कई लोग रात भर भजन करते हुए जागरण करते हैं। अगले दिन काम हो तो थोड़ी देर काफ़ी है।
- 8द्वादशी को सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।पंचांग में पारण का समय दिया हो तो उसी का पालन करें। पहले भगवान को नैवेद्य, फिर भोजन।
क्या चाहिए?टिक करते जाएँ
9 में से 0 तैयार
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
व्रत में क्या खा सकते हैं?
यह आपके व्रत पर निर्भर है: कुछ नहीं, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार। फलाहार में साबूदाना, समा के चावल, शकरकंद, आलू और मूँगफली चलते हैं। अनाज और दालें नहीं।
क्या पानी पी सकते हैं?
हाँ, अगर निर्जला व्रत नहीं है। सबसे कठिन व्रत में द्वादशी के सूर्योदय तक पानी भी नहीं होता, पर ज़्यादातर लोग हल्का व्रत रखते हैं।
व्रत कब खोलें?
द्वादशी को सूर्योदय के बाद, इसे पारण कहते हैं। अगर द्वादशी का पहला भाग, हरिवासर, सूर्योदय के बाद भी चल रहा हो, तो उसके ख़त्म होने तक रुकें। पंचांग में यह समय दिया होता है।
कभी-कभी एकादशी की दो तारीख़ें क्यों होती हैं?
जब कोई तिथि घटती या बढ़ती है, तो स्मार्त और भागवत (वारकरी) परंपराओं के नियम अलग हो जाते हैं, इसलिए दोनों की एकादशी अलग-अलग दिन पड़ सकती है। अपने घर की परंपरा का पालन करें।
किन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं?
बीमार, गर्भवती महिलाएँ और जिन्हें स्वास्थ्य की कोई समस्या है, उन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं, न छोटे बच्चों और बहुत बुज़ुर्गों को। वे दूध और फल लें और दिन प्रार्थना में बिताएँ। कोई बीमारी हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।
अगर ग़लती से व्रत टूट जाए तो?
चिंता न करें। भगवान से क्षमा माँगें, बाक़ी दिन नाम-स्मरण में बिताएँ, और अगली एकादशी ठीक से रखें।
2026 की तारीखें
इस साल 2 बार, मुंबई के समय के अनुसार।
2026 की शहर के अनुसार तारीखें
सभी तारीखें सभी शहरों में एक ही हैं।
2027 की तारीखें
2027 में 1 बार, मुंबई के समय के अनुसार।
ऐप में याद लगाएँ
ऐप एक दिन पहले और उसी दिन सूचना भेजता है, बिना इंटरनेट भी।