व्रत · कार्तिक शुक्ल चतुर्थी
विनायक चतुर्थी 2026
हर महीने की शुक्ल चतुर्थी विनायक चतुर्थी है, गणेश का दिन। व्रत, मोदक और गणेश पूजा; मंगलवार को पड़े तो अंगारकी।
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संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामविनायकी चतुर्थी
- कहाँपूरा भारत, हर महीने
- किसकी पूजागणेश
- एक पंक्ति मेंहर महीने की शुक्ल चतुर्थी, गणेश की। साल की दो बड़ी: माघ की गणेश जयंती और भाद्रपद की गणेश चतुर्थी।
विनायक चतुर्थी, थोड़ा विस्तार से
- 01
पर्व के बारे में
हर महीने गणेश की दो चतुर्थी आती हैं। अमावस्या के बाद, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी है; पूर्णिमा के बाद, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी।
संकष्टी संकट दूर करने के लिए होती है, और उसका व्रत चंद्रोदय के बाद खुलता है। विनायक चतुर्थी गणेश की कृपा के लिए, ऋद्धि-सिद्धि के लिए। कालदर्शी यह दिन इस बात से तय करता है कि मध्याह्न में चतुर्थी किस दिन है।
गणेश आरंभ के देवता हैं। महीने में एक बार रुककर उनका स्मरण करना, और आगे के कामों के लिए सद्बुद्धि माँगना, यही इस व्रत का अर्थ है।
- 02
माता-पिता की परिक्रमा
कैलास पर नारद ने शिव को ज्ञान का एक फल दिया। शिव उसे अपने दोनों पुत्रों, गणेश और कार्तिकेय में बाँटना चाहते थे, पर नारद ने कहा, फल मत बाँटिए: जो पहले संसार की तीन परिक्रमा करके आए, उसे दीजिए।
कार्तिकेय तुरंत अपने मोर पर निकल पड़े। गणेश ने सोचा: मेरे लिए मेरे माता-पिता, शिव और शक्ति, ही पूरा संसार हैं। उन्होंने उन्हीं की परिक्रमा की, और फल माँगा।
फल गणेश को मिला। तेज़ी से बड़ी सोच है, और जो पास है उसी में सब कुछ हो सकता है: इसीलिए गणेश बुद्धि के देवता हैं।
- 03
महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
घर पर व्रत और गणेश पूजा: दूर्वा, लाल फूल, और मोदक या लड्डू का नैवेद्य। उनके हाथ का मोदक-पात्र ही बताता है: मीठा उन्हें प्रिय है।
यह चतुर्थी मंगलवार को पड़े तो अंगारकी कहलाती है। अंगारकी संकष्टी की तरह यह भी ख़ास मानी जाती है, और उस दिन गणेश मंदिरों में भीड़ बढ़ जाती है।
साल की बारह विनायक चतुर्थियों में से दो बड़े त्योहार बन गईं: माघ की गणेश जयंती, मंदिरों में, और भाद्रपद की गणेश चतुर्थी, घर-घर में।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: दोपहर में गणेश पूजा: दूर्वा, लाल फूल, मोदक और आरती।
- 1सुबह स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- 2व्रत रखें तो दिन भर फल, दूध या व्रत का खाना लें।
- 3दोपहर में, जब चतुर्थी हो, साफ़ चौकी पर गणेश की प्रतिमा रखें।
- 4दीया और अगरबत्ती जलाएँ।
- 5दूर्वा, लाल फूल, हल्दी-कुमकुम और अक्षत चढ़ाएँ।
- 6गणपति अथर्वशीर्ष या गणेश के नामों का पाठ करें।
- 7मोदक या लड्डू का नैवेद्य चढ़ाएँ और आरती करें।
- 8पूजा के बाद, या अपने घर की रीत से शाम को, प्रसाद लेकर व्रत खोलें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह संकष्टी से कैसे अलग है?
यह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है, और पूजा दोपहर में। संकष्टी कृष्ण पक्ष में है, और उसका व्रत चंद्रोदय पर खुलता है।
क्या व्रत रखना ज़रूरी है?
नहीं। कई लोग सिर्फ़ पूजा करते हैं। व्रत आपकी इच्छा पर है।
गणेश को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं?
गणेश की हर पूजा में दूर्वा होती है; यह उन्हें प्रिय मानी जाती है।
मंगलवार को पड़े तो?
तब यह अंगारकी है, और ख़ास मानी जाती है। पूजा वही है।
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