व्रत · कार्तिक पूर्णिमा
पूर्णिमा 2026
हर महीने पूर्णिमा: पूरा चाँद, और कई घरों में सत्यनारायण की पूजा। और लगभग हर पूर्णिमा का अपना एक त्योहार होता है!
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संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामपूर्णमासी, पूनम
- कहाँपूरा भारत, हर महीने
- किसकी पूजासत्यनारायण (विष्णु), और चंद्र
- एक पंक्ति मेंशुक्ल पक्ष का आख़िरी दिन: चाँद पूरा, और महीने का एक शुभ दिन।
पूर्णिमा, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
पूर्णिमा यानी पूरा चाँद। चाँद सूरज के ठीक सामने होता है, इसलिए सूरज डूबते समय पूरब में पूरा चाँद उगता है, और अगली सुबह सूरज उगते समय डूबता है।
शुक्ल प्रतिपदा से बढ़ता चाँद आज पूरा होता है: पंद्रह दिन की यात्रा। उत्तर भारत में पूर्णिमांत पद्धति है, वहाँ महीना ही पूर्णिमा को पूरा होता है।
पूर्णता ही पूर्णिमा का संदेश है। महीने में एक बार रुकिए, और जो मिला उसके लिए धन्यवाद कहिए।
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सत्यनारायण की कथा
रत्नपुर में लक्षपति नाम का व्यापारी रहता था। उसकी कोई संतान नहीं थी। नदी किनारे कुछ लोगों को सत्यनारायण की पूजा करते देख उसने पूछा: क्या मेरी इच्छा पूरी होगी? उन्होंने कहा, हाँ। आगे उसके घर बेटी हुई, कलावती।
पर लक्षपति ने अपनी पूजा अधूरी छोड़ दी। राजा के मोती चुराने के झूठे आरोप में वह और उसका दामाद जेल गए। जब कलावती ने पूजा ठीक से पूरी की, तो राजा को सपने में कहा गया: उन्हें छोड़ दो।
लक्षपति के लौटते समय उससे मिलने की जल्दी में उसकी पत्नी लीलावती ने भी पूजा अधूरी छोड़ दी, और जहाज़ डूब गया। उसने सत्यनारायण से प्रार्थना की, और पूरे परिवार ने पूजा ठीक से पूरी की। सीख सीधी है: लिया हुआ व्रत अधूरा मत छोड़िए।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
कई घरों में पूर्णिमा को सत्यनारायण की पूजा होती है, हो सके तो शाम को प्रदोष काल में। प्रसाद में सवा के माप से रवा, घी, केला, दूध और चीनी का शीरा।
महाराष्ट्र में यह पूजा घर पर भी होती है और सार्वजनिक भी। शादी, नया घर, नई नौकरी जैसे मौक़ों पर भी सत्यनारायण कराते हैं, और श्रावण में कई परिवारों में यह पूजा करने की प्रथा है।
साल की लगभग हर पूर्णिमा का अपना त्योहार है: चैत्र में हनुमान जयंती, ज्येष्ठ में वट पूर्णिमा, आषाढ़ में गुरु पूर्णिमा, श्रावण में नारली पूर्णिमा, आश्विन में कोजागिरी, कार्तिक में त्रिपुरारी पूर्णिमा। हर एक की कथा उसके अपने पन्ने पर।
बंगाल और महाराष्ट्र में सत्यनारायण व्रत बहुत लोकप्रिय है। बिहार और उत्तर भारत में सत्यनारायण को विष्णु का ही रूप मानकर पूजते हैं।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: प्रदोष काल में पूजा: कलश, सत्यनारायण, शीरे का नैवेद्य, कथा और आरती।
- 1पूजा की जगह साफ़ करें और रंगोली बनाएँ।
- 2चौकी या पाटा रखें; मिलें तो आसपास केले के पत्ते लगाएँ।
- 3चावल या गेहूँ की ढेरी पर कलश रखें: उसमें दूर्वा, पाँच पत्ते, सुपारी और सिक्का, और ऊपर एक थाली।
- 4थाली पर सत्यनारायण की तस्वीर, शालिग्राम, बालकृष्ण की मूर्ति या नारियल रखें।
- 5पहले गणेश की पूजा करें, फिर सत्यनारायण की: फूल, तुलसी और पंचामृत।
- 6सवा के माप से बने शीरे का नैवेद्य चढ़ाएँ: सूजी और घी बराबर, केला, दूध और चीनी।
- 7सत्यनारायण की कथा पढ़ें या सुनें।
- 8आरती करें और सबको प्रसाद बाँटें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पूजा कब करें?
शाम को, प्रदोष काल में, सूर्यास्त के बाद लगभग दो घंटे के भीतर। सुबह भी कर सकते हैं।
क्या व्रत रखना ज़रूरी है?
नहीं, व्रत की कोई शर्त नहीं है। कई घरों में पूजा तक व्रत रखते हैं, और कुछ नहीं रखते।
यह पूजा कौन कर सकता है?
कोई भी। जाति या स्त्री-पुरुष का कोई भेद नहीं है।
क्या पूर्णिमा के अलावा भी सत्यनारायण कर सकते हैं?
हाँ। लोग इसे एकादशी को या किसी भी शुभ दिन, और शादी, नए घर या नई नौकरी पर भी करते हैं।
2026 की तारीखें
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2027 की तारीखें
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