व्रत · अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
कमला एकादशी 2026
अधिक मास की दोनों एकादशियाँ कमला एकादशी हैं: पुरुषोत्तम मास की एकादशी। दो-तीन साल में एक ही बार आने वाला व्रत!
अगली तारीख
समय लंदन के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामपद्मिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष), परमा एकादशी (कृष्ण पक्ष)
- कहाँपूरा भारत; केवल अधिक मास वाले वर्ष में
- किसकी पूजापुरुषोत्तम (विष्णु)
- एक पंक्ति मेंपुरुषोत्तम मास विष्णु को सबसे प्रिय है, और उसकी एकादशियाँ सब एकादशियों में श्रेष्ठ मानी जाती हैं।
कमला एकादशी, थोड़ा विस्तार से
- 01
पर्व के बारे में
चांद्र वर्ष और सौर वर्ष का मेल बिठाने के लिए लगभग हर बत्तीस महीने में एक अतिरिक्त महीना आता है: अधिक मास। उस महीने में सूर्य राशि नहीं बदलता।
इस महीने को पुरुषोत्तम मास कहते हैं, और महाराष्ट्र में इसकी दोनों एकादशियों का एक ही नाम है: कमला। उत्तर भारत में इन्हें पद्मिनी और परमा कहते हैं।
व्रत हमेशा जैसा, रात को जागरण, और पारण द्वादशी को। आज की सीख: जो अतिरिक्त समय मिला है, उसे व्यर्थ न जाने दें, अच्छे काम में लगाएँ।
- 02
सुमेधा और पवित्रा
कांपिल्य नगरी में सुमेधा नाम का एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण और उसकी पत्नी पवित्रा रहते थे। वे बहुत गरीब थे, फिर भी घर आए अतिथि को पवित्रा जो होता, परोस देती।
एक बार कौंडिन्य ऋषि उनके घर आए। दोनों ने सच्चे मन से उनका सत्कार किया। सुमेधा ने पूछा: यह गरीबी कैसे ख़त्म होगी? ऋषि ने कहा: अधिक मास की एकादशी का व्रत करो, वह पुरुषोत्तम को प्रिय है।
दोनों ने नियम से व्रत रखा। उसी रात एक राजकुमार उनके पास आया, और धन-धान्य से भरा घर उन्हें दे दिया। उनकी गरीबी ख़त्म हुई, और आगे वे वैकुंठ गए।
- 03
महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
महाराष्ट्र में अधिक मास को धोंड्याचा महिना या मलमास भी कहते हैं। इस महीने में विवाह, जनेऊ और नामकरण जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते।
इसके बजाय भागवत पाठ, सप्ताह, स्नान, जप और दान। विवाहित बेटी और दामाद को तीन-तीन अनरसे, तांबे का निरांजन और उपहार देने की रीत है।
बीड ज़िले के पुरुषोत्तमपुरी के पुरुषोत्तम मंदिर में हर अधिक मास में बड़ा मेला लगता है।
उत्तर भारत में ये दोनों एकादशियाँ पद्मिनी और परमा के नाम से जानी जाती हैं। पद्मिनी एकादशी की कथा रानी पद्मिनी की है: अनसूया के बताए इसी व्रत से उन्हें कार्तवीर्य अर्जुन जैसा पुत्र मिला।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: एक दिन पहले हल्का खाएँ, एकादशी को व्रत और नाम-स्मरण करें, और द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण करें।
- 1एक दिन पहले, दशमी को, हल्का भोजन करें।एक बार सादा भोजन काफ़ी है। रात को भारी कुछ न लें, ताकि एकादशी को पेट हल्का रहे।
- 2पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।कई घरों में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
- 3एकादशी की सुबह स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।मन में तय करें: निर्जला, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार।
- 4विष्णु या विट्ठल की पूजा करें।दीया, अगरबत्ती, चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएँ। फल या दूध का नैवेद्य चढ़ाएँ।
- 5जो व्रत चुना है, उसे दिन भर निभाएँ।चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा और दालें न खाएँ। फलाहार पहले भगवान को चढ़ाएँ, फिर खाएँ।
- 6दिन भगवान के नाम में बिताएँ।हरिपाठ, विष्णु सहस्रनाम, भजन, या इस पेज पर उस एकादशी की कथा।
- 7शाम को फिर दीया जलाकर आरती करें।कई लोग रात भर भजन करते हुए जागरण करते हैं। अगले दिन काम हो तो थोड़ी देर काफ़ी है।
- 8द्वादशी को सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।पंचांग में पारण का समय दिया हो तो उसी का पालन करें। पहले भगवान को नैवेद्य, फिर भोजन।
क्या चाहिए?टिक करते जाएँ
9 में से 0 तैयार
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
व्रत में क्या खा सकते हैं?
यह आपके व्रत पर निर्भर है: कुछ नहीं, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार। फलाहार में साबूदाना, समा के चावल, शकरकंद, आलू और मूँगफली चलते हैं। अनाज और दालें नहीं।
क्या पानी पी सकते हैं?
हाँ, अगर निर्जला व्रत नहीं है। सबसे कठिन व्रत में द्वादशी के सूर्योदय तक पानी भी नहीं होता, पर ज़्यादातर लोग हल्का व्रत रखते हैं।
व्रत कब खोलें?
द्वादशी को सूर्योदय के बाद, इसे पारण कहते हैं। अगर द्वादशी का पहला भाग, हरिवासर, सूर्योदय के बाद भी चल रहा हो, तो उसके ख़त्म होने तक रुकें। पंचांग में यह समय दिया होता है।
कभी-कभी एकादशी की दो तारीख़ें क्यों होती हैं?
जब कोई तिथि घटती या बढ़ती है, तो स्मार्त और भागवत (वारकरी) परंपराओं के नियम अलग हो जाते हैं, इसलिए दोनों की एकादशी अलग-अलग दिन पड़ सकती है। अपने घर की परंपरा का पालन करें।
किन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं?
बीमार, गर्भवती महिलाएँ और जिन्हें स्वास्थ्य की कोई समस्या है, उन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं, न छोटे बच्चों और बहुत बुज़ुर्गों को। वे दूध और फल लें और दिन प्रार्थना में बिताएँ। कोई बीमारी हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।
अगर ग़लती से व्रत टूट जाए तो?
चिंता न करें। भगवान से क्षमा माँगें, बाक़ी दिन नाम-स्मरण में बिताएँ, और अगली एकादशी ठीक से रखें।
2026 की तारीखें
इस साल 2 बार, लंदन के समय के अनुसार।
2026 की शहर के अनुसार तारीखें
इन शहरों में नीचे की तारीखें लंदन से अलग हैं; बाकी वही।
ऐप में याद लगाएँ
ऐप एक दिन पहले और उसी दिन सूचना भेजता है, बिना इंटरनेट भी।