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व्रत · श्रावण कृष्ण एकादशी

अजा एकादशी 2026

श्रावण कृष्ण एकादशी (उत्तर भारत में भाद्रपद कृष्ण) अजा एकादशी है: सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की एकादशी। कथा है कि सब कुछ खो चुके राजा को इसी व्रत से सब वापस मिला!

7सितसोमवार, 7 सितंबर 2026श्रावण कृष्ण एकादशी दोपहर 12:34 तक

अगली तारीख

तारीखसोमवार, 7 सितंबर 2026
हिंदू तिथिश्रावण कृष्ण एकादशी, दोपहर 12:34 तक

समय लंदन के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामअन्नदा एकादशी, भाद्रपद कृष्ण एकादशी (उत्तर भारत)
  • कहाँपूरा भारत; उत्तर भारत में भाद्रपद कृष्ण एकादशी के रूप में
  • किसकी पूजाहृषीकेश (विष्णु)
  • एक पंक्ति मेंसंकट में भी सत्य न छोड़ने वाले हरिश्चंद्र का दुख इसी एकादशी से ख़त्म हुआ।

अजा एकादशी, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    आज विष्णु की हृषीकेश रूप में पूजा होती है: इंद्रियों के स्वामी। मन और इंद्रियों को वश में रखने का दिन।

    व्रत हमेशा जैसा, रात को जागरण, और पारण द्वादशी को। मान्यता है कि इस एकादशी की कथा सुनने से भी पुण्य मिलता है।

    कथा की सीख: सत्य की राह कभी-कभी बहुत कठिन होती है। पर उसे न छोड़ें, तो दिन फिर बदलते हैं।

  2. 02

    राजा हरिश्चंद्र की कथा

    हरिश्चंद्र सत्य और ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध सम्राट थे। पर भाग्य से उनका राज्य चला गया, और उन्हें पत्नी चंद्रमती और पुत्र लोहिताश्व को भी बेचना पड़ा।

    वे स्वयं श्मशान के रखवाले बन गए। फिर भी उन्होंने सत्य नहीं छोड़ा। कई साल बीत गए, और एक दिन वे सोच में डूब गए: इससे छुटकारा कैसे मिले?

    तभी गौतम ऋषि वहाँ से गुज़र रहे थे। उन्होंने कहा: सात दिन बाद अजा एकादशी है, व्रत रखो और रात भर जागो। हरिश्चंद्र ने वैसा ही किया, और उनके पाप मिट गए। पत्नी और पुत्र वापस मिले, और राज्य भी।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    महाराष्ट्र में श्रावण व्रतों से भरा होता है, और अजा एकादशी गोकुलाष्टमी के कुछ दिन बाद आती है। घर पर व्रत और विठ्ठल की पूजा।

    हरिश्चंद्र की कथा महाराष्ट्र के दिल के क़रीब है: दादासाहेब फाळके ने इसी कथा पर राजा हरिश्चंद्र (1913) फ़िल्म बनाई, जिसे भारत की पहली पूरी लंबाई की फ़ीचर फ़िल्म माना जाता है।

    उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा को पूरा होता है, इसलिए वहाँ यही भाद्रपद कृष्ण एकादशी है। नाम, कथा और व्रत वही।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: एक दिन पहले हल्का खाएँ, एकादशी को व्रत और नाम-स्मरण करें, और द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण करें।

  1. 1एक दिन पहले, दशमी को, हल्का भोजन करें।एक बार सादा भोजन काफ़ी है। रात को भारी कुछ न लें, ताकि एकादशी को पेट हल्का रहे।
  2. 2पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।कई घरों में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
  3. 3एकादशी की सुबह स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।मन में तय करें: निर्जला, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार।
  4. 4विष्णु या विट्ठल की पूजा करें।दीया, अगरबत्ती, चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएँ। फल या दूध का नैवेद्य चढ़ाएँ।
  5. 5जो व्रत चुना है, उसे दिन भर निभाएँ।चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा और दालें न खाएँ। फलाहार पहले भगवान को चढ़ाएँ, फिर खाएँ।
  6. 6दिन भगवान के नाम में बिताएँ।हरिपाठ, विष्णु सहस्रनाम, भजन, या इस पेज पर उस एकादशी की कथा।
  7. 7शाम को फिर दीया जलाकर आरती करें।कई लोग रात भर भजन करते हुए जागरण करते हैं। अगले दिन काम हो तो थोड़ी देर काफ़ी है।
  8. 8द्वादशी को सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।पंचांग में पारण का समय दिया हो तो उसी का पालन करें। पहले भगवान को नैवेद्य, फिर भोजन।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्रत में क्या खा सकते हैं?

यह आपके व्रत पर निर्भर है: कुछ नहीं, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार। फलाहार में साबूदाना, समा के चावल, शकरकंद, आलू और मूँगफली चलते हैं। अनाज और दालें नहीं।

क्या पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर निर्जला व्रत नहीं है। सबसे कठिन व्रत में द्वादशी के सूर्योदय तक पानी भी नहीं होता, पर ज़्यादातर लोग हल्का व्रत रखते हैं।

व्रत कब खोलें?

द्वादशी को सूर्योदय के बाद, इसे पारण कहते हैं। अगर द्वादशी का पहला भाग, हरिवासर, सूर्योदय के बाद भी चल रहा हो, तो उसके ख़त्म होने तक रुकें। पंचांग में यह समय दिया होता है।

कभी-कभी एकादशी की दो तारीख़ें क्यों होती हैं?

जब कोई तिथि घटती या बढ़ती है, तो स्मार्त और भागवत (वारकरी) परंपराओं के नियम अलग हो जाते हैं, इसलिए दोनों की एकादशी अलग-अलग दिन पड़ सकती है। अपने घर की परंपरा का पालन करें।

किन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं?

बीमार, गर्भवती महिलाएँ और जिन्हें स्वास्थ्य की कोई समस्या है, उन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं, न छोटे बच्चों और बहुत बुज़ुर्गों को। वे दूध और फल लें और दिन प्रार्थना में बिताएँ। कोई बीमारी हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।

अगर ग़लती से व्रत टूट जाए तो?

चिंता न करें। भगवान से क्षमा माँगें, बाक़ी दिन नाम-स्मरण में बिताएँ, और अगली एकादशी ठीक से रखें।

2026 की तारीखें

इस साल 1 बार, लंदन के समय के अनुसार।

7सितअजा एकादशीसोमवार · श्रावण कृष्ण एकादशी · दोपहर 12:34 तक

2026 की शहर के अनुसार तारीखें

इन शहरों में नीचे की तारीखें लंदन से अलग हैं; बाकी वही।

न्यू जर्सी6 सित

2027 की तारीखें

2027 में 2 बार, लंदन के समय के अनुसार।

27अगअजा एकादशी (स्मार्त)शुक्रवार · श्रावण कृष्ण दशमी
28अगअजा एकादशी (वैष्णव)शनिवार · श्रावण कृष्ण एकादशी · सुबह 8:12 तक

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