व्रत · चैत्र शुक्ल एकादशी
कामदा एकादशी 2026
चैत्र शुक्ल एकादशी कामदा एकादशी है: नए साल की पहली एकादशी। कामदा यानी मनोकामना पूरी करने वाली!
अगली तारीख
समय इंदौर के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामचैत्र शुक्ल एकादशी
- कहाँपूरा भारत
- किसकी पूजाविष्णु (कृष्ण रूप में); महाराष्ट्र में विठ्ठल
- एक पंक्ति मेंनए साल का पहला व्रत: शाप से राक्षस बने पति को पत्नी ने इस व्रत से मुक्त किया।
कामदा एकादशी, थोड़ा विस्तार से
- 01
पर्व के बारे में
गुढी पाडवा से नया साल शुरू हुआ, रामनवमी आई, और उसके ठीक बाद यह कामदा एकादशी। नए साल का पहला व्रत।
व्रत हमेशा जैसा, और पारण द्वादशी को। कामदा यानी काम, इच्छा, देने वाली: मन से की गई प्रार्थना पूरी होती है, ऐसी मान्यता है।
कथा की सीख: प्रेम सिर्फ़ साथ रहना नहीं, मुश्किल में हाथ न छोड़ना है। पत्नी ने पति के लिए यह व्रत रखा, और दोनों का जीवन बदल गया।
- 02
ललित और ललिता
रत्नपुर नगरी में राजा पुंडरीक के दरबार में ललित नाम का गंधर्व गाता था, और उसकी पत्नी ललिता नृत्य करती थी। एक दिन ललिता दरबार में नहीं थी। गाते हुए ललित का मन उसकी ओर चला गया, और उसका ताल चूक गया।
कर्कोटक नाग ने राजा से कहा: इसे राजा से ज़्यादा अपनी पत्नी प्यारी है। ग़ुस्से में पुंडरीक ने ललित को भयानक नरभक्षी राक्षस बनने का शाप दे दिया। दुखी ललिता उसके पीछे जंगल-जंगल भटकने लगी।
विंध्य पर्वत के पास उसे शृंगी ऋषि मिले। उन्होंने कहा: चैत्र की कामदा एकादशी करो, पति के पापों का प्रायश्चित्त होगा। ललिता ने मन से व्रत रखा, और पति की मुक्ति के लिए प्रार्थना की। ललित शाप से छूटा, फिर गंधर्व बना, और दोनों दिव्य रथ से स्वर्ग गए।
- 03
महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
वारकरी हमेशा की तरह व्रत, हरिपाठ और विठ्ठल के भजन करते हैं। पंढरपुर में चैत्री एकादशी की यात्रा भरती है।
घर पर सुबह स्नान, कृष्ण रूप में विष्णु की पूजा, और पास के मंदिर में दर्शन।
नए साल की शुरुआत की यह एकादशी है, इसलिए कई लोग साल भर का संकल्प आज ही लेते हैं।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: एक दिन पहले हल्का खाएँ, एकादशी को व्रत और नाम-स्मरण करें, और द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण करें।
- 1एक दिन पहले, दशमी को, हल्का भोजन करें।एक बार सादा भोजन काफ़ी है। रात को भारी कुछ न लें, ताकि एकादशी को पेट हल्का रहे।
- 2पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।कई घरों में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
- 3एकादशी की सुबह स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।मन में तय करें: निर्जला, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार।
- 4विष्णु या विट्ठल की पूजा करें।दीया, अगरबत्ती, चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएँ। फल या दूध का नैवेद्य चढ़ाएँ।
- 5जो व्रत चुना है, उसे दिन भर निभाएँ।चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा और दालें न खाएँ। फलाहार पहले भगवान को चढ़ाएँ, फिर खाएँ।
- 6दिन भगवान के नाम में बिताएँ।हरिपाठ, विष्णु सहस्रनाम, भजन, या इस पेज पर उस एकादशी की कथा।
- 7शाम को फिर दीया जलाकर आरती करें।कई लोग रात भर भजन करते हुए जागरण करते हैं। अगले दिन काम हो तो थोड़ी देर काफ़ी है।
- 8द्वादशी को सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।पंचांग में पारण का समय दिया हो तो उसी का पालन करें। पहले भगवान को नैवेद्य, फिर भोजन।
क्या चाहिए?टिक करते जाएँ
9 में से 0 तैयार
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
व्रत में क्या खा सकते हैं?
यह आपके व्रत पर निर्भर है: कुछ नहीं, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार। फलाहार में साबूदाना, समा के चावल, शकरकंद, आलू और मूँगफली चलते हैं। अनाज और दालें नहीं।
क्या पानी पी सकते हैं?
हाँ, अगर निर्जला व्रत नहीं है। सबसे कठिन व्रत में द्वादशी के सूर्योदय तक पानी भी नहीं होता, पर ज़्यादातर लोग हल्का व्रत रखते हैं।
व्रत कब खोलें?
द्वादशी को सूर्योदय के बाद, इसे पारण कहते हैं। अगर द्वादशी का पहला भाग, हरिवासर, सूर्योदय के बाद भी चल रहा हो, तो उसके ख़त्म होने तक रुकें। पंचांग में यह समय दिया होता है।
कभी-कभी एकादशी की दो तारीख़ें क्यों होती हैं?
जब कोई तिथि घटती या बढ़ती है, तो स्मार्त और भागवत (वारकरी) परंपराओं के नियम अलग हो जाते हैं, इसलिए दोनों की एकादशी अलग-अलग दिन पड़ सकती है। अपने घर की परंपरा का पालन करें।
किन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं?
बीमार, गर्भवती महिलाएँ और जिन्हें स्वास्थ्य की कोई समस्या है, उन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं, न छोटे बच्चों और बहुत बुज़ुर्गों को। वे दूध और फल लें और दिन प्रार्थना में बिताएँ। कोई बीमारी हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।
अगर ग़लती से व्रत टूट जाए तो?
चिंता न करें। भगवान से क्षमा माँगें, बाक़ी दिन नाम-स्मरण में बिताएँ, और अगली एकादशी ठीक से रखें।
2026 की तारीखें
इस साल 1 बार, इंदौर के समय के अनुसार।
2026 की शहर के अनुसार तारीखें
इन शहरों में नीचे की तारीखें इंदौर से अलग हैं; बाकी वही।
2027 की तारीखें
2027 में 1 बार, इंदौर के समय के अनुसार।
ऐप में याद लगाएँ
ऐप एक दिन पहले और उसी दिन सूचना भेजता है, बिना इंटरनेट भी।