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व्रत · फाल्गुन शुक्ल एकादशी

आमलकी एकादशी 2026

फाल्गुन शुक्ल एकादशी आमलकी एकादशी है: आज आँवले के पेड़ की पूजा। और चार ही दिन बाद होली!

27फ़रशुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026फाल्गुन शुक्ल एकादशी रात 10:33 तक

अगली तारीख

तारीखशुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026
हिंदू तिथिफाल्गुन शुक्ल एकादशी, रात 10:33 तक

समय इंदौर के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामआमलक एकादशी, रंगभरी एकादशी (काशी)
  • कहाँपूरा भारत; काशी में रंगभरी एकादशी
  • किसकी पूजाविष्णु, और आँवले का पेड़
  • एक पंक्ति मेंआँवले के पेड़ में विष्णु का वास माना जाता है। आज पेड़ को जल देकर उसकी पूजा होती है।

आमलकी एकादशी, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    आमलक यानी आँवला। यह दिन एक पेड़ का है: आँवले में विष्णु का वास माना जाता है, और कुछ परंपराओं में लक्ष्मी का भी।

    सुबह स्नान, आँवले के पेड़ को जल, पूजा, और व्रत। पारण हमेशा की तरह द्वादशी को। आँवले का पेड़ पास न हो, तो तुलसी की पूजा करें, यह कथा ही कहती है।

    इसमें सीख सीधी है: जो पेड़ हमें सेहत देता है, उसका आभार मानें। आयुर्वेद में आँवले और त्रिफला का महत्व तो हम जानते ही हैं।

  2. 02

    शिकारी और राजा वसुरथ

    वैदिश राज्य में राजा चित्ररथ और सारी प्रजा एकादशी रखती थी। फाल्गुन में सब नदी में स्नान करके विष्णु के मंदिर जाते, जहाँ आँवले का पेड़ था। पेड़ की और परशुराम की पूजा, और रात भर दीये, भजन और जागरण।

    उसी रात एक थका, भूखा शिकारी वहाँ छिपकर बैठ गया। पूजा और हरिकथा सुनते-सुनते उसकी रात जागते हुए बीत गई। सुबह उसने घर जाकर खाना खाया। अनजाने में हुए उस व्रत और जागरण से अगले जन्म में वह जयंती नगरी का राजा वसुरथ बना।

    एक बार शिकार में रास्ता भटके वसुरथ एक पेड़ के नीचे सो गए। उन पर शत्रुओं ने हमला किया, पर उनके शस्त्र उन्हें छू न सके। तभी उनकी देह से एक तेजस्वी देवी प्रकट हुईं और सब शत्रुओं का अंत कर दिया। आकाशवाणी हुई: जो निःस्वार्थ भाव से शरण आता है, केशव उसकी रक्षा करते हैं।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    वारकरी हमेशा की तरह व्रत, हरिपाठ और विठ्ठल के भजन करते हैं। जहाँ आँवले का पेड़ है, वहाँ सुबह उसे जल और पूजा।

    इस एकादशी के बाद होली की असली तैयारी शुरू होती है। चार दिन बाद फाल्गुन पूर्णिमा को होली जलती है।

    काशी में यही रंगभरी एकादशी है: मान्यता है कि शिव पार्वती का गौना कराकर काशी लौटते हैं। काशी विश्वनाथ की पालकी पर गुलाल उड़ता है, और वहाँ की होली आज से शुरू होती है।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: एक दिन पहले हल्का खाएँ, एकादशी को व्रत और नाम-स्मरण करें, और द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण करें।

  1. 1एक दिन पहले, दशमी को, हल्का भोजन करें।एक बार सादा भोजन काफ़ी है। रात को भारी कुछ न लें, ताकि एकादशी को पेट हल्का रहे।
  2. 2पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।कई घरों में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
  3. 3एकादशी की सुबह स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।मन में तय करें: निर्जला, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार।
  4. 4विष्णु या विट्ठल की पूजा करें।दीया, अगरबत्ती, चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएँ। फल या दूध का नैवेद्य चढ़ाएँ।
  5. 5जो व्रत चुना है, उसे दिन भर निभाएँ।चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा और दालें न खाएँ। फलाहार पहले भगवान को चढ़ाएँ, फिर खाएँ।
  6. 6दिन भगवान के नाम में बिताएँ।हरिपाठ, विष्णु सहस्रनाम, भजन, या इस पेज पर उस एकादशी की कथा।
  7. 7शाम को फिर दीया जलाकर आरती करें।कई लोग रात भर भजन करते हुए जागरण करते हैं। अगले दिन काम हो तो थोड़ी देर काफ़ी है।
  8. 8द्वादशी को सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।पंचांग में पारण का समय दिया हो तो उसी का पालन करें। पहले भगवान को नैवेद्य, फिर भोजन।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आँवले के पेड़ की पूजा कैसे करते हैं?

सुबह स्नान करके आँवले के पेड़ को पानी दें, उसकी पूजा करें, और व्रत रखें। आज अन्नदान और दान बताया गया है। पास में पेड़ न हो तो विष्णु की पूजा ही काफ़ी है।

व्रत में क्या खा सकते हैं?

यह आपके व्रत पर निर्भर है: कुछ नहीं, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार। फलाहार में साबूदाना, समा के चावल, शकरकंद, आलू और मूँगफली चलते हैं। अनाज और दालें नहीं।

क्या पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर निर्जला व्रत नहीं है। सबसे कठिन व्रत में द्वादशी के सूर्योदय तक पानी भी नहीं होता, पर ज़्यादातर लोग हल्का व्रत रखते हैं।

व्रत कब खोलें?

द्वादशी को सूर्योदय के बाद, इसे पारण कहते हैं। अगर द्वादशी का पहला भाग, हरिवासर, सूर्योदय के बाद भी चल रहा हो, तो उसके ख़त्म होने तक रुकें। पंचांग में यह समय दिया होता है।

कभी-कभी एकादशी की दो तारीख़ें क्यों होती हैं?

जब कोई तिथि घटती या बढ़ती है, तो स्मार्त और भागवत (वारकरी) परंपराओं के नियम अलग हो जाते हैं, इसलिए दोनों की एकादशी अलग-अलग दिन पड़ सकती है। अपने घर की परंपरा का पालन करें।

किन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं?

बीमार, गर्भवती महिलाएँ और जिन्हें स्वास्थ्य की कोई समस्या है, उन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं, न छोटे बच्चों और बहुत बुज़ुर्गों को। वे दूध और फल लें और दिन प्रार्थना में बिताएँ। कोई बीमारी हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।

अगर ग़लती से व्रत टूट जाए तो?

चिंता न करें। भगवान से क्षमा माँगें, बाक़ी दिन नाम-स्मरण में बिताएँ, और अगली एकादशी ठीक से रखें।

2026 की तारीखें

इस साल 1 बार, इंदौर के समय के अनुसार।

27फ़रआमलकी एकादशीशुक्रवार · फाल्गुन शुक्ल एकादशी · रात 10:33 तक

2026 की शहर के अनुसार तारीखें

सभी तारीखें सभी शहरों में एक ही हैं।

2027 की तारीखें

2027 में 1 बार, इंदौर के समय के अनुसार।

18मार्चआमलकी एकादशीगुरुवार · फाल्गुन शुक्ल एकादशी · रात 1:51 तक

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