व्रत · कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
संकष्टी चतुर्थी 2026
हर महीने की कृष्ण चतुर्थी को संकष्टी: दिन भर उपवास, और चंद्रोदय के बाद गणेश पूजा करके उसे खोलना। मंगलवार को पड़े तो अंगारकी!
अगली तारीख
समय दुबई के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामसंकटहर चतुर्थी, अंगारकी (मंगलवार को), सकट चौथ (माघ, उत्तर भारत)
- कहाँपूरा भारत, हर महीने
- किसकी पूजागणेश, और चंद्र
- एक पंक्ति मेंसंकट दूर करने वाले गणेश: महीने में एक बार उनकी याद, और चंद्र दर्शन से व्रत का समापन।
संकष्टी चतुर्थी, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
संकष्टी यानी संकटों से मुक्ति। हर पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को गणेश से एक ही माँग: संकट दूर करो।
उपवास दिन भर का है, पर खुलता है चाँद दिखने पर ही। चंद्रोदय के बाद गणेश और चंद्र को नैवेद्य चढ़ाते हैं, और तभी भोजन करते हैं। इसलिए संकष्टी को सबकी नज़र आसमान पर!
साल में बारह संकष्टी, और अधिक मास हो तो तेरह। हर महीने गणेश का नाम और पीठ अलग, पर सीख एक ही: संकट आए तो भी धीरज मत छोड़िए, और चाँद उगने तक राह देखिए।
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अंगारक का वरदान
पृथ्वी के पुत्र अंगारक एक सिद्ध ऋषि थे, और गणेश के बड़े भक्त। अंगारक यानी अंगारे जैसा लाल: वही मंगल ग्रह हैं।
उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश ने कहा: वर माँगो। अंगारक ने एक ही चीज़ माँगी: मेरा नाम आपके नाम से हमेशा के लिए जुड़ जाए।
गणेश ने वह वर दिया। इसीलिए मंगलवार को, मंगल के दिन, पड़ने वाली संकष्टी अंगारकी कहलाती है, और ख़ास मानी जाती है।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
दिन भर उपवास। शाम को गणेश पूजा, दूर्वा, और मोदक का नैवेद्य। चंद्रोदय से पहले गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ होता है।
चाँद उगने पर उसके दर्शन करके नमस्कार करते हैं, और फिर उपवास खोलते हैं।
अंगारकी को अष्टविनायक और बड़े गणेश मंदिरों में दर्शन के लिए कतारें लगती हैं।
उत्तर और मध्य भारत में माघ की संकष्टी सकट चौथ के रूप में मनाई जाती है: तिल-गुड़ का भुग्गा और मूली दान करके व्रत पूरा करते हैं।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: दिन भर व्रत, शाम को गणेश पूजा, चाँद दिखे तो नैवेद्य, और फिर भोजन।
- 1सुबह स्नान करें और चंद्रोदय तक व्रत का संकल्प लें।
- 2दिन भर व्रत रखें। कई घरों में फल, दूध, साबूदाना या समा के चावल चलते हैं; कुछ लोग सिर्फ़ पानी लेते हैं।
- 3शाम को साफ़ चौकी पर गणेश की प्रतिमा या मूर्ति रखें और दीया जलाएँ।
- 4दूर्वा, लाल फूल, हल्दी-कुमकुम और अक्षत चढ़ाएँ।
- 5चाँद निकलने से पहले गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें, या गणेश का नाम लें।
- 6चाँद निकले तो उसके दर्शन करें, प्रणाम करें और जल का अर्घ्य दें।
- 7गणेश और चंद्रमा को मोदक का नैवेद्य चढ़ाएँ, और आरती करें।
- 8प्रसाद लेकर व्रत खोलें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
व्रत कब खोलें?
चाँद निकलने और उसके दर्शन के बाद ही। आपके शहर का चंद्रोदय का समय ऊपर दिया गया है। बादलों की वजह से चाँद न दिखे, तो कई लोग चंद्रोदय के समय पर व्रत खोल लेते हैं।
व्रत में क्या खा सकते हैं?
कई घरों में फल, दूध और साबूदाना खिचड़ी, समा के चावल जैसा व्रत का खाना चलता है; अनाज का भोजन नहीं। कुछ लोग सिर्फ़ पानी लेते हैं। अपने घर की रीत अपनाएँ।
अंगारकी क्या है?
मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी। इसे सबसे शुभ माना जाता है।
बीमारी, गर्भावस्था या बुढ़ापे में व्रत रखें?
सेहत पहले। हल्का व्रत रखें, या सिर्फ़ शाम की पूजा और चंद्र दर्शन करें। शंका हो तो डॉक्टर की सलाह लें।
2026 की तारीखें
इस साल 13 बार, दुबई के समय के अनुसार।
2026 की शहर के अनुसार तारीखें
इन शहरों में नीचे की तारीखें दुबई से अलग हैं; बाकी वही।
2027 की तारीखें
2027 में 12 बार, दुबई के समय के अनुसार।
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