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व्रत · भाद्रपद कृष्ण एकादशी

इंदिरा एकादशी 2026

भाद्रपद कृष्ण एकादशी (उत्तर भारत में आश्विन कृष्ण) इंदिरा एकादशी है: पितृ पक्ष की एकादशी। पितरों के लिए रखा जाने वाला व्रत!

6अक्तूमंगलवार, 6 अक्तूबर 2026भाद्रपद कृष्ण एकादशी रात 12:35 तक

अगली तारीख

तारीखमंगलवार, 6 अक्तूबर 2026
हिंदू तिथिभाद्रपद कृष्ण एकादशी, रात 12:35 तक

समय दिल्ली के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामआश्विन कृष्ण एकादशी (उत्तर भारत)
  • कहाँपूरा भारत; उत्तर भारत में आश्विन कृष्ण एकादशी के रूप में
  • किसकी पूजाशालिग्राम और हृषीकेश (विष्णु)
  • एक पंक्ति मेंबेटे की रखी इस एकादशी से पिता को यमलोक से मुक्ति मिली।

इंदिरा एकादशी, थोड़ा विस्तार से

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    पर्व के बारे में

    महाराष्ट्र में भाद्रपद का कृष्ण पक्ष ही पितृ पक्ष है: सर्वपितृ अमावस्या तक पितरों का स्मरण। इंदिरा एकादशी इसी पखवाड़े में आती है।

    इसलिए इस एकादशी में पितरों का भी स्थान है: दोपहर को पितरों के लिए तर्पण, और शालिग्राम की पूजा। व्रत हमेशा जैसा, रात को जागरण, और पारण द्वादशी को।

    आज की सीख: हम जो हैं, पिछली पीढ़ियों की वजह से हैं। उनके लिए एक दिन देना ही कृतज्ञता है।

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    राजा इंद्रसेन की कथा

    सत्ययुग में माहिष्मती नगरी में राजा इंद्रसेन राज करते थे: प्रजा के रक्षक और विष्णु के भक्त। एक दिन उनकी सभा में नारद मुनि आए।

    नारद ने कहा: यमलोक में मैंने तुम्हारे पिता को देखा। वे धर्म से जिए, पर एक बार उन्होंने एकादशी का व्रत समय से पहले तोड़ दिया, इसलिए वे वहाँ हैं। उनका संदेश है: बेटा, आने वाली इंदिरा एकादशी का व्रत करो और दान दो, ताकि मैं ऊपर जा सकूँ।

    नारद के बताए अनुसार इंद्रसेन ने परिवार के साथ व्रत किया: दशमी को एक बार भोजन, एकादशी को व्रत, तर्पण और जागरण, और द्वादशी को पारण। आकाश से फूल बरसे, और इंद्रसेन ने पिता को गरुड़ पर बैठकर वैकुंठ की ओर जाते देखा।

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    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    पितृ पक्ष में घर-घर पितरों का श्राद्ध होता है: पिंडदान, और कौए के लिए ग्रास। मान्यता है कि कौआ ग्रास ले ले, तो वह पितरों तक पहुँच गया।

    कथा में गाय को भी पितरों का पिंड दिया जाता है। घर पर व्रत, शालिग्राम या विठ्ठल की पूजा, और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान।

    उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा को पूरा होता है, इसलिए वहाँ पितृ पक्ष आश्विन में आता है, और यह आश्विन कृष्ण एकादशी है। नाम, कथा और व्रत वही।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: एक दिन पहले हल्का खाएँ, एकादशी को व्रत और नाम-स्मरण करें, और द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण करें।

  1. 1एक दिन पहले, दशमी को, हल्का भोजन करें।एक बार सादा भोजन काफ़ी है। रात को भारी कुछ न लें, ताकि एकादशी को पेट हल्का रहे।
  2. 2पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।कई घरों में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
  3. 3एकादशी की सुबह स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।मन में तय करें: निर्जला, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार।
  4. 4विष्णु या विट्ठल की पूजा करें।दीया, अगरबत्ती, चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएँ। फल या दूध का नैवेद्य चढ़ाएँ।
  5. 5जो व्रत चुना है, उसे दिन भर निभाएँ।चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा और दालें न खाएँ। फलाहार पहले भगवान को चढ़ाएँ, फिर खाएँ।
  6. 6दिन भगवान के नाम में बिताएँ।हरिपाठ, विष्णु सहस्रनाम, भजन, या इस पेज पर उस एकादशी की कथा।
  7. 7शाम को फिर दीया जलाकर आरती करें।कई लोग रात भर भजन करते हुए जागरण करते हैं। अगले दिन काम हो तो थोड़ी देर काफ़ी है।
  8. 8द्वादशी को सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।पंचांग में पारण का समय दिया हो तो उसी का पालन करें। पहले भगवान को नैवेद्य, फिर भोजन।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पितृपक्ष की इस एकादशी पर अलग क्या करते हैं?

यह व्रत पितरों के लिए रखा जाता है। दोपहर में पितरों को तर्पण करें, जितना हो सके दान करें, और व्रत का पुण्य उन्हें अर्पित करें।

व्रत में क्या खा सकते हैं?

यह आपके व्रत पर निर्भर है: कुछ नहीं, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार। फलाहार में साबूदाना, समा के चावल, शकरकंद, आलू और मूँगफली चलते हैं। अनाज और दालें नहीं।

क्या पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर निर्जला व्रत नहीं है। सबसे कठिन व्रत में द्वादशी के सूर्योदय तक पानी भी नहीं होता, पर ज़्यादातर लोग हल्का व्रत रखते हैं।

व्रत कब खोलें?

द्वादशी को सूर्योदय के बाद, इसे पारण कहते हैं। अगर द्वादशी का पहला भाग, हरिवासर, सूर्योदय के बाद भी चल रहा हो, तो उसके ख़त्म होने तक रुकें। पंचांग में यह समय दिया होता है।

कभी-कभी एकादशी की दो तारीख़ें क्यों होती हैं?

जब कोई तिथि घटती या बढ़ती है, तो स्मार्त और भागवत (वारकरी) परंपराओं के नियम अलग हो जाते हैं, इसलिए दोनों की एकादशी अलग-अलग दिन पड़ सकती है। अपने घर की परंपरा का पालन करें।

किन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं?

बीमार, गर्भवती महिलाएँ और जिन्हें स्वास्थ्य की कोई समस्या है, उन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं, न छोटे बच्चों और बहुत बुज़ुर्गों को। वे दूध और फल लें और दिन प्रार्थना में बिताएँ। कोई बीमारी हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।

अगर ग़लती से व्रत टूट जाए तो?

चिंता न करें। भगवान से क्षमा माँगें, बाक़ी दिन नाम-स्मरण में बिताएँ, और अगली एकादशी ठीक से रखें।

2026 की तारीखें

इस साल 1 बार, दिल्ली के समय के अनुसार।

6अक्तूइंदिरा एकादशीमंगलवार · भाद्रपद कृष्ण एकादशी · रात 12:35 तक

2026 की शहर के अनुसार तारीखें

सभी तारीखें सभी शहरों में एक ही हैं।

2027 की तारीखें

2027 में 1 बार, दिल्ली के समय के अनुसार।

26सितइंदिरा एकादशीरविवार · भाद्रपद कृष्ण एकादशी · रात 7:49 तक

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