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व्रत · श्रावण शुक्ल एकादशी

पुत्रदा एकादशी 2026

श्रावण शुक्ल एकादशी श्रावण की पुत्रदा एकादशी है। प्यासी गाय को भगाने का फल एक राजा को भुगतना पड़ा, और इस व्रत से वह मिट गया!

23अगरविवार, 23 अगस्त 2026श्रावण शुक्ल एकादशी भोर 4:19 तक

अगली तारीख

तारीखरविवार, 23 अगस्त 2026
हिंदू तिथिश्रावण शुक्ल एकादशी, भोर 4:19 तक

समय बेंगलुरु के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामपवित्रा एकादशी, पवित्रोपना एकादशी
  • कहाँपूरा भारत; उत्तर भारत के बाहर के राज्यों में ज़्यादा प्रचलित
  • किसकी पूजाविष्णु
  • एक पंक्ति मेंबेज़ुबान जीव को दुख देने का फल, और उससे मुक्ति देने वाला व्रत: संतान की आशा के लिए।

पुत्रदा एकादशी, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    पुत्र शब्द का एक पुराना अर्थ यूँ बताया जाता है: "पु" नाम के नरक से जो तारता ("त्र") है, वह। पुत्रदा यानी ऐसा पुत्र देने वाली।

    आज विष्णु की पूजा, व्रत और रात को जागरण। पारण द्वादशी को, और उस दिन दान का महत्त्व है।

    कथा की सीख सीधी है: प्यासे को पहले पानी। अपनी ज़रूरत कितनी भी बड़ी हो, दूसरे के मुँह का पानी मत छीनिए।

  2. 02

    राजा महीजित की कथा

    माहिष्मती नगरी के राजा महीजित की कोई संतान नहीं थी, और इसलिए उन्हें पूरा राज्य ही सूना लगता था। मंत्रियों ने लोमश ऋषि से इसका कारण पूछा।

    ऋषि ने कहा: पिछले जन्म में राजा एक व्यापारी थे। ज्येष्ठ की एक एकादशी के अगले दिन, सफ़र में प्यासे, वे एक तालाब पर पहुँचे। वहाँ एक गाय अपने बछड़े के साथ पानी पीने आई थी। उन्होंने उसे धकेलकर हटा दिया, और ख़ुद पानी पी लिया। उसी पाप से आज उनकी संतान नहीं है।

    ऋषि ने उपाय बताया: श्रावण शुक्ल एकादशी का व्रत कीजिए। राजा, रानी और पूरी प्रजा ने व्रत और जागरण किया, और द्वादशी को प्रजा ने अपना पुण्य राजा को अर्पित किया। आगे चलकर रानी को सुंदर पुत्र हुआ।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    महाराष्ट्र में यह एकादशी हमेशा की तरह रखी जाती है: व्रत, विठ्ठल के दर्शन और भजन। श्रावण चल रहा होता है, इसलिए घर-घर वैसे भी व्रतों का महीना है।

    चार दिन बाद श्रावण पूर्णिमा आती है: किनारे पर नारली पूर्णिमा, और घर-घर रक्षाबंधन।

    वैष्णव मंदिरों में आज से पूर्णिमा तक पाँच दिन झूलन यात्रा होती है: फूलों और बेलों से सजे झूले पर राधा-कृष्ण की मूर्तियाँ।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: एक दिन पहले हल्का खाएँ, एकादशी को व्रत और नाम-स्मरण करें, और द्वादशी को सूर्योदय के बाद पारण करें।

  1. 1एक दिन पहले, दशमी को, हल्का भोजन करें।एक बार सादा भोजन काफ़ी है। रात को भारी कुछ न लें, ताकि एकादशी को पेट हल्का रहे।
  2. 2पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।कई घरों में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती।
  3. 3एकादशी की सुबह स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।मन में तय करें: निर्जला, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार।
  4. 4विष्णु या विट्ठल की पूजा करें।दीया, अगरबत्ती, चंदन, फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएँ। फल या दूध का नैवेद्य चढ़ाएँ।
  5. 5जो व्रत चुना है, उसे दिन भर निभाएँ।चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा और दालें न खाएँ। फलाहार पहले भगवान को चढ़ाएँ, फिर खाएँ।
  6. 6दिन भगवान के नाम में बिताएँ।हरिपाठ, विष्णु सहस्रनाम, भजन, या इस पेज पर उस एकादशी की कथा।
  7. 7शाम को फिर दीया जलाकर आरती करें।कई लोग रात भर भजन करते हुए जागरण करते हैं। अगले दिन काम हो तो थोड़ी देर काफ़ी है।
  8. 8द्वादशी को सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।पंचांग में पारण का समय दिया हो तो उसी का पालन करें। पहले भगवान को नैवेद्य, फिर भोजन।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्रत में क्या खा सकते हैं?

यह आपके व्रत पर निर्भर है: कुछ नहीं, सिर्फ़ पानी, फल और दूध, या एक बार फलाहार। फलाहार में साबूदाना, समा के चावल, शकरकंद, आलू और मूँगफली चलते हैं। अनाज और दालें नहीं।

क्या पानी पी सकते हैं?

हाँ, अगर निर्जला व्रत नहीं है। सबसे कठिन व्रत में द्वादशी के सूर्योदय तक पानी भी नहीं होता, पर ज़्यादातर लोग हल्का व्रत रखते हैं।

व्रत कब खोलें?

द्वादशी को सूर्योदय के बाद, इसे पारण कहते हैं। अगर द्वादशी का पहला भाग, हरिवासर, सूर्योदय के बाद भी चल रहा हो, तो उसके ख़त्म होने तक रुकें। पंचांग में यह समय दिया होता है।

कभी-कभी एकादशी की दो तारीख़ें क्यों होती हैं?

जब कोई तिथि घटती या बढ़ती है, तो स्मार्त और भागवत (वारकरी) परंपराओं के नियम अलग हो जाते हैं, इसलिए दोनों की एकादशी अलग-अलग दिन पड़ सकती है। अपने घर की परंपरा का पालन करें।

किन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं?

बीमार, गर्भवती महिलाएँ और जिन्हें स्वास्थ्य की कोई समस्या है, उन्हें व्रत रखना ज़रूरी नहीं, न छोटे बच्चों और बहुत बुज़ुर्गों को। वे दूध और फल लें और दिन प्रार्थना में बिताएँ। कोई बीमारी हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।

अगर ग़लती से व्रत टूट जाए तो?

चिंता न करें। भगवान से क्षमा माँगें, बाक़ी दिन नाम-स्मरण में बिताएँ, और अगली एकादशी ठीक से रखें।

2026 की तारीखें

इस साल 2 बार, बेंगलुरु के समय के अनुसार।

23अगपुत्रदा एकादशी (स्मार्त)रविवार · श्रावण शुक्ल एकादशी · भोर 4:19 तक
24अगपुत्रदा एकादशी (वैष्णव)सोमवार · श्रावण शुक्ल द्वादशी

2026 की शहर के अनुसार तारीखें

सभी तारीखें सभी शहरों में एक ही हैं।

2027 की तारीखें

2027 में 1 बार, बेंगलुरु के समय के अनुसार।

12अगपुत्रदा एकादशीगुरुवार · श्रावण शुक्ल एकादशी · भोर 3:00 तक

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