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कालदर्शीआज

मासिक शिवरात्रि

हर महीने की कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि: रात में शिव पूजा। महाशिवरात्रि साल में एक बार, पर शिव की रात हर महीने!

5जनमंगलवार, 5 जनवरी 2027चतुर्दशी बुध, 6 जन, रात 11:14 तक
  • 67 दिन बाकी

पूजा कब करें?

पुणे के लिए · सबसे शुभ समय

रात 12:13 से रात 1:05 तक

  • पूजा का समय
  • प्रदोष काल
  • रात
  • चतुर्दशी शुरूरात 8:40मंगल, 5 जन
  • चतुर्दशी समाप्तरात 11:14बुध, 6 जन
  • प्रदोष कालशाम 6:09 से रात 8:45 तक
दूसरे शहरों का समय
  • पुणेरात 12:13 से रात 1:05 तक
  • मुंबईरात 12:17 से रात 1:09 तक
  • ठाणेरात 12:17 से रात 1:09 तक
  • नासिकरात 12:13 से रात 1:06 तक
  • नागपुररात 11:52 से रात 12:45 तक
  • कोल्हापुररात 12:12 से रात 1:04 तक
  • दिल्लीरात 11:59 से रात 12:53 तक
  • बेंगलुरुरात 11:59 से रात 12:50 तक
  • इंदौररात 12:05 से रात 12:58 तक
  • लंदनरात 11:33 से रात 12:38 तक
  • न्यू जर्सीरात 11:32 से रात 12:31 तक
  • दुबईरात 11:57 से रात 12:51 तक

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामशिवरात्रि, मास शिवरात्रि
  • कहाँपूरा भारत, हर महीने
  • किसकी पूजाशिव, शिवलिंग के रूप में
  • एक पंक्ति मेंअमावस्या से पहले की रात, शिव की: उपवास, जागरण और शिवलिंग की पूजा।

मासिक शिवरात्रि, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    हर महीने एक शिवरात्रि होती है: कृष्ण चतुर्दशी, अमावस्या से एक दिन पहले। साल की बारह शिवरात्रियों में सबसे बड़ी माघ की महाशिवरात्रि है।

    मासिक शिवरात्रि का व्रत उसी तरह का है: उपवास, रात का जागरण और शिवलिंग की पूजा। फ़र्क़ बस इतना कि यह रात हर महीने आती है।

    चाँद रोज़ पतला होता जाता है, और आज लगभग दिखता ही नहीं। ऐसी अँधेरी रात में शिव की याद: अँधेरा कितना भी हो, जागते रहना है।

  2. 02

    शिकारी और बेल का पेड़

    शिवपुराण में गुरुद्रुह नाम के एक शिकारी की कथा है। शिवरात्रि की रात वह जंगल में शिकार को गया, और जंगली जानवरों से बचने के लिए एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया।

    जागते रहने के लिए वह बेलपत्र तोड़कर नीचे गिराता रहा। उसे पता ही नहीं था कि नीचे शिवलिंग है। रात में एक हिरणी पानी पीने आई; उसने कहा कि बच्चों से मिलकर लौट आएगी, और उसने उसे जाने दिया। जब वह परिवार के साथ लौटी, तो उसने सबको जीवनदान दिया।

    सुबह तक हज़ारों पत्ते लिंग पर गिर चुके थे। अनजाने में हुई इस पूजा ने उसका मन बदल दिया, और शिव प्रकट हुए। यह कथा महाशिवरात्रि की है, पर इसकी सीख हर शिवरात्रि की: जागते रहिए, और दया मत छोड़िए।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    दिन भर उपवास, और रात में शिवलिंग की पूजा: बेलपत्र, दूध और जल।

    कुछ लोग रात भर जागरण करते हैं: भजन और शिव नाम का जाप।

    जो हर महीने शिवरात्रि रखते हैं, उनके लिए महाशिवरात्रि साल की सबसे बड़ी रात है। बाक़ी महीनों की शिवरात्रि घर पर, शांति से।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: दिन में व्रत, रात को शिव पूजा और जागरण, और अगली सुबह स्नान के बाद पारण।

  1. 1दिन भर व्रत रखें। कई लोग अनाज और नमक नहीं लेते, या सिर्फ़ फल और दूध लेते हैं।
  2. 2शाम को स्नान करें और शिवलिंग या शिव की तस्वीर रखें।
  3. 3जल और दूध से अभिषेक करें; कुछ लोग दही, शहद और घी भी चढ़ाते हैं।
  4. 4बेलपत्र, फूल और अगरबत्ती चढ़ाएँ, और दीया जलाएँ।
  5. 5शिव का नाम लें, और जितनी देर हो सके रात को जागरण करें।
  6. 6आरती करें।
  7. 7अगली सुबह स्नान करके व्रत खोलें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह महाशिवरात्रि से कैसे अलग है?

व्रत वही है। महाशिवरात्रि साल में एक बार आती है, सबसे बड़ी है, और उसमें रात भर चार प्रहर की पूजा होती है।

व्रत में क्या खा सकते हैं?

कई लोग फल और दूध लेते हैं, अनाज और दालें छोड़ते हैं, और नमक चाहिए तो सेंधा नमक लेते हैं। कुछ लोग पानी भी नहीं लेते।

क्या रात भर जागना ज़रूरी है?

नहीं। जितनी देर हो सके जागें, भजन करें या शिव का नाम लें।

बीमारी, गर्भावस्था या बुढ़ापे में व्रत रखें?

सेहत पहले। फल-दूध लेकर हल्का व्रत रखें, और जागरण के बिना सिर्फ़ पूजा करें। शंका हो तो डॉक्टर की सलाह लें।

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