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कालदर्शीआज

अक्षय तृतीया

अक्षय यानी कभी न घटने वाला। आज किया अच्छा काम, दान और नई शुरुआत हमेशा बनी रहती है, ऐसी मान्यता है।

9मईरविवार, 9 मई 2027तृतीया सुबह 9:03 तक
  • 191 दिन बाकी

पूजा कब करें?

पुणे के लिए · सबसे शुभ समय

सुबह 6:06

  • पूजा का समय
  • प्रदोष काल
  • रात
  • तृतीया शुरूसुबह 11:43शनि, 8 मई
  • तृतीया समाप्तसुबह 9:03रवि, 9 मई
  • प्रदोष कालशाम 6:56 से रात 9:10 तक
दूसरे शहरों का समय
  • पुणेसुबह 6:06
  • मुंबईसुबह 6:09
  • ठाणेसुबह 6:08
  • नासिकसुबह 6:04
  • नागपुरभोर 5:41
  • कोल्हापुरसुबह 6:07
  • दिल्लीभोर 5:37
  • बेंगलुरुभोर 5:58
  • इंदौरभोर 5:51
  • लंदनभोर 5:24
  • न्यू जर्सीभोर 5:50
  • दुबईभोर 5:41

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामआखा तीज, परशुराम जयंती
  • कहाँपूरा भारत; जैन धर्म में भी महत्वपूर्ण दिन
  • किसकी पूजाविष्णु, लक्ष्मी और परशुराम
  • एक पंक्ति मेंसाढ़े तीन मुहूर्तों में से एक: नई शुरुआत, सोना ख़रीदने और दान के लिए साल का सबसे शुभ दिन।

अक्षय तृतीया, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    वैशाख शुक्ल तृतीया ही अक्षय तृतीया है। अक्षय यानी कभी न घटने वाला: आज जो शुरू करें, जो दें, वह बढ़ता ही जाता है, ऐसी मान्यता है।

    इसलिए आज मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं: पूरा दिन ही शुभ है। नया काम, नया व्यापार, गृहप्रवेश, और सोने की ख़रीद आज ही होती है।

    पर सोने से बड़ा है दान। जिसका फल कभी ख़त्म न हो, वह है दूसरों को दिया हुआ: यही इस दिन का असली अर्थ है।

  2. 02

    सुदामा के चावल

    कृष्ण के बचपन के मित्र सुदामा बहुत ग़रीब थे। पत्नी के कहने पर वे द्वारका में कृष्ण से मिलने चले, भेंट में बस मुट्ठी भर चिवड़ा लेकर।

    राजा बन चुके कृष्ण ने उनके पैर धोए, गले लगाया और वह चिवड़ा प्रेम से खाया। सुदामा ने कुछ नहीं माँगा।

    घर लौटे तो झोपड़ी की जगह महल खड़ा था। मन से दिया छोटा दान भी अक्षय होता है, यही आज की कथा है। मान्यता है कि इसी दिन परशुराम का जन्म हुआ, गंगा पृथ्वी पर उतरीं, और व्यास ने गणेश को महाभारत लिखवाना शुरू किया।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    चैत्र तृतीया से शुरू हुआ चैत्र गौरी का हल्दी-कुमकुम आज पूरा होता है। आंब्याची डाळ (कच्चे आम और चने की दाल) और कच्चे आम का पना इस मौसम की ख़ास चीज़ें हैं।

    पितरों के नाम पर पानी से भरा मटका या घड़ा दान करते हैं: गर्मी में प्यासे को पानी सबसे बड़ा दान है। ख़ानदेश में आखाजी लड़कियों और मायके आई बेटियों का त्योहार है।

    उत्तराखंड में यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिरों के कपाट आज खुलते हैं। जैन धर्म में आज ही भगवान ऋषभदेव ने गन्ने का रस लेकर वर्ष भर का उपवास तोड़ा था, इसलिए वर्षीतप करने वाले आज गन्ने के रस से पारणा करते हैं।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: सुबह विष्णु-लक्ष्मी की पूजा, पितरों के नाम पानी का घड़ा, दान, और कोई अच्छी शुरुआत।

  1. 1स्नान के बाद विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करें: चंदन, फूल, तुलसी, दीया और अगरबत्ती।कई घरों में कुबेर और परशुराम की भी पूजा होती है।
  2. 2मिट्टी के घड़े में पानी भरें, उसमें खस डालें, और दान करें।गर्मी में पानी ही सबसे बड़ा दान है। घड़ा किसी ज़रूरतमंद को दें, या आने-जाने वालों के लिए दरवाज़े पर पानी रखें।
  3. 3पितरों को याद करें: उनकी तस्वीर की पूजा करके पानी और भोजन अर्पित करें।यह दिन पूर्वजों का ऋण याद करने के दिन के रूप में भी माना जाता है।
  4. 4जो हो सके दान करें: चावल, नमक, घी, चीनी, इमली, फल, कपड़े या पंखा।दान छोटा हो तो भी चलेगा: मन से दिया दान अक्षय होता है।
  5. 5पूरनपोली, आमरस, कच्चे आम की चने की दाल और कैरी का पना नैवेद्य में चढ़ाएँ।नैवेद्य पहले भगवान और पितरों को, फिर सबको।
  6. 6कोई अच्छी शुरुआत करें: नया काम, नया घर, या बचत की शुरुआत।आज पूरा दिन शुभ माना जाता है, इसलिए अलग मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं।
  7. 7चैत्र गौरी का हल्दी-कुमकुम आज पूरा करें, कैरी की दाल और पना देकर।चैत्र तृतीया को शुरू हुआ चैत्र गौरी का हल्दी-कुमकुम आज पूरा होता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या आज सोना खरीदना ज़रूरी है?

नहीं। सोना, कपड़े या कोई नई चीज़ खरीदना प्रथा है, नियम नहीं। आज का असली अर्थ दान है: दिया हुआ कभी कम नहीं होता।

पानी का घड़ा क्यों देते हैं?

वैशाख की गर्मी में प्यासे को पानी बड़ा दान है, और यह पितरों के नाम से दिया जाता है। खस डालने से पानी ठंडा और सुगंधित रहता है।

क्या आज नए घर में जा सकते हैं?

हाँ। यह साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक है, इसलिए गृह प्रवेश, नया व्यवसाय या बड़ा लेन-देन आज होता है। घर की परंपरा से पूजा करें।

क्या व्रत रखें?

महाराष्ट्र में आज व्रत का नियम नहीं है; पूजा, दान और पितरों का स्मरण ही ज़रूरी है। जैन परंपरा में वर्षीतप का पारणा आज गन्ने के रस से होता है।

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