त्योहार · श्रावण कृष्ण नवमी
दही हांडी 2026
जन्माष्टमी के अगले दिन गोपालकाला: परत पर परत, और ऊँचाई पर टँगी दही हांडी फूटती है। गोविंदा आला रे!
तारीख, तिथि और समय
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शहर के अनुसार तारीख
इन शहरों में तारीख अलग है; बाकी में वही।
अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामदही हांडी, गोपाल काला
- कहाँमहाराष्ट्र, ख़ासकर मुंबई, ठाणे, पुणे और कोंकण
- किसकी पूजाबालकृष्ण, ग्वालों के सखा
- एक पंक्ति मेंबालकृष्ण और उनके सखा: ऊँचाई पर टँगा दही-मक्खन, और सबने मिलकर खाया काला।
दही हांडी, थोड़ा विस्तार से
- 01
पर्व के बारे में
गोपाल यानी गायें चराने वाला, और काला यानी एक साथ मिलाना। नाम में ही पूरा त्योहार है।
काला ही प्रसाद है: पोहा, लाई, दही, छाछ, अचार और फलों के टुकड़े, सब एक साथ। कहते हैं कृष्ण को यह काला बहुत प्रिय था।
और इसकी सीख: अकेले हांडी नहीं फूटती। एक-दूसरे के कंधों पर खड़े होइए, और जो मिले उसे बाँटकर खाइए।
- 02
माखनचोर और उसके सखा
गोकुल में बालकृष्ण को माखन चुराने की बड़ी आदत थी। इसी से उनका नाम पड़ा माखनचोर। उनसे बचाने के लिए ग्वालिनें दही-माखन की मटकियाँ ऊँचाई पर टाँग देती थीं।
पर कृष्ण हार मानने वाले नहीं थे। सखा एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर मानव मीनार बनाते, और सबसे ऊपर से कृष्ण मटकी फोड़ देते।
फिर सब यमुना के किनारे बैठते। हर कोई अपनी लाई हुई पोटली एक साथ मिलाता, और सब मिलकर खाते। वही गोपालकाला।
- 03
महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
गली-गली ऊँचाई पर दही हांडी बाँधी जाती है: दूध, दही, मक्खन, फल और पानी से भरी। गोविंदा पथक परत पर परत बनाते हैं, और सबसे ऊपर एक छोटा बच्चा हांडी फोड़ता है। नीचे भीड़ का एक ही नारा: आला रे आला, गोविंदा आला!
मुंबई, ठाणे और पुणे में सैकड़ों पथक और हज़ारों लोग जुटते हैं, और बड़े इनाम लगते हैं। अब महिलाओं के पथक भी उतरते हैं।
कोंकण में दहीकाला होता है। वारकरी संप्रदाय में वारी की समाप्ति गोपालकाला से ही होती है, और कीर्तन उत्सव के आख़िर में होने वाले कीर्तन को काल्याचे कीर्तन कहते हैं।
गुजरात में द्वारका में ऐसी ही माखन हांडी होती है।
गोपालकाला कैसे मनाएँ
संक्षेप में: काला बनाएँ, भगवान को चढ़ाएँ और सबमें बाँटें; दही हांडी देखने जाएँ तो सुरक्षा पहले।
- 1पोहा भिगोएँ, और चने की दाल कुछ घंटे पहले भिगो दें।सामग्री की सूची नीचे दी है।
- 2काला मिलाएँ: पोहा, लाई, दही, छाछ, अचार, भीगी दाल, फलों के टुकड़े और थोड़ी शक्कर।लाई ज्वार की हो या धान की, अचार नींबू का या आम का: हर घर का काला थोड़ा अलग होता है।
- 3पहले कृष्ण को काले का भोग लगाएँ।काले का पहला कौर भगवान का।
- 4फिर एक बड़े बर्तन से सबको बाँटें।कृष्ण के काले में सबका भोजन एक जगह मिला था; आपका भी वैसा ही।
- 5दही हांडी देखने जाएँ तो बैरिकेड के पीछे, मीनार से दूर खड़े रहें।छोटे बच्चों का हाथ पकड़ें, और तेज़ आवाज़ से उनके कान बचाएँ।
- 6अगर आप गोविंदा पथक में हैं तो अपने शहर के नियम मानें।उम्र, हांडी की ऊँचाई, हेलमेट, सेफ़्टी बेल्ट और नीचे गद्दे: हर साल गोविंदा घायल होते हैं, इसलिए ये नियम हैं। पहले अभ्यास करें।
- 7पानी और फर्स्ट-एड किट पास रखें, और कोई गिरे तो तुरंत मदद बुलाएँ।गिरे हुए गोविंदा का सिर या गर्दन न उठाएँ; प्रशिक्षित मदद का इंतज़ार करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या बच्चे मीनार पर चढ़ सकते हैं?
अदालतों और राज्य सरकार ने उम्र और ऊँचाई की सीमा तय की है। आपके यहाँ अभी जो नियम लागू हैं वे मानें, और आयोजकों से पूछें।
क्या दही हांडी के बिना गोपालकाला मना सकते हैं?
हाँ। काला ही आज का केंद्र है: उसे बनाएँ, भगवान को चढ़ाएँ, और परिवार और पड़ोसियों के साथ बाँटें।
क्या आज भी व्रत होता है?
नहीं। व्रत कल जन्माष्टमी का था। आज का काला खुशी से बाँटकर खाने का प्रसाद है।
बच्चों के साथ दही हांडी कैसे देखें?
भीड़ के किनारे, बैरिकेड के पीछे खड़े रहें, बच्चों का हाथ न छोड़ें, और मिलने की जगह पहले से तय करें। कान ढकने के लिए रुई या इयरप्लग रखें।
ऐप में याद लगाएँ
ऐप एक दिन पहले और उसी दिन सूचना भेजता है, बिना इंटरनेट भी।