त्योहार · पौष कृष्ण दशमी
भोगी 2026
संक्रांति से एक दिन पहले भोगी: तिल लगी बाजरे की भाकरी, मक्खन और भोगी की सब्ज़ी। सर्दी का गरमाहट देने वाला खाना, और पुराना छोड़कर नए की तैयारी।
तारीख, तिथि और समय
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यह तारीख सभी शहरों में एक ही है।
अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामलोहड़ी (पंजाब), भोगी पोंगल (तमिलनाडु)
- कहाँमहाराष्ट्र और दक्षिण भारत; उत्तर में लोहड़ी
- किसकी पूजादक्षिण में इंद्र, वर्षा के देवता
- एक पंक्ति मेंसंक्रांति का पहला दिन: सर्दी में तिल-बाजरे का गरमाहट देने वाला भोजन, और पुराने को विदाई।
भोगी, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
मार्गशीर्ष का आख़िरी दिन, संक्रांति से एक दिन पहले भोगी। संक्रांति का त्योहार यहीं से शुरू होता है: भोगी, संक्रांति और किंक्रांत।
भोगी यानी उपभोग का त्योहार। खेत में नई फ़सल आई है, बाज़ार हरी सब्ज़ियों से भरे हैं, और आज वह सब एक ही थाली में आता है।
बाजरा और तिल सर्दी में शरीर को गरम रखते हैं। मौसम के हिसाब से खाएँ, और जो मिला उसका आनंद लें, यही इस दिन का सीधा अर्थ है।
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इंद्र का धन्यवाद, और पुराने की आग
इंद्र देवताओं के राजा और वर्षा के देवता हैं। दक्षिण में आज उस वर्षा के लिए उनका धन्यवाद करते हैं जिससे यह फ़सल उगी, और अगले साल अच्छी बारिश की प्रार्थना करते हैं।
वहाँ भोर में घर का पुराना, बेकार सामान, पुरानी लकड़ी और टूटा फ़र्नीचर अलाव में डाल देते हैं। घर साफ़ करते हैं, रँगते हैं, सजाते हैं।
यह आग पुराने साल का हिसाब बंद करती है और नया खोलती है। जो अब काम का नहीं, उसे छोड़ दें, तो नए के लिए जगह बनती है।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
भोगी की सब्ज़ी यानी मौसम की सारी सब्ज़ियाँ एक साथ: मटर, गाजर, बैंगन, हरा चना, सेम, और उसमें तिल का कूट। साथ में तिल लगी बाजरे की भाकरी, मक्खन, और मूँग दाल की खिचड़ी।
स्त्रियाँ आज अभ्यंग स्नान करती हैं। घर साफ़ करके, नए कपड़े पहनकर, त्योहार शुरू होता है।
आंध्र और तेलंगाना में भोर में भोगी का अलाव, और शाम को भोगी पल्लु: बेर, गन्ने के टुकड़े, फूल और सिक्के छोटे बच्चों के सिर पर से वारते हैं। तमिलनाडु में भोगी पोंगल, और कोंगु क्षेत्र में नीम की पत्तियाँ घर पर बाँधते हैं।
पंजाब में आज रात लोहड़ी: अलाव में तिल, गुड़ और रेवड़ी डालते हैं, और फूले, मूँगफली बाँटते हैं। रबी की फ़सल और गन्ने की कटाई इन्हीं दिनों होती है।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: सुबह तेल लगाकर स्नान, और दोपहर को सर्दी की थाली: भोगी की सब्ज़ी, तिल लगी बाजरे की रोटी और मक्खन।
- 1एक दिन पहले घर साफ़ करें, और जो चीज़ें काम की नहीं, उन्हें अलग करें।जो अभी काम आ सकता है, उसे फेंकने के बजाय किसी को दे दें।
- 2सुबह शरीर पर तेल लगाकर अभ्यंग स्नान करें।कई घरों में तिल का तेल या उबटन लगाते हैं। तेल से फ़र्श फिसलन भरा हो जाता है: बुज़ुर्गों को सहारा दें, और स्नानघर गर्म रखें।
- 3नए या साफ़ धुले कपड़े पहनें।संक्रांति का त्योहार आज से शुरू होता है।
- 4मौसम की सारी सब्ज़ियाँ मिलाकर, पिसे तिल डालकर भोगी की सब्ज़ी बनाएँ।मटर, गाजर, बैंगन, हरा चना, पापड़ी: जो मिले, वही चलेगा।
- 5तिल लगाकर बाजरे की रोटी थापें, और मूँग दाल की खिचड़ी बनाएँ।रोटी सफ़ेद मक्खन के साथ खाएँ।
- 6पहले भगवान को थाली का भोग लगाएँ, फिर सब मिलकर भोजन करें।कई घरों में यह सब्ज़ी पड़ोसियों को भी बाँटी जाती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या भोगी पर कोई पूजा होती है?
महाराष्ट्र में कोई तय पूजा नहीं होती: स्नान, नए कपड़े और भगवान को भोग लगाया भोजन, यही भोगी का त्योहार है। दक्षिण में आज इंद्र की पूजा होती है।
भोगी, संक्रांति और किंक्रांत: किस दिन क्या?
भोगी को स्नान और भोगी का भोजन। संक्रांति को सुगड़, तिलगुड़, गुड़ की रोटी और हल्दी-कुमकुम। किंक्रांत को कुछ नया शुरू नहीं करते, पर हल्दी-कुमकुम चलता रहता है।
क्या अलाव जलाना चाहिए?
सुबह का अलाव मुख्य रूप से दक्षिण की रीत है। जलाएँ तो सिर्फ़ लकड़ी जलाएँ: प्लास्टिक, टायर या रंगा हुआ फ़र्नीचर नहीं, उसका धुआँ ज़हरीला होता है। बच्चों को आग से दूर रखें।
क्या बुज़ुर्गों को तेल लगाकर स्नान करना चाहिए?
हाँ, पर सावधानी से: गुनगुना पानी, गर्म स्नानघर, और बैठने के लिए पाटा। नहाने के बाद तुरंत शरीर सुखाएँ। बीमार हों, तो थोड़ा तेल लगाकर सादा स्नान भी काफ़ी है।
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