त्योहार · चैत्र पूर्णिमा
हनुमान जयंती 2026
चैत्र पूर्णिमा की भोर हनुमान जन्म। शक्ति, भक्ति और निष्ठा का दूसरा नाम: बजरंगबली!
तारीख, तिथि और समय
समय पुणे के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।
शहर के अनुसार तारीख
इन शहरों में तारीख अलग है; बाकी में वही।
अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामहनुमान जन्मोत्सव, बजरंगबली जयंती
- कहाँमहाराष्ट्र और उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को; दक्षिण में अलग तिथियों पर
- किसकी पूजाहनुमान
- एक पंक्ति मेंअंजना और केसरी के पुत्र, पवनपुत्र हनुमान का जन्मदिन।
हनुमान जयंती, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
महाराष्ट्र में हनुमान को प्यार से मारुति कहते हैं। लगभग हर गाँव की सीमा पर मारुति का मंदिर होता है: गाँव का रक्षक।
हनुमान यानी शक्ति, पर अपने लिए नहीं। राम की सेवा ही उनका सारा बल है। शक्ति और विनम्रता साथ कैसे रहती हैं, यह हनुमान से सीखिए।
इसीलिए व्यायामशालाओं, तालीमों और अखाड़ों में हनुमान की मूर्ति होती है। शरीर बलवान और मन भक्ति में, यही उनका संदेश है।
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सूर्य को फल समझने वाले बाल हनुमान
बचपन में एक बार हनुमान ने उगता सूर्य देखा, उसे पका फल समझा और खाने के लिए आकाश में छलाँग लगा दी।
उन्हें रोकने के लिए इंद्र ने वज्र चलाया, जो हनुमान की ठोड़ी, यानी जबड़े, पर लगा। क्रोधित वायुदेव ने संसार से हवा ही रोक ली, और सब प्राणी घुटने लगे।
आख़िर शिव ने हनुमान को फिर से जीवित किया, वायु ने हवा लौटाई, और देवताओं ने हनुमान को वर दिए: किसी शस्त्र से चोट न लगे, और जहाँ चाहें जा सकें। हनु यानी जबड़ा; हनुमान नाम का एक अर्थ यहीं से जोड़ा जाता है।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
मारुति मंदिरों में भोर से कीर्तन शुरू होता है, जन्म के समय, सूर्योदय पर, रुकता है, और फिर प्रसाद बँटता है। पालना झुलाते हैं और सुंठवड़ा देते हैं।
हनुमान को सिंदूर, तेल, आक के पत्तों की माला और नारियल चढ़ाते हैं। भक्त मूर्ति का सिंदूर माथे पर लगाते हैं। दिन भर हनुमान चालीसा और मारुति स्तोत्र, भीमरूपी महारुद्रा, गाते हैं।
आंध्र और तेलंगाना में हनुमान जयंती वैशाख में आती है, कर्नाटक में मार्गशीर्ष या वैशाख में, और तमिलनाडु व केरल में मार्गळी महीने में। ओडिशा में यह ओडिया नववर्ष, पणा संक्रांति, के साथ आती है।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: भोर में कीर्तन, सूर्योदय पर जन्म, फिर सिंदूर, तेल, आक के पत्ते, नारियल और स्तोत्र।
- 1भोर से पहले उठें और स्नान करें।आपके शहर का सूर्योदय का समय ऊपर दिया है।
- 2हनुमान मंदिर में भोर के कीर्तन में जाएँ, या घर पर हनुमान की प्रतिमा रखें।महाराष्ट्र में ज़्यादातर मंदिरों में सूर्योदय से पहले कीर्तन शुरू होता है। भीड़ होती है, इसलिए जल्दी जाएँ।
- 3सूर्योदय पर, जन्म के समय, प्रणाम करें और आरती में शामिल हों।जन्म के समय कीर्तन रुकता है और सबको प्रसाद बाँटा जाता है।
- 4सिंदूर और तेल, आक के फूल और पत्ते चढ़ाएँ, और नारियल फोड़ें।भक्त प्रतिमा का सिंदूर अपने माथे पर लगाते हैं।
- 5हनुमान चालीसा या भीमरूपी महारुद्र स्तोत्र पढ़ें, या सुंदरकांड का पाठ करें।भीमरूपी महारुद्र समर्थ रामदास का रचा मारुति स्तोत्र है; महाराष्ट्र में यही सबसे ज़्यादा गाया जाता है।
- 6नैवेद्य चढ़ाएँ, और प्रसाद लें।नैवेद्य पहले भगवान को, फिर सबको।
- 7व्रत रखते हों, तो शाम की आरती के बाद खोलें।बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग हों, तो व्रत न रखें; पूजा और स्तोत्र काफ़ी है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हनुमान जन्म किस समय मनाया जाता है?
सूर्योदय पर: माना जाता है कि हनुमान का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था। आपके शहर का समय ऊपर दिया है।
हनुमान को सिंदूर और तेल क्यों चढ़ाते हैं?
एक कथा के अनुसार, सीता को राम की लंबी आयु के लिए सिंदूर लगाते देखकर हनुमान ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। तब से सिंदूर और तेल हनुमान के खास चढ़ावे हैं।
दक्षिण में हनुमान जयंती अलग दिन क्यों होती है?
परंपराएँ अलग हैं। महाराष्ट्र और उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को; आंध्र और तेलंगाना में वैशाख में, और तमिलनाडु व केरल में मार्गली महीने में।
क्या व्रत रखें?
व्रत उत्तर भारत में ज़्यादा रखा जाता है। महाराष्ट्र में कई लोग मंदिर, कीर्तन और प्रसाद से दिन मनाते हैं। व्रत आपकी इच्छा पर है, और सेहत पहले।
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