त्योहार · आषाढ़ पूर्णिमा
गुरु पूर्णिमा 2026
आषाढ़ पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा, व्यास जी का दिन। आज हर उस गुरु को वंदन, जिसने आपको गढ़ा!
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अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामव्यास पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा
- कहाँपूरा भारत और नेपाल; बौद्ध और जैन परंपरा में भी यह दिन ख़ास
- किसकी पूजामहर्षि व्यास और अपने गुरु
- एक पंक्ति मेंमहर्षि व्यास का जन्मदिन, और अपने सभी गुरुओं को वंदन करने का दिन।
गुरु पूर्णिमा, थोड़ा विस्तार से
- 01
पर्व के बारे में
गुरु यानी अंधकार दूर करने वाला। जो अज्ञान के अँधेरे से ज्ञान की ओर ले जाए, वही गुरु।
आज व्यास जी की पूजा होती है। उन्होंने वेद को चार भागों में बाँटा और महाभारत दिया, इसलिए वे सभी गुरुओं के गुरु माने जाते हैं।
पर गुरु सिर्फ़ आश्रम में नहीं होते। स्कूल के शिक्षक, संगीत या कोई कला सिखाने वाले, जीवन में राह दिखाने वाले: आज उन सबको याद कीजिए, और हो सके तो किसी एक को फ़ोन कीजिए।
- 02
व्यास और गणेश की शर्त
पराशर ऋषि और सत्यवती का पुत्र यमुना के एक द्वीप पर जन्मा। रंग साँवला था, इसलिए नाम पड़ा कृष्ण द्वैपायन। वही आगे चलकर व्यास बने।
व्यास जी महाभारत लिखवाना चाहते थे, और गणेश जी लेखक बनने को तैयार हुए। पर गणेश जी की शर्त थी: आप एक बार भी रुकेंगे नहीं। व्यास जी ने उलटी शर्त रखी: हर श्लोक समझे बिना लिखना नहीं।
फिर व्यास जी बीच-बीच में कठिन श्लोक बोलते। गणेश जी उसे समझते, तब तक व्यास जी को अगला सोचने का समय मिल जाता। ऐसे पूरा महाभारत लिखा गया। गुरु की समझदारी और शिष्य की समझ, दोनों साथ!
- 03
महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
स्कूलों में बच्चे शिक्षकों को फूल देकर प्रणाम करते हैं। संगीत, नृत्य या कुश्ती सीखने वाले आज अपने गुरु की पूजा करते हैं।
शिरडी में गुरु पूर्णिमा साल के तीन बड़े उत्सवों में से एक है: लाखों भक्त आते हैं, पालकी और रथ निकलते हैं। संतों के मठों में भी आज गुरु पूजन होता है।
बौद्ध परंपरा में यह बुद्ध के सारनाथ में पहले उपदेश का दिन है, और वर्षावास की शुरुआत। जैन परंपरा में माना जाता है कि महावीर ने आज गौतम स्वामी को पहला शिष्य बनाया।
नेपाल में आज शिक्षक दिवस है: छात्र शिक्षकों को माला, मिठाई और टोपी देते हैं।
यह दिन कैसे मनाएँ
संक्षेप में: व्यास जी की पूजा, अपने गुरु को वंदन, और हो सके तो शिक्षक से मिलकर धन्यवाद।
- 1स्नान करके दिन की शुरुआत माता-पिता को प्रणाम करके करें।माता-पिता पहले गुरु हैं, इसलिए कई घरों में दिन उन्हें प्रणाम से शुरू होता है।
- 2व्यास जी की पूजा करें: उनका चित्र, या महाभारत या गीता, फूल, चंदन और दीया।कई मंदिरों में आज व्यास पूजा होती है, और फूल और भेंट चढ़ाई जाती हैं।
- 3आपके गुरु हों तो उनकी पादुकाओं की पूजा करें।पादुकाएँ गुरु के चरणों का प्रतीक हैं। पादुकाएँ न हों तो गुरु के चित्र पर फूल चढ़ाएँ।
- 4गुरु वंदना का श्लोक बोलें, या गुरु गीता पढ़ें।"गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः" श्लोक कई घरों और स्कूलों में बोला जाता है।
- 5गुरु से, या उनके आश्रम, मठ या समाधि पर मिलने जाएँ।आज आश्रमों और गुरु-स्थानों पर भक्त जुटते हैं। भीड़ होती है, इसलिए जल्दी जाएँ।
- 6अपने शिक्षकों से मिलकर धन्यवाद दें: कोई फूल, मिठाई या छोटा उपहार।पुराने शिक्षक को फ़ोन करना भी अच्छी गुरु दक्षिणा है।
- 7जितनी हो सके, गुरु दक्षिणा दें।पैसे, उपहार, भोजन या आपका समय: जो भी दें, आदर से दें।
- 8दिन का कुछ समय सीखने में लगाएँ: पढ़ें, अपनी कला का रियाज़ करें, या किसी को सिखाएँ।कई लोग मानते हैं कि सीखी हुई बात पर चलना ही सच्ची गुरु दक्षिणा है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मेरे कोई गुरु नहीं हैं। मैं किसे वंदन करूँ?
हर वह व्यक्ति जिसने आपको कुछ भी सिखाया: माता-पिता, स्कूल और कॉलेज के शिक्षक, कला सिखाने वाले, जीवन में राह दिखाने वाले। आज उन्हें याद करें और धन्यवाद दें।
पाद पूजा क्या है?
गुरु की पादुकाओं की पूजा। पादुकाएँ गुरु के पवित्र चरणों का प्रतीक मानी जाती हैं। कई मठों और आश्रमों में आज यह पूजा होती है।
क्या आज व्रत रखना होता है?
ज़्यादातर लोगों के लिए व्रत इस दिन का नियम नहीं है। आपके गुरु की परंपरा में हो, तो ज़रूर रखें।
गुरु दक्षिणा कितनी दें?
कोई तय रकम नहीं है। जो दे सकें, आदर से दें। पैसे से ज़्यादा आपका समय, सेवा और सीखी बात पर चलना मायने रखता है।
ऐप में याद लगाएँ
ऐप एक दिन पहले और उसी दिन सूचना भेजता है, बिना इंटरनेट भी।