त्योहार · चैत्र शुक्ल नवमी
राम नवमी 2026
चैत्र शुक्ल नवमी की दोपहर राम जन्म होता है। मंदिर में पालना झूलता है, और सब गाते हैं: श्रीराम जय राम जय जय राम!
तारीख, तिथि और समय
समय न्यू जर्सी के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।
शहर के अनुसार तारीख
यह तारीख सभी शहरों में एक ही है।
अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामराम जन्मोत्सव, श्रीराम नवमी
- कहाँपूरा भारत; अयोध्या और भद्राचलम में बड़ा उत्सव
- किसकी पूजाश्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान
- एक पंक्ति मेंवह दिन जब अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के यहाँ राम का जन्म हुआ।
राम नवमी, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
राम विष्णु के सातवें अवतार हैं। चैत्र नवरात्र का नौवाँ और आख़िरी दिन ही रामनवमी है।
राम को आदर्श राजा और आदर्श मनुष्य माना जाता है: दिया वचन निभाने वाले, पिता की आज्ञा मानकर वनवास जाने वाले, और सबसे न्याय करने वाले।
इसलिए आज का दिन सिर्फ़ जन्मोत्सव नहीं है। अपने व्यवहार में थोड़ा राम लाने की याद है: सच बोलिए, वचन निभाइए, और न्याय कीजिए।
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चार राजकुमारों का जन्म
अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियाँ थीं, कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा, पर कोई संतान नहीं थी।
उन्होंने ऋषि ऋष्यशृंग से यज्ञ करवाया। यज्ञ की अग्नि से एक दिव्य पुरुष खीर का पात्र लेकर प्रकट हुआ, और राजा ने वह खीर रानियों में बाँटी।
कौशल्या से राम, कैकेयी से भरत, और सुमित्रा से जुड़वाँ लक्ष्मण और शत्रुघ्न जन्मे। चार पुत्रों के जन्म से दशरथ की इच्छा पूरी हुई।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
राम मंदिरों में गुढी पाड़वा से नौ दिन कीर्तन और रामायण पाठ चलता है। नवमी की दोपहर बारह बजे, जन्म के समय, पालना झुलाते हैं, गुलाल उड़ाते हैं और प्रसाद में सुंठवड़ा बाँटते हैं।
कई लोग उपवास रखते हैं, रामरक्षा या राम नाम का जप करते हैं। शाम को राम की पालकी या रथ निकलता है।
अयोध्या में भक्त सरयू में स्नान करके राम मंदिर दर्शन को जाते हैं। तेलंगाना के भद्राचलम में बड़ा उत्सव होता है, और कर्नाटक में सड़कों पर पानक, गुड़ का ठंडा पेय, बाँटा जाता है।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: सुबह भर रामनाम, दोपहर को राम जन्म और पालना, फिर आरती और सुंठवड़े का प्रसाद।
- 1सुबह स्नान करें, और व्रत तय करें: पूरा व्रत, फल और दूध, या जन्म के बाद एक बार भोजन।कई लोग जन्म तक व्रत रखते हैं। बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग हों, तो सादा भोजन करें।
- 2साफ़ चौकी पर राम की प्रतिमा रखें, हों तो सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ।प्रतिमा न हो तो राम की तस्वीर भी चलती है।
- 3एक छोटा पालना सजाकर तैयार रखें।पालना न हो तो छोटा झूला या कपड़ा बिछी चौकी भी चलेगी।
- 4चंदन, पहले हल्दी और फिर कुमकुम, फूल और माला चढ़ाएँ।केवड़ा, चंपा, चमेली और जूही के फूल राम को चढ़ाए जाते हैं। हल्दी-कुमकुम चरणों में चढ़ाते हैं।
- 5सुबह रामनाम में बिताएँ: रामरक्षा, रामायण का पाठ या गीत रामायण।गुड़ी पड़वा से नौ दिन मंदिरों में रामायण पाठ और कीर्तन चलता है; वह भी आज पूरा होता है।
- 6दोपहर को, मध्याह्न में, जन्म के समय बाल राम को पालने में रखें और राम जन्म का पालना गाएँ।आपके शहर का मध्याह्न, यानी दोपहर का समय, ऊपर दिया है।
- 7आरती करें, और खुशी से फूल या गुलाल उड़ाएँ।मंदिरों में इसी समय कीर्तन रोककर जन्म का उत्सव होता है।
- 8सुंठवड़ा और पानक प्रसाद के रूप में बाँटें, फिर व्रत खोलें।नैवेद्य पहले भगवान को, फिर सबको।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राम जन्म किस समय मनाया जाता है?
दोपहर को, जब सूरज सिर पर हो: मध्याह्न में। आपके शहर का समय ऊपर दिया है। घरों और मंदिरों में उसी समय पालना झुलाते हैं।
पानक कैसे बनाते हैं?
पानी में गुड़ घोलकर उसमें थोड़ी सोंठ और इलायची डालते हैं। गर्मी में ठंडक देने वाला यह पेय कर्नाटक में सड़कों पर बाँटा जाता है।
क्या व्रत रखना ज़रूरी है?
नहीं। कई लोग जन्म तक व्रत रखते हैं, पर पूजा, पालना और रामनाम मन से करें तो काफ़ी है। बीमार हों तो सेहत पहले।
क्या राम नवमी को चैत्र नवरात्र पूरा होता है?
हाँ। गुड़ी पड़वा से शुरू हुआ चैत्र नवरात्र राम नवमी को पूरा होता है। कई घरों और मंदिरों में नौ दिन रामायण या गीत रामायण चलता है।
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