त्योहार · श्रावण अमावस्या
पोला 2026
साल भर खेतों में मेहनत करने वाले बैलों का आज त्योहार है। आज उनकी छुट्टी: स्नान, सजावट, पूरणपोळी और शोभायात्रा!
तारीख, तिथि और समय
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शहर के अनुसार तारीख
यह तारीख सभी शहरों में एक ही है।
अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामबैल पोला, पिठोरी अमावस्या, बेंदूर (कोल्हापुर के आसपास)
- कहाँमहाराष्ट्र, ख़ासकर विदर्भ और मराठवाड़ा; छत्तीसगढ़ भी
- किसकी पूजाबैल
- एक पंक्ति मेंअनाज उगाने वाले बैलों का धन्यवाद: साल का एक दिन जब उन्हें मेहनत से छुट्टी मिलती है।
पोला, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
श्रावण की अमावस्या, पिठोरी अमावस्या, को पोला आता है। श्रावण ख़त्म होता है, और किसान अपने सबसे क़रीबी साथी का त्योहार मनाता है: बैल का।
जुताई, बुआई, गहाई: अनाज, फल, सब्ज़ी, सबमें बैल का पसीना है। आज उसका कोई काम नहीं। आज उसका सम्मान है।
और इसकी सीख सीधी है: जो आपके लिए मेहनत करता है, उसका धन्यवाद कीजिए। दिल से, और खुलकर।
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पोलासुर और तान्हा पोला
कुछ इलाक़ों में एक कथा कही जाती है: कंस ने बालकृष्ण को मारने के लिए पोलासुर नाम का असुर भेजा। पर बालकृष्ण ने उसी का वध कर दिया। माना जाता है कि वही दिन पोला है।
इसीलिए आज के दिन छोटे बच्चों के ख़ास लाड़ होते हैं।
और विदर्भ में बच्चों के लिए एक और दिन है: पोले के अगले दिन तान्हा पोला। कहते हैं, नागपुर के रघुजी भोसले द्वितीय ने इसे 1789 में शुरू किया, ताकि बच्चे बचपन से ही खेती में बैल का महत्व समझें। आज भी बच्चे लकड़ी के बैल सजाकर घर-घर ले जाते हैं।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
एक दिन पहले बैलों के कंधों पर हल्दी और घी या तेल लगाकर सेंकते हैं। पोले के दिन उन्हें नहलाते हैं, सींग रंगते हैं, पन्नी लगाते हैं, और झूल, बाशिंग और घुँघरू पहनाते हैं। नई नकेल और नई रस्सियाँ भी।
बैलों को पूरणपोळी का भोग। फिर बाजे-गाजे के साथ शोभायात्रा, और गाँव की सीमा के पास आम के पत्तों का तोरण बँधा होता है। वह टूटा, तो पोला फूटा!
पोला सबसे बड़ा विदर्भ में होता है, और तान्हा पोले पर नागपुर में मारबत निकलती है: पीली और काली मारबत, समाज की बुराइयों के पुतले, जिन्हें शोभायात्रा के अंत में जलाया जाता है।
यह दिन हर जगह एक नहीं होता। कोल्हापुर जैसे इलाक़ों में कर्नाटक जैसा बेंदूर अलग दिन, वट पूर्णिमा के अगले दिन मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में भी पोला बड़े उत्साह से मनाते हैं।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: आज बैलों की काम से छुट्टी: स्नान, सजावट, पूजा, पूरणपोळी और शोभायात्रा।
- 1एक दिन पहले बैलों को न्योता दें, और उनके कंधे हल्दी-घी या तेल से सेंकें।जहाँ जुआ रगड़ता है, वहाँ इस सेंक से आराम मिलता है।
- 2सुबह उन्हें नदी या नाले पर ले जाकर नहलाएँ, और चरने दें।धीरे से नहलाएँ; आँखों और कानों में पानी या साबुन न जाने दें।
- 3उन्हें सजाएँ: सींग रँगें, झूल डालें, और बाशिंग और घुँघरुओं की माला बाँधें।रंग जानवरों के लिए सुरक्षित हो, और सींगों की नोक पर धारदार पन्नी न लगाएँ।
- 4उनकी पूजा करें: हल्दी-कुमकुम, हार और आरती।घर के लोग थाली और घी का दीया लेकर बैलों का स्वागत करते हैं।
- 5उन्हें पूरणपोळी और भरपेट अच्छा भोजन खिलाएँ।मीठा थोड़ा, और साथ में चारा और भरपूर पानी।
- 6ढोल-बाजे के साथ गाँव की सीमा के तोरण तक की शोभायात्रा में शामिल हों।बैलों को शांति से चलाएँ: दौड़ाएँ नहीं, मारें नहीं, और पटाखों से दूर रखें।
- 7शहर में, बैल न हों तो, घर पर मिट्टी के बैलों की पूजा करें।मिट्टी के बैलों को सजाकर उनकी पूजा करते हैं, और भोग लगाते हैं।
- 8विदर्भ में तान्हा पोला पर बच्चों को सजे बैल लेकर घर-घर जाने दें।हर घर में बच्चों को कुछ खाने को या थोड़े पैसे मिलते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या बैलों को दौड़ाना या उनकी दौड़ कराना ठीक है?
पोला बैलों के आराम का दिन है: उन्हें शांत रखें। कई जगह दौड़ पर कानूनी पाबंदियाँ हैं: अपने इलाके के नियम मानें।
सींगों के लिए कौन-से रंग सुरक्षित हैं?
गेरू जैसे प्राकृतिक रंग, या जानवरों के लिए बिकने वाले रंग। सीसे वाले ऑयल पेंट से बचें, और रंग आँखों से दूर रखें।
कुछ जगह पोला अलग दिन क्यों होता है?
क्षेत्र के हिसाब से दिन बदलता है: कोल्हापुर के आसपास बेंदूर अलग दिन मनाते हैं। कैलेंडर एक तारीख दिखाता है; अपने गाँव की रीत मानें।
घर में गाय या बछड़ा हो तो?
कई घरों में उनकी भी पूजा करते हैं और उन्हें भी मीठा खिलाते हैं। आज का दिन हमारे लिए मेहनत करने वाले हर जानवर का है।
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