त्योहार · श्रावण शुक्ल पंचमी
नाग पंचमी 2026
श्रावण शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी: नाग की पूजा, दूध और लाई का भोग। और आज न खुदाई, न काटना!
तारीख, तिथि और समय
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अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामनाग पूजा, भ्रातृ पंचमी
- कहाँपूरा भारत और नेपाल; महाराष्ट्र में बत्तीस शिराळा प्रसिद्ध
- किसकी पूजानाग देवता
- एक पंक्ति मेंनाग खेतों के रक्षक और किसान के मित्र हैं: उन्हें वंदन, और उनसे रक्षा की प्रार्थना।
नाग पंचमी, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
श्रावण यानी बारिश, और बारिश में साँप बिलों से बाहर आते हैं। नाग पंचमी उनसे डरने का नहीं, उन्हें मान देने का पर्व है।
साँप खेत की रक्षा करता है, इसलिए वह किसान का मित्र है। आज ज़मीन नहीं खोदते, हल नहीं चलाते, और घर में सब्ज़ी भी नहीं काटते: भूल से भी नाग को चोट न पहुँचे।
इसकी सीख यही है: जिससे डर लगता है, उसका भी प्रकृति में काम है। उसे जीने दीजिए।
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किसान और नागिन की कथा
एक किसान खेत जोत रहा था। हल के फाल के नीचे नागिन के तीन बच्चे आ गए और मर गए।
नागिन क्रोधित हो गई। बदला लेने के लिए उसने किसान के घर के सब लोगों को डस लिया। बस एक बेटी बची।
उस बेटी ने नागिन के आगे दूध रखा, और हाथ जोड़कर क्षमा माँगी। नागिन शांत हुई, और उसने सबको फिर से जीवित कर दिया। इसलिए आज नाग को दूध, और खेत में हल बंद।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
घर में दीवार पर नाग का चित्र बनाकर उसकी पूजा करते हैं, और दूध, लाई और गेहूँ की खीर का भोग लगाते हैं। माना जाता है कि श्रावण की इसी पंचमी को कृष्ण ने कालिया नाग को हराया था।
महिलाएँ और लड़कियाँ पेड़ पर झूले डालकर गीत गाती हैं, झिम्मा-फुगड़ी खेलती हैं, और मेहंदी लगाती हैं। भाई अपनी ब्याही बहन को मायके ले आता है।
सांगली ज़िले का बत्तीस शिराळा नाग पंचमी के लिए प्रसिद्ध है। पहले यहाँ ज़िंदा नाग पकड़कर उनकी पूजा होती थी। 2002 के अदालती आदेश के बाद अब सिर्फ़ प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकलती है।
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में सिर्फ़ आज खुलता है। पूर्वी भारत में मनसा देवी की पूजा होती है, और केरल में महिलाएँ सर्प कावु, यानी नागों के उपवन, में प्रार्थना करती हैं।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: घर पर बनाया या मिट्टी का नाग, उसे दूध, लाई और खीर, और दिन भर न खुदाई, न काटना, न तवा।
- 1एक दिन पहले घर साफ़ करें, और अगले दिन की सब्ज़ियाँ पहले ही काटकर रखें।कई घरों में एक दिन पहले आँगन को गोबर से लीपकर रंगोली भी बनाते हैं।
- 2दीवार या पाटे पर नाग बनाएँ, या मिट्टी का नाग रखें।चंदन या हल्दी के लेप से नाग बनाया जाता है। बाज़ार में मिट्टी के नाग भी मिलते हैं।
- 3हल्दी-कुमकुम, फूल और दूब चढ़ाकर नाग की पूजा करें।कई जगह महिलाएँ गीत गाते हुए बाँबी की पूजा करती हैं। बाँबी को न तोड़ें।
- 4दूध, लाई और गेहूँ की खीर का भोग लगाएँ।यह दूध नाग के चित्र या मूर्ति के लिए है। असली साँप को दूध न दें।
- 5परिवार की रक्षा की प्रार्थना करें, और साँप भी सुख से जिएँ, यह भाव रखें।आज का भाव यही है: जिस जीव से डर लगे, उसकी भी प्रकृति में जगह है।
- 6दिन भर न जुताई, न खुदाई, न काटना, न कूटना और न तवा।इसलिए कई घरों में आज उबले या भाप में बने व्यंजन बनते हैं, जैसे पूरन के दिंड।
- 7घर के पास साँप दिखे तो उसे न छुएँ: साँप बचाने वाले को बुलाएँ।साँप वन्यजीव क़ानून से संरक्षित हैं। उसे न मारें, न पकड़ें, और बच्चों और पालतू जानवरों को दूर रखें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या असली साँप को दूध दें?
नहीं। साँप दूध नहीं पीते। सँपेरे उन्हें भूखा-प्यासा रखते हैं, इसलिए वे दूध पीते हैं और बीमार पड़ते हैं: पानी की कमी, निमोनिया। दूध नाग के चित्र या मूर्ति को चढ़ाएँ।
क्या आज जीवित नाग की पूजा कर सकते हैं?
नहीं। नाग वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की पहली अनुसूची में संरक्षित है। उसे पकड़ना, रखना या दिखाना अपराध है। सँपेरा दिखे तो वन विभाग को बताएँ।
न काटना, न तवा: तो खाना क्या बनाएँ?
एक दिन पहले कटी सब्ज़ियाँ, और उबले या भाप में बने व्यंजन: पूरन के दिंड, खीर, दाल-चावल। कई घरों में तलना भी टालते हैं।
घर में साँप आ जाए तो क्या करें?
शांत रहें और दूर हटें। बच्चों और पालतू जानवरों को अलग करें। उसे न मारें, न पकड़ें: पास के साँप बचाने वाले या वन विभाग को फ़ोन करें, और दूर से देखते रहें कि वह कहाँ जाता है।
क्या आज व्रत रखें?
कुछ लोग रखते हैं, पर यह ज़रूरी नहीं। कई घरों में आज का भोजन भोग के व्यंजन ही होते हैं।
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