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त्योहार · कार्तिक शुक्ल द्वादशी

तुलसी विवाह 2026

आज आँगन की तुलसी दुल्हन बनती है, और शालिग्राम रूपी विष्णु से उसका विवाह होता है। यह मौसम का पहला विवाह है; इसके बाद ही शादियाँ शुरू होती हैं।

21नवशनिवार, 21 नवंबर 2026द्वादशी रात 11:26 तक

तारीख, तिथि और समय

तारीखशनिवार, 21 नवंबर 2026
हिंदू तिथिकार्तिक शुक्ल द्वादशी, रात 11:26 तक

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अगले साल, 2027

10नवतुलसी विवाहबुधवार, 10 नवंबर 2027 · कार्तिक शुक्ल द्वादशी

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामतुलसी-शालिग्राम विवाह, तुलसी कल्याणम् (आंध्र, तेलंगाना)
  • कहाँपूरा भारत, घर-घर और मंदिरों में
  • किसकी पूजातुलसी (लक्ष्मी का रूप) और विष्णु (शालिग्राम या बालकृष्ण)
  • एक पंक्ति मेंतुलसी का शालिग्राम रूपी विष्णु से विवाह; इसके बाद शादियों का मौसम शुरू होता है।

तुलसी विवाह, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    तुलसी विवाह यानी तुलसी का विष्णु से विवाह। दूल्हा होते हैं शालिग्राम या बालकृष्ण की मूर्ति। प्रबोधिनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक किसी भी शाम यह विवाह करते हैं; महाराष्ट्र में ज़्यादातर द्वादशी को।

    तुलसी को लक्ष्मी का रूप माना जाता है। आँगन के वृंदावन को रोज़ पानी, पूजा और दीया, यह ज़्यादातर घर की स्त्रियाँ करती हैं। साल में एक बार यही रोज़ की सेवा धूमधाम से विवाह बन जाती है।

    और यह विवाह होते ही शादियों का मौसम शुरू होता है। विष्णु जाग गए, चातुर्मास पूरा हुआ, और साल का पहला विवाह तुलसी का। जिसे रोज़ मन से सँभाला, उसका भी एक दिन उत्सव होता है, यही इसका आनंद है।

  2. 02

    वृंदा की कथा

    शिव के तीसरे नेत्र की अग्नि से जन्मा असुर जालंधर देवताओं पर भी भारी पड़ने लगा। उसकी पत्नी वृंदा विष्णु की परम भक्त थी, और उसके पातिव्रत्य से जालंधर अजेय था।

    जब जालंधर का शिव से युद्ध हुआ, तब विष्णु जालंधर का रूप लेकर वृंदा के पास गए, और उसका व्रत भंग हुआ। जालंधर मारा गया। सच जानते ही वृंदा ने विष्णु को शाप दिया: एक कथा में, जैसे मेरा वियोग हुआ वैसे ही आपका पत्नी से होगा (जो आगे राम-सीता के रूप में सच हुआ); दूसरी कथा में, आप पत्थर बनेंगे, वही शालिग्राम। फिर वह अग्नि में समा गई।

    दुखी विष्णु ने उससे विवाह का वचन दिया। वृंदा तुलसी बनी, और हर साल शालिग्राम रूप में विष्णु वह वचन निभाते हैं। इसीलिए तुलसी का विवाह शालिग्राम से होता है, और तुलसी विष्णु को इतनी प्रिय है।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    तुलसी वृंदावन को गेरू और चूने से रंगते हैं, और उस पर "बोर चिंच आवळा" (बेर, इमली, आँवला) लिखते हैं। गमले में बेर, इमली, आँवला, सीताफल और प्याज़ की पत्ती रखते हैं, और ऊपर गन्ने का मंडप बनाते हैं।

    तुलसी को नई साड़ी, हल्दी-कुमकुम और मंगलसूत्र; दूल्हा बालकृष्ण या शालिग्राम। दोनों के बीच अंतरपट रखकर मंगलाष्टक गाते हैं, और "शुभमंगल सावधान" पर सब अक्षत डालते हैं। कन्यादान घर के मुखिया करते हैं, फिर मंत्रपुष्प और आरती।

    प्रसाद में गन्ना, नारियल के टुकड़े, फल और मूँगफली। कहीं-कहीं निःसंतान दंपति तुलसी के माता-पिता बनकर विवाह कराते हैं। कई घरों में दिवाली का आकाशदीप तुलसी विवाह तक लगा रहता है।

    आंध्र और तेलंगाना में द्वादशी को तुलसी कल्याणम् होता है, और वहाँ दूल्हा आँवले की डाली होती है। सौराष्ट्र में राम के एक मंदिर से लालजी की बारात पालकी में दूसरे मंदिर की तुलसी तक जाती है।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: शाम तक व्रत, तुलसी दुल्हन, बालकृष्ण दूल्हा, मंगलाष्टक और अक्षत, फिर प्रसाद।

  1. 1दिन में तुलसी वृंदावन साफ़ करें और सजाएँ।गेरू और चूने से रंगें, गमले में बेर, आँवला और इमली रखें, और चार गन्नों का मंडप बनाएँ।
  2. 2शाम के विवाह तक व्रत रखें।कन्यादान करने वाले कई लोग दिन भर व्रत रखते हैं। सेहत पहले: फल-दूध ले सकते हैं।
  3. 3शाम को स्नान करके दूल्हे को तुलसी के पास बिठाएँ।दूल्हा बालकृष्ण या शालिग्राम, पाटे या चौकी पर। नया वस्त्र पहनाएँ।
  4. 4तुलसी को दुल्हन की तरह सजाएँ।नई साड़ी या वस्त्र, हल्दी-कुमकुम, मंगलसूत्र और चूड़ियाँ। कुछ घरों में पहले हल्दी-तेल का मंगल स्नान।
  5. 5पहले गणेश की, फिर तुलसी और कृष्ण की पूजा करें।चंदन, फूल और हल्दी-कुमकुम चढ़ाएँ, दीया और अगरबत्ती जलाएँ। दीया कपड़े और मंडप से दूर रखें।
  6. 6अंतरपट पकड़ें, मंगलाष्टक गाएँ और अंत में अक्षत डालें।"शुभमंगल सावधान" कहते ही अंतरपट हटाएँ, और सब अक्षत डालें।
  7. 7घर के मुखिया कन्यादान करें, फिर मंत्रपुष्प और आरती।मन से तुलसी का हाथ कृष्ण के हाथ में दें। फिर मंत्रपुष्प कहें और आरती करें।
  8. 8नैवेद्य चढ़ाएँ और सबको प्रसाद बाँटें।गन्ना, नारियल के टुकड़े, फल और मूँगफली। कई घरों में शादी जैसा भोजन भी बनता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलसी विवाह किस दिन कर सकते हैं?

कार्तिक शुक्ल एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक किसी भी शाम। महाराष्ट्र में ज़्यादातर घरों में द्वादशी को; कैलेंडर वही दिन दिखाता है।

शालिग्राम न हो तो?

बालकृष्ण की मूर्ति, या विष्णु या कृष्ण की तस्वीर भी चलती है।

फ़्लैट में सिर्फ़ तुलसी का गमला है। चलेगा?

हाँ। गमला पाटे पर रखें, और गन्ना न हो तो फूलों या पत्तों से छोटा मंडप बना लें।

क्या व्रत रखना ज़रूरी है?

कई लोग विवाह होने तक व्रत रखते हैं, ख़ासकर कन्यादान करने वाले। तबीयत ठीक न हो तो फल-दूध लें, या सिर्फ़ पूजा करें।

क्या पंडित जी ज़रूरी हैं?

नहीं। पंडित जी मंगलाष्टक गा सकते हैं, पर कई घरों में परिवार ख़ुद मंगलाष्टक गाकर विवाह कराता है।

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