लंदन
ऐप पाएँ
कालदर्शी
लंदन

त्योहार · आश्विन शुक्ल प्रतिपदा

घटस्थापना 2026

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को घटस्थापना: देवी का कलश स्थापित होता है, और नवरात्रि शुरू होती है। नौ रातें देवी की, और दसवें दिन दशहरा!

11अक्तूरविवार, 11 अक्तूबर 2026प्रतिपदा शाम 5:01 तक

तारीख, तिथि और समय

तारीखरविवार, 11 अक्तूबर 2026
हिंदू तिथिआश्विन शुक्ल प्रतिपदा, शाम 5:01 तक

समय लंदन के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।

शहर के अनुसार तारीख

यह तारीख सभी शहरों में एक ही है।

अगले साल, 2027

30सितघटस्थापनागुरुवार, 30 सितंबर 2027 · आश्विन शुक्ल प्रतिपदा

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामनवरात्रि आरंभ, शारदीय नवरात्रि, कलश स्थापना
  • कहाँपूरा भारत; महाराष्ट्र में घर-घर घट, गुजरात में गरबा, बंगाल में दुर्गा पूजा
  • किसकी पूजादेवी दुर्गा और उनके नौ रूप (नवदुर्गा)
  • एक पंक्ति मेंनौ रातें देवी की उपासना: महिषासुर पर दुर्गा की विजय की याद।

घटस्थापना, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    नव यानी नौ, और रात्रि यानी रात। नवरात्रि यानी देवी की नौ रातें। वे आज से शुरू होती हैं, और दसवाँ दिन विजयादशमी, यानी दशहरा।

    घट देवी का रूप है। मिट्टी में अनाज बोते हैं, उस पर पानी का कलश रखते हैं, और नौ दिन उसकी पूजा करते हैं। रोज़ एक नई माला, और नौ रातें जलता दीया।

    नौ दिनों में अनाज अंकुरित होता है। यही नवरात्रि का अर्थ है: घर में देवी, और नई बढ़त। देवी की भक्ति यानी शक्ति की उपासना।

  2. 02

    दुर्गा और महिषासुर

    महिषासुर भैंसे का रूप लेने वाला असुर था। उसे वरदान था: कोई पुरुष उसे मार नहीं सकेगा। उसी बल पर उसने देवताओं को हरा दिया।

    हारे हुए देवता पहाड़ों में इकट्ठा हुए। उन सबके तेज से एक देवी प्रकट हुईं: दुर्गा। सिंह पर सवार होकर वे महिषासुर से लड़ने निकलीं।

    वह रूप बदल-बदलकर लड़ा, पर आख़िर देवी ने त्रिशूल से उसका वध किया। तभी से वे महिषासुरमर्दिनी हैं। नवरात्रि की नौ रातें उसी युद्ध का गुणगान हैं।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    घर पर घट स्थापित होता है: मिट्टी में अनाज, ऊपर कलश, और रोज़ फूलों या पत्तों की नई माला। नवरात्रि भर दीया अखंड जलता है। दशहरे पर कुछ जगहों पर घट के अंकुर पुरुषों की पगड़ी में लगाए जाते हैं।

    महाराष्ट्र में देवी के साढ़े तीन शक्तिपीठ हैं: कोल्हापुर की अंबाबाई, तुळजापुर की तुळजा भवानी, माहूर की रेणुका, और आधा पीठ मानी जाने वाली वणी की सप्तशृंगी। नवरात्रि में चारों जगह भारी भीड़ होती है।

    लड़कियाँ हादगा या भोंडला खेलती हैं: पाटे पर हाथी बनाकर उसके चारों ओर घेरा बनाकर गीत, और फिर खिरापत यानी प्रसाद पहचानने की होड़। गोंधळी देवी का गोंधळ गाते हैं।

    गुजरात में रातें गरबे की: छेदों वाले मटके में दीया, और उसके चारों ओर नृत्य। बंगाल में यही दिन दुर्गा पूजा हैं, और दक्षिण में घरों में गुड़ियों का गोलू सजता है।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: प्रतिपदा को घट और नंदादीप, नौ दिन रोज़ एक माला और आरती, और नवमी या दशहरे को घट उठाना।

  1. 1प्रतिपदा की सुबह, कुलाचार के अनुसार घट की जगह साफ़ करें।हर घर की रीत अलग होती है: अपने घर में जैसा होता आया है, वैसा करें।
  2. 2पाटे पर मिट्टी या चावल की ढेरी फैलाएँ, और उसमें अनाज बोएँ।कई घरों में गेहूँ बोते हैं, और कुछ घर साथ में कुछ और अनाज भी।
  3. 3उस पर पानी से भरा ताँबे या पीतल का कलश रखें।ताँबा या पीतल न हो, तो साफ़ मिट्टी का घड़ा भी चलता है।
  4. 4कलश पर हल्दी की गाँठ, आम के पत्ते और नारियल रखें, और देवी का टाक या चित्र स्थापित करें।कुछ घरों में कुलदेवता का टाक घट के पास रखते हैं।
  5. 5हल्दी-कुमकुम, अक्षत और फूल चढ़ाकर घट की पूजा करें।घट स्थापित होने के बाद नौ दिन उसे अपनी जगह से नहीं हिलाते।
  6. 6नंदादीप जलाएँ, और उसे नौ रातें जलता रखें।तेल या घी पर्याप्त रखें, और दीये को पर्दों, कपड़ों और बच्चों से दूर रखें।
  7. 7रोज़ घट पर एक नई माला चढ़ाएँ, अनाज को थोड़ा पानी दें, और आरती करें।रोज़ एक माला बढ़ने से नौवें दिन तक नौ मालाएँ हो जाती हैं: फूलों, पत्तों या फलों की।
  8. 8नवमी या दशहरे को अंतिम पूजा करके, उगा हुआ अनाज निकालकर घट उठाएँ।उगे हुए अनाज को घर के लोग आशीर्वाद मानकर बालों में या टोपी में लगाते हैं।

क्या चाहिए?टिक करते जाएँ

13 में से 0 तैयार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या नवरात्र के नौ दिन व्रत रखना ज़रूरी है?

नहीं। कुछ लोग नौ दिन, कुछ पहला और आख़िरी दिन, और कुछ दिन में एक बार भोजन करते हैं। बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग हों, तो व्रत न रखें: पूजा और माला काफ़ी है।

अगर नंदादीप बीच में बुझ जाए तो क्या करें?

घबराएँ नहीं। देवी को प्रणाम करके दीया फिर से जलाएँ। बाती और तेल समय पर देखते रहें, तो वह कम ही बुझता है।

कन्या पूजन कैसे करते हैं?

अष्टमी या नवमी को छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर घर बुलाते हैं। उनके पैर धोकर, हल्दी-कुमकुम और चंदन लगाकर, चूड़ियाँ या उपहार और दक्षिणा देकर, उन्हें भोजन कराते हैं।

घट उठाने के बाद मिट्टी और पानी का क्या करें?

कलश का पानी पौधों में डालें, और मिट्टी किसी गमले में या पेड़ के नीचे डालें। नदी में प्लास्टिक या कचरा न डालें।

अगर हमारे घर में घट नहीं बैठता तो?

घट कुलाचार के अनुसार बैठता है। अगर नहीं बैठता, तो रोज़ देवी के आगे दीया और आरती करें, या पास के देवी मंदिर में दर्शन करने जाएँ।

ऐप में याद लगाएँ

ऐप एक दिन पहले और उसी दिन सूचना भेजता है, बिना इंटरनेट भी।

ऐप पाएँ

कालदर्शी को बेहतर बनाने में मदद करेंगे?

हम कालदर्शी का उपयोग गिनने के लिए Google Analytics इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसमें कुकीज़ लगती हैं। आपका नाम या स्थान नहीं लिया जाता। गोपनीयता