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त्योहार · श्रावण कृष्ण अष्टमी

कृष्ण जन्माष्टमी 2026

श्रावण कृष्ण अष्टमी की आधी रात श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। दिन भर उपवास, और रात बारह बजे पालना!

4सितशुक्रवार, 4 सितंबर 2026अष्टमी रात 12:14 तक

तारीख, तिथि और समय

तारीखशुक्रवार, 4 सितंबर 2026
हिंदू तिथिश्रावण कृष्ण अष्टमी, रात 12:14 तक
निशीथ कालरात 12:10 – रात 12:56

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अगले साल, 2027

24अगकृष्ण जन्माष्टमीमंगलवार, 24 अगस्त 2027 · श्रावण कृष्ण अष्टमी

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामजन्माष्टमी, गोकुलाष्टमी, कृष्णाष्टमी
  • कहाँपूरा भारत; सबसे बड़ा उत्सव मथुरा और वृंदावन में
  • किसकी पूजाबालकृष्ण
  • एक पंक्ति मेंविष्णु के आठवें अवतार, श्रीकृष्ण, मथुरा के कारागार में आधी रात जन्मे।

कृष्ण जन्माष्टमी, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    आज श्रीकृष्ण का जन्मदिन है। विष्णु के आठवें अवतार, और सबके लाडले कान्हा।

    दिन भर उपवास, भजन और कीर्तन, और सब आधी रात का इंतज़ार करते हैं। बारह बजते ही जन्म, और फिर उपवास खुलता है।

    और कथा की सीख: अँधेरे में ही उजाला जन्म लेता है। कारागार, पहरे, बंद दरवाज़ा, फिर भी कृष्ण जन्मे और सुरक्षित पहुँचे।

  2. 02

    कारागार में जन्म

    मथुरा के राजा कंस को भविष्यवाणी मिली: देवकी की आठवीं संतान तुम्हारा वध करेगी। उसने अपनी बहन देवकी और उसके पति वसुदेव को कारागार में डाल दिया, और उनके बच्चों को एक-एक करके मार डाला।

    आठवीं संतान, कृष्ण, आधी रात को जन्मे। उसी पल सारे पहरेदार गहरी नींद में सो गए, और कारागार का द्वार खुल गया। वसुदेव बालक को उठाकर यमुना पार गोकुल ले गए।

    वहाँ नंद और यशोदा की नवजात बेटी थी। वसुदेव कृष्ण को वहाँ छोड़कर बेटी को लेकर लौटे। कंस ने उसे मारने के लिए उठाया, तो वह देवी योगमाया के रूप में प्रकट हुई। और कृष्ण गोकुल में यशोदा की गोद में पले।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    आधी रात बालकृष्ण की मूर्ति को स्नान कराते हैं, नए वस्त्र पहनाते हैं, और पालने में रखकर झुलाते हैं। फिर भोग, और उपवास खुलता है।

    कुछ घरों में दरवाज़े से अंदर आते छोटे-छोटे पैरों के निशान बनाते हैं: कृष्ण घर में आ रहे हैं, इसका संकेत।

    महाराष्ट्र में मंदिरों में रात बारह बजे तक कीर्तन चलता है, और जन्म के बाद सुंठवड़ा का प्रसाद। अगले दिन गोपालकाला और दही हांडी।

    मथुरा और वृंदावन में रासलीला होती है। मणिपुर, असम, राजस्थान और गुजरात में भी रासलीला की परंपरा है, और पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भी यह बड़ा दिन है।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: दिन भर व्रत, शाम को भजन-कीर्तन, आधी रात पालने में स्वागत, और फिर व्रत खोलना।

  1. 1सुबह संकल्प लें और तय करें कि व्रत कैसे रखेंगे।फलाहार (फल, दूध, व्रत का भोजन), केवल पानी, या एक समय भोजन: जितना सेहत साथ दे।
  2. 2घर साफ़ करें, और पूजा का स्थान और पालना फूलों से सजाएँ।मुलायम कपड़े वाला छोटा पालना। न हो तो फूलों से सजा झूला या पाटा भी चलता है।
  3. 3शाम भजन, कीर्तन या भागवत के पाठ में बिताएँ।भागवत के दशम स्कंध में कृष्ण जन्म की कथा है। गीता का एक अध्याय पढ़ें तो भी चलेगा।
  4. 4आधी रात से थोड़ा पहले बालकृष्ण की मूर्ति को पानी, दूध या पंचामृत से स्नान कराएँ।पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और शक्कर। अंत में साफ़ पानी से स्नान कराएँ।
  5. 5उन्हें नए कपड़े और मोरपंख पहनाकर पालने में रखें।फिर पालना धीरे से झुलाते हुए पालना गीत गाएँ।
  6. 6भोग लगाएँ: मक्खन-मिश्री, सुंठवड़ा, फल या दूध की मिठाई।माखनचोर को माखन तो चाहिए ही! सुंठवड़ा सोंठ, सूखे नारियल और मिश्री का मिश्रण है।
  7. 7आरती करें और प्रसाद बाँटें।सुंठवड़ा और पंचामृत सबको प्रसाद के रूप में दें।
  8. 8आधी रात की पूजा के बाद, या घर की रीत से अगली सुबह, व्रत खोलें।पहला कौर प्रसाद का, फिर हल्का भोजन।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्रत कब खोलें?

कई लोग आधी रात की पूजा के बाद प्रसाद लेकर व्रत खोलते हैं। कुछ घरों में अगली सुबह स्नान-पूजा के बाद खोलते हैं। घर की रीत अपनाएँ।

व्रत में क्या खा सकते हैं?

फल, दूध, साबूदाना, समा के चावल, मूँगफली, आलू, शकरकंद। अनाज और दालें नहीं खाते।

क्या आधी रात तक जागना ज़रूरी है?

आधी रात का जन्मोत्सव ही आज का केंद्र है। पर बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे या बीमार लोग सो सकते हैं और सुबह पूजा कर सकते हैं: सेहत पहले।

व्रत सेहत से न सधे तो?

डायबिटीज़, गर्भावस्था, नियमित दवाएँ या बुढ़ापा हो तो पहले डॉक्टर से पूछें। केवल फलाहार, या बिना व्रत के पूजा और नाम-स्मरण, वह भी काफ़ी है।

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