त्योहार · माघ शुक्ल पंचमी
वसंत पंचमी 2026
माघ शुक्ल पंचमी, सरस्वती का दिन और वसंत की आहट। पीले कपड़े, किताबों की पूजा, और छोटे बच्चों के पहले अक्षर।
तारीख, तिथि और समय
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शहर के अनुसार तारीख
यह तारीख सभी शहरों में एक ही है।
अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामबसंत पंचमी, सरस्वती पूजा, श्री पंचमी
- कहाँपूरा भारत; बंगाल, ओडिशा और पंजाब में ख़ास
- किसकी पूजासरस्वती
- एक पंक्ति मेंज्ञान, भाषा, संगीत और कलाओं की देवी सरस्वती का दिन, और वसंत की तैयारी की शुरुआत।
वसंत पंचमी, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
माघ शुक्ल पंचमी ही वसंत पंचमी है। सरस्वती ज्ञान, भाषा, संगीत और सारी कलाओं की देवी हैं, और आज उनका दिन है।
पीला आज का रंग है: खेतों में खिली सरसों का, और सरस्वती का प्रिय। पीले कपड़े, पीले पकवान, और देवी को भी पीले वस्त्र।
वसंत ऋतुओं का राजा है, और आज से उसकी तैयारी शुरू होती है। आज पढ़ाई शुरू करना, किताबों, वाद्यों और क़लम की पूजा करना: जो सीखते हैं उसका आदर, यही इस दिन का अर्थ है।
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कामदेव और शिव का तीसरा नेत्र
शिव गहरे ध्यान में थे, और पार्वती उनसे विवाह करना चाहती थीं। ऋषियों ने प्रेम के देवता कामदेव से शिव का ध्यान भंग करने को कहा।
कामदेव ने अपना बाण चलाया। शिव का ध्यान टूटा, पर क्रोध में उन्होंने तीसरा नेत्र खोला, और कामदेव जलकर राख हो गए।
कामदेव ने आगे कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में फिर जन्म लिया। इसलिए कुछ जगह आज मदन पंचमी है: वसंत प्रेम का मौसम है, और प्रेम के देवता भी उसके साथ लौटते हैं।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
महाराष्ट्र में शादी के बाद की पहली वसंत पंचमी पर नवदंपति पीले कपड़े पहनकर मंदिर जाते हैं। कुछ जगह शिव-पार्वती की पूजा कर आम की मंजरी और गेहूँ की बालियाँ चढ़ाते हैं।
आज छोटे बच्चों को पहले अक्षर लिखना सिखाते हैं। ओडिशा में चार-पाँच साल के बच्चों की पढ़ाई आज खड़ी-छुआँ या विद्यारंभ से शुरू होती है; बंगाल में इसे हाते-खोड़ी कहते हैं, और वहाँ के स्कूलों में सरस्वती पूजा होती है।
पंजाब में यह पतंगों का बसंत है। दिल्ली में निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह पर भी पीले रंग में बसंत मनाया जाता है, अमीर ख़ुसरो से चली परंपरा। और होली आज से लगभग चालीस दिन बाद।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: पीले रंग में सरस्वती पूजा, उनके सामने किताबें और वाद्य, और नन्हों के पहले अक्षर।
- 1स्नान करके पीले कपड़े पहनें।पीला: खेतों में सरसों का और सरस्वती का प्रिय रंग।
- 2साफ़ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर सरस्वती की तस्वीर रखें।प्रतिमा न हो तो सरस्वती की तस्वीर भी चलती है।
- 3तस्वीर के सामने अपनी किताबें, कॉपियाँ, क़लम और वाद्य रखें।स्कूल जाने वाले बच्चे अपने बस्ते की किताबें रखते हैं।
- 4पीले फूल, हल्दी-कुमकुम और अक्षत चढ़ाएँ, और दीया और अगरबत्ती जलाएँ।फूल न हों तो सिर्फ़ अक्षत और हल्दी-कुमकुम भी चलेगा।
- 5सरस्वती वंदना या कोई प्रार्थना करें।शब्दों से ज़्यादा भाव मायने रखता है।
- 6पीली मिठाई या फल का नैवेद्य चढ़ाएँ, और आरती करें।केसर या हल्दी डला हलवा या चावल, या केले।
- 7घर में छोटा बच्चा हो, तो उसका हाथ पकड़कर स्लेट पर पहले अक्षर लिखवाएँ।आम तौर पर चार-पाँच साल के बच्चों की अक्षर पहचान आज शुरू होती है।
- 8पूजा के बाद थोड़ा पढ़ें, लिखें या गाएँ: सीखने की आज से शुरुआत।कई परिवार आज साथ बैठकर पढ़ते या संगीत करते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बच्चे को पहले अक्षर कैसे लिखवाएँ?
पूजा के बाद बच्चे को गोद में बिठाएँ, स्लेट पर उसका हाथ पकड़कर "श्री" या "ॐ" और वर्णमाला का पहला अक्षर लिखवाएँ। हर घर का अक्षर अलग होता है। ओडिशा में इसे खड़ी-छुआँ और बंगाल में हाते-खड़ी कहते हैं।
आज पढ़ाई करें या नहीं?
ज़रूर करें: आज का दिन सीखने का ही है। कुछ घरों में पूजा पूरी होने तक किताबें देवी के सामने ही रहती हैं, फिर उन्हीं में से थोड़ा पढ़ा जाता है।
नैवेद्य में क्या चढ़ाएँ?
कुछ भी पीला: केसरिया हलवा, केसर या हल्दी वाले चावल, लड्डू या केले। आज पीला भोजन खाने की भी रीत है।
क्या उपवास ज़रूरी है?
नहीं। आज का दिन पूजा और सीखने का है, उपवास ज़रूरी नहीं। कुछ लोग पूजा होने तक कुछ नहीं खाते।
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ऐप एक दिन पहले और उसी दिन सूचना भेजता है, बिना इंटरनेट भी।