त्योहार · पौष कृष्ण द्वादशी
किंक्रांत 2026
संक्रांति के अगले दिन किंक्रांत, जिस दिन देवी ने किंकरासुर को मारा। आज नई शुरुआत नहीं करते; शांति से कुलदेवता का स्मरण, और हल्दी-कुमकुम चलता रहता है।
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संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामकरिदिन
- कहाँमहाराष्ट्र
- किसकी पूजासंक्रांति देवी, और अपने कुलदेवता
- एक पंक्ति मेंसंक्रांति देवी की किंकरासुर पर विजय; नए काम की शुरुआत न करने का दिन।
किंक्रांत, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
संक्रांति के अगले दिन किंक्रांत। पंचांग में यह करिदिन है, यानी शुभ काम के लिए न लिया जाने वाला दिन।
इसलिए आज नया काम या लंबी यात्रा शुरू नहीं करते। पर यह डरने का दिन नहीं: हल्दी-कुमकुम चलता रहता है, भगवान को मीठा नैवेद्य चढ़ाते हैं, और कुलदेवता का स्मरण करते हैं।
बड़े त्योहार के बाद एक शांत दिन। घर में झगड़ा नहीं, मन शांत, सबसे आदर से बात। उत्सव के बाद थोड़ा रुककर सँभलना भी त्योहार का ही हिस्सा है।
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संक्रांति देवी और दो असुर
कथा है कि मकर संक्रांति का नाम संक्रांति देवी से पड़ा। संकरासुर नाम का असुर लोगों को सता रहा था, और संक्रांति के दिन देवी ने उसका वध किया।
पर संकट ख़त्म नहीं हुआ था: एक और असुर, किंकरासुर, अभी बाक़ी था। अगले दिन देवी ने उसे भी मारा, और प्रजा को उसके अत्याचार से मुक्त किया।
इसीलिए यह दूसरा दिन किंक्रांत है। एक संकट टला तो काम अधूरा न छोड़ें, अंत तक ले जाएँ: यही इस कथा की सीख है।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
संक्रांति से शुरू हुआ हल्दी-कुमकुम रथ सप्तमी तक चलता है, और किंक्रांत को भी सुहागिनें एक-दूसरे को वाण (छोटे उपहार) देती हैं।
इन्हीं दिनों, कई घरों में किंक्रांत को, छोटे बच्चों का बोरन्हाण होता है: मुरमुरे, बेर, चने, गन्ने के टुकड़े, हलवा, और आजकल चॉकलेट भी, बच्चे के सिर पर से डालते हैं। यह लगभग पाँच साल की उम्र तक करते हैं।
दक्षिण में संक्रांति के बाद का दिन मवेशियों का है: तमिलनाडु में मट्टू पोंगल और आंध्र-तेलंगाना में कनुमा। बैलों को नहलाकर, सींग रँगकर, माला पहनाकर उनकी पूजा करते हैं, और फ़सल में उनकी मदद के लिए उनका धन्यवाद करते हैं।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: आज शांत दिन: कोई नई शुरुआत नहीं, पर कुलदेवता की याद, हल्दी-कुमकुम और बच्चों का बोरन्हाण।
- 1कुलदेवता के सामने दीया जलाएँ, और मीठे का भोग लगाएँ।संक्रांति का तिलगुड़ या गुड़ की रोटी चल जाएगी।
- 2नई ख़रीदारी, नया काम या लंबी यात्रा किसी और दिन पर टालें।पंचांग में आज करिदिन होता है, जिसे शुभ काम के लिए नहीं लेते।
- 3हल्दी-कुमकुम के लिए आईं सुहागिनों को तिलगुड़ और उपहार (वाण) दें।संक्रांति का हल्दी-कुमकुम आज भी चलता है।
- 4छोटे बच्चों का बोरन्हाण करें।मुरमुरे, बेर, चने, गन्ने के टुकड़े और हलवा सिर पर से डालें, और बच्चों को बटोरने दें।
- 5दिन घरवालों के साथ, शांति से बिताएँ।घर में झगड़े से बचें: बड़े त्योहार के बाद का यह आराम है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज यात्रा या नया काम टाल न सकें तो?
नई शुरुआत टालना एक रीत है, डरने की बात नहीं। टाल न सकें, तो कुलदेवता का नाम लेकर शांति से करें।
क्या आज हल्दी-कुमकुम कर सकते हैं?
हाँ। संक्रांति का हल्दी-कुमकुम किंक्रांत को भी चलता है, और रथ सप्तमी तक जारी रहता है।
बोरन्हाण किस उम्र तक करते हैं?
आमतौर पर लगभग पाँच साल तक। बच्चों को पास बिठाएँ, और छोटे बच्चों को चने या बेर मुँह में न डालने दें: गले में अटक सकते हैं।
क्या किंक्रांत अशुभ दिन है?
डरने जैसा कुछ नहीं। आज बस शुभ काम की शुरुआत नहीं करते; बाक़ी त्योहार की ख़ुशी, हल्दी-कुमकुम और रोज़ के काम पहले जैसे चलते हैं।
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