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त्योहार · माघ शुक्ल चतुर्थी

गणेश जयंती 2026

माघ शुक्ल चतुर्थी, गणेश का जन्मदिन। आज तिल का स्नान, तिल का नैवेद्य, और मोरगाँव के मोरेश्वर के दर्शन।

22जनगुरुवार, 22 जनवरी 2026चतुर्थी रात 2:28 तक

तारीख, तिथि और समय

तारीखगुरुवार, 22 जनवरी 2026
हिंदू तिथिमाघ शुक्ल चतुर्थी, रात 2:28 तक
मध्याह्न कालसुबह 11:39 – दोपहर 1:52

समय पुणे के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।

हर शहर की तारीख और समय

22जनपुणेगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:39 – दोपहर 1:5222जनमुंबईगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:43 – दोपहर 1:5622जनठाणेगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:43 – दोपहर 1:5622जननासिकगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:40 – दोपहर 1:5222जननागपुरगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:19 – दोपहर 1:3122जनकोल्हापुरगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:37 – दोपहर 1:5122जनदिल्लीगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:29 – दोपहर 1:3622जनबेंगलुरुगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:22 – दोपहर 1:3922जनइंदौरगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:32 – दोपहर 1:4322जनलंदनगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:21 – दोपहर 1:0322जनन्यू जर्सीगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:10 – दोपहर 1:0622जनदुबईगुरुवार, 22 जनवरी 2026 · मध्याह्न काल सुबह 11:26 – दोपहर 1:35

अगले साल, 2027

10फ़रगणेश जयंतीबुधवार, 10 फ़रवरी 2027 · माघ शुक्ल चतुर्थी

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामतिलकुंद चतुर्थी, वरद चतुर्थी, तिलो चौथ
  • कहाँमहाराष्ट्र, गोवा और कोंकण; उत्तर प्रदेश में तिलो चौथ
  • किसकी पूजागणेश
  • एक पंक्ति मेंएक परंपरा के अनुसार गणेश का जन्मदिन: तिल का नैवेद्य, दिन में व्रत और अष्टविनायक मंदिरों में भीड़।

गणेश जयंती, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    माघ की शुक्ल चतुर्थी गणेश जयंती है, एक परंपरा के अनुसार गणेश का जन्मदिन। भाद्रपद की गणेश चतुर्थी घर-घर का बड़ा उत्सव है; माघ की चतुर्थी उसके मुक़ाबले शांत, मंदिरों का त्योहार है।

    सर्दी अभी बाक़ी है, इसलिए आज हर जगह तिल: तिल का उबटन लगाकर स्नान, नैवेद्य और प्रसाद में तिल के लड्डू। दिन भर व्रत और रात को भोजन।

    गणेश आरंभ के देवता हैं: हर काम उनके नाम से शुरू होता है। साल में एक बार उन्हीं का जन्मदिन मनाना, और नए कामों के लिए उनका आशीर्वाद लेना, यही इस दिन का अर्थ है।

  2. 02

    मोर पर बैठे मयूरेश्वर

    सिंधु नाम के असुर को सूर्य से अमृत का पात्र मिला था। उसे सुरक्षित रखने के लिए उसने उसे निगल लिया, अजेय हो गया, और सबको सताने लगा।

    उसके अंत के लिए गणेश शिव-पार्वती के यहाँ मयूरेश्वर के रूप में जन्मे: छह भुजाओं वाले, गौर वर्ण, और मोर पर सवार। उन्होंने सिंधु की सेना को हराया, उसके सेनापति कमलासुर के तीन टुकड़े किए, और सिंधु का पेट चीरकर अमृत का पात्र ख़ाली कर दिया।

    कथा है कि मयूरेश्वर का मोरगाँव वाला मंदिर ब्रह्मा ने बनाया। इसीलिए मोरगाँव के मोरेश्वर अष्टविनायक में पहले हैं, और यात्रा वहीं से शुरू होकर वहीं ख़त्म होती है।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    मोरगाँव में आज भारी भीड़ होती है, और चिंचवड के मोरया गोसावी मंदिर से गणेश की पालकी शोभायात्रा में आती है। मोरेश्वर के सामने बैठे नंदी यहाँ की ख़ास बात है: नंदी आमतौर पर शिव के सामने होते हैं।

    सिद्धटेक के सिद्धिविनायक की सूँड दाईं ओर मुड़ी है, और भक्त वहाँ की पहाड़ी की सात परिक्रमा करते हैं। कोंकण तट पर गणपतिपुले में समुद्र किनारे के स्वयंभू गणेश की आज जयंती मनाई जाती है।

    कुछ घरों में हल्दी या सिंदूर से शंकु के आकार की गणेश मूर्ति बनाकर पूजते हैं, और चौथे दिन जल में विसर्जित करते हैं। उत्तर प्रदेश में यही तिलो चौथ या सकट चौथ है।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: तिल से स्नान, गणपति का जन्मोत्सव, तिल के लड्डुओं का नैवेद्य, और रात को भोजन।

  1. 1शरीर पर तिल का उबटन लगाएँ, फिर थोड़े तिल डाले पानी से स्नान करें।माघ की ठंड में तिल गर्म रखते हैं। आज लाल कपड़े पहनने की भी रीत है।
  2. 2संकल्प लें, और दिन भर फल, दूध या व्रत के भोजन पर उपवास रखें।बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग हों, तो सादा भोजन करें।
  3. 3साफ़ चौकी पर गणेश की मूर्ति या तस्वीर रखें।हल्दी या सिंदूर का छोटा शंकु भी कुछ घरों में गणेश के रूप में पूजा जाता है।
  4. 4ऊपर दिए पूजा के समय में जन्मोत्सव मनाएँ: दूर्वा, लाल फूल, हल्दी-कुमकुम और अक्षत चढ़ाएँ।आपके शहर का पूजा का समय ऊपर दिया है।
  5. 5गणपति अथर्वशीर्ष या गणेश के नामों का पाठ करें।जितना हो सके पढ़ें: एक बार मन से पढ़ना काफ़ी है।
  6. 6नैवेद्य में तिल के लड्डू या मोदक चढ़ाएँ, और आरती करें।नैवेद्य पहले भगवान को, फिर सबको।
  7. 7तिल का प्रसाद बाँटें, और रात को भोजन करके उपवास खोलें।दिन में उपवास, रात को भोजन: आज की यही रीत है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह भाद्रपद की गणेश चतुर्थी ही है?

नहीं। माघ की यह एक परंपरा के अनुसार गणेश की जयंती है। घर में दस दिन मूर्ति रखने की रीत भाद्रपद में होती है; माघी गणेश जयंती घर पर एक दिन की पूजा और मंदिरों में उत्सव है।

आज तिल क्यों?

यह तिलकुंद चतुर्थी है: तिल का उबटन, तिल से स्नान, और तिल का ही नैवेद्य और प्रसाद। उत्तर भारत में इसी दिन तिलकुट खाया जाता है।

हल्दी के गणेश का बाद में क्या करें?

उत्सव के चौथे दिन उसे पानी में विसर्जित किया जाता है। घर पर एक बर्तन के पानी में विसर्जन करके वह पानी पौधों में डाल सकते हैं।

क्या दिन में कुछ खा सकते हैं?

ज़्यादातर लोग दिन में उपवास करके रात को भोजन करते हैं। फल, दूध या व्रत का भोजन चलता है। सेहत पहले: शंका हो तो डॉक्टर की सलाह लें।

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