त्योहार · फाल्गुन पूर्णिमा
धुलेंडी 2026
होली के अगले दिन धूलिवंदन: होली की राख लगाने का दिन। और महाराष्ट्र में आज छुट्टी होती है!
तारीख, तिथि और समय
समय दुबई के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।
शहर के अनुसार तारीख
यह तारीख सभी शहरों में एक ही है।
अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामधुलेंडी, धुलेटी (गुजरात), रंगवाली होली
- कहाँमहाराष्ट्र; उत्तर भारत में धुलेंडी, गुजरात में धुलेटी
- किसकी पूजाहोली की अग्नि, उसकी राख के रूप में
- एक पंक्ति मेंहोली की राख: पवित्र और रक्षा करने वाली। और पाँच दिन के वसंतोत्सव की शुरुआत।
धुलेंडी, थोड़ा विस्तार से
- 01
पर्व के बारे में
धूलि यानी धूल, और वंदन यानी नमस्कार। नाम में ही सब है: आज होली की राख और मिट्टी को वंदन।
कल रात होली में बुराई जल गई। बची हुई राख पवित्र मानी जाती है: पुराणों में यह शरीर पर लगाने की विभूति है, शुद्ध करने वाली और रक्षा करने वाली।
और इसमें सीख सीधी है: राख से नई शुरुआत। ठंड गई, वसंत आया, और आज से रंग पंचमी तक पाँच दिन का वसंतोत्सव।
- 02
ढुंढा राक्षसी की कथा
राजा रघु के समय ढुंढा नाम की राक्षसी छोटे बच्चों को सताती थी। शिव के वरदान के कारण उस पर कोई साधारण उपाय काम नहीं करता था।
राजा ने वसिष्ठ ऋषि से उपाय पूछा। वह एक ही चीज़ से डरती है, उन्होंने कहा: बच्चों का हुड़दंग। लकड़ी, पत्ते और उपले जुटाओ, आग जलाओ, और बच्चों को उसके चारों ओर हँसने, गाने और चिल्लाने दो।
बच्चों ने लकड़ी की तलवारें लेकर आग के चारों ओर फेरा लगाया, और ढुंढा दूर रही। उस आग की राख पवित्र मानकर शरीर पर लगाई गई। होली के आसपास का हुड़दंग और धूलिवंदन की राख, दोनों में इस कथा की याद है।
- 03
महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
आज होली की राख शरीर पर लगाते हैं, या गीली मिट्टी में लोटते हैं। मराठी में इसे धुळवड यानी धूल का दिन यूँ ही नहीं कहते!
आज महाराष्ट्र में सार्वजनिक छुट्टी होती है। शहरों में कई लोग आज ही रंग भी खेलते हैं, पर पुरानी रीत से रंगों का बड़ा दिन रंग पंचमी है।
कोंकण में धूलिवंदन एक दिन नहीं होता: हर गाँव का धूलिवंदन अलग दिन हो सकता है, ज़्यादातर होली के पंद्रहवें दिन।
उत्तर भारत में यही दिन धुलेंडी, यानी रंगवाली होली: रंगों का मुख्य दिन। गुजरात में धुलेटी पर रंगीन पानी उड़ता है, और कुछ परिवारों में भाभी साड़ी को रस्सी जैसा लपेटकर देवर को झूठे ग़ुस्से में मारती है!
रंग कैसे खेलें
संक्षेप में: पहले तेल, फिर प्राकृतिक रंग; पूछकर ही रंग लगाएँ, और आँखों और जानवरों को बचाएँ।
- 1बाहर निकलने से पहले त्वचा और बालों पर नारियल का तेल लगाएँ।तेल से रंग त्वचा पर नहीं चिपकता और बाद में आसानी से छूट जाता है। आँखों के आसपास पतली परत, आँखों में नहीं।
- 2पुराने, पूरी बाँह के कपड़े पहनें, बाल बाँधें और धूप का चश्मा लगाएँ।कॉन्टैक्ट लेंस हों तो खेलने से पहले निकाल दें।
- 3कई घरों में पहले होली की थोड़ी राख माथे पर लगाते हैं।नाम में ही है: धूलिवंदन, होली की राख को वंदन।
- 4केवल सूखे, प्राकृतिक रंग लें: हल्दी, फूलों के रंग, हर्बल गुलाल।चाँदी, सुनहरे और चमकीले रंगों से बचें: उनमें भारी धातुएँ होती हैं।
- 5रंग लगाने से पहले पूछें, और जो मना करे उसे छोड़ दें।हर किसी को रंग पसंद नहीं होता: बुज़ुर्ग, बीमार, छोटे बच्चे।
- 6चेहरे पर और आँखों में रंग न फेंकें।रंग आँख में चला जाए तो रगड़ें नहीं; साफ़, ठंडे पानी से धीरे से धोएँ।
- 7जानवरों पर रंग और पानी न डालें।रंग चाटने और रंगीन पानी पीने से कुत्ते-बिल्लियाँ बीमार पड़ते हैं।
- 8खेलने के बाद हल्के साबुन से, बिना रगड़े रंग धोएँ।कहीं घाव हो तो उसे ढककर रखें, और गंदे पानी से दूर रहें।
क्या चाहिए?टिक करते जाएँ
7 में से 0 तैयार
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
घर पर प्राकृतिक रंग कैसे बनाएँ?
पीले के लिए बेसन में हल्दी, लाल के लिए सूखे फूलों का पाउडर या चुकंदर का रस, हरे के लिए मेहंदी। टेसू के फूल उबालने से केसरिया रंग का पानी बनता है।
आँख में रंग चला जाए तो?
रगड़ें नहीं। साफ़, ठंडे पानी से धीरे से आँखें धोएँ। लाली, सूजन, धुँधला दिखना या दर्द बना रहे तो तुरंत आँखों के डॉक्टर को दिखाएँ।
त्वचा पर खुजली या दाने हो जाएँ तो?
हल्के साबुन से रंग धोएँ, रगड़ें नहीं, और त्वचा पर फिर से तेल या मॉइस्चराइज़र लगाएँ। तकलीफ़ बढ़े, या साँस लेने में दिक्कत हो, तो डॉक्टर को दिखाएँ।
दमा हो तो रंग खेल सकते हैं?
रंगों का पाउडर साँस में जाने से दमा भड़क सकता है। गीले प्राकृतिक रंग का टीका काफ़ी है; उड़ते पाउडर से बचें, और अपनी दवा पास रखें।
ऐप में याद लगाएँ
ऐप एक दिन पहले और उसी दिन सूचना भेजता है, बिना इंटरनेट भी।