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त्योहार · आश्विन कृष्ण त्रयोदशी

धनतेरस 2026

शाम को दीया जलाएँ और सेहत और समृद्धि की प्रार्थना करें। दिवाली असल में यहीं से शुरू होती है।

6नवशुक्रवार, 6 नवंबर 2026त्रयोदशी सुबह 10:48 तक

तारीख, तिथि और समय

तारीखशुक्रवार, 6 नवंबर 2026
हिंदू तिथिआश्विन कृष्ण त्रयोदशी, सुबह 10:48 तक
प्रदोष कालशाम 5:57 – रात 8:29

समय पुणे के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।

हर शहर की तारीख और समय

6नवपुणेशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 5:57 – रात 8:296नवमुंबईशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 6:00 – रात 8:336नवठाणेशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 5:59 – रात 8:326नवनासिकशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 5:55 – रात 8:286नवनागपुरशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 5:32 – रात 8:066नवकोल्हापुरशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 5:57 – रात 8:296नवदिल्लीशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 5:29 – रात 8:076नवबेंगलुरुशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 5:49 – रात 8:186नवइंदौरशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 5:43 – रात 8:186नवलंदनशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 4:20 – रात 7:186नवन्यू जर्सीशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 4:43 – रात 7:306नवदुबईशुक्रवार, 6 नवंबर 2026 · प्रदोष काल शाम 5:32 – रात 8:08

अगले साल, 2027

27अक्तूधनतेरसबुधवार, 27 अक्तूबर 2027 · आश्विन कृष्ण त्रयोदशी

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामधनतेरस, धन्वंतरि जयंती
  • कहाँमहाराष्ट्र और पूरा भारत
  • किसकी पूजालक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि
  • एक पंक्ति मेंदिवाली का दूसरा दिन, धन और सेहत के लिए, और यम के लिए एक दीया।

धनतेरस, थोड़ा विस्तार से

  1. 01

    पर्व के बारे में

    धनत्रयोदशी दिवाली का दूसरा दिन है, आश्विन कृष्ण त्रयोदशी को। इस दिन लक्ष्मी और कुबेर की पूजा होती है, और सेहत के देवता धन्वंतरि को भी याद किया जाता है। यहाँ धन का मतलब सिर्फ़ पैसा नहीं है, अच्छी सेहत भी धन है।

  2. 02

    महाराष्ट्र की परंपराएँ

    कई घरों में आज सोना, चाँदी या नया बर्तन खरीदा जाता है। व्यापारी बही-खातों और तिजोरी की पूजा करते हैं। बाज़ार में भीड़ रहती है और घर-घर दीये जगमगाने लगते हैं।

    • धनिया-गुड़
    • मीठा नैवेद्य
    • रंगोली
    • दरवाज़े पर दीया
  3. 03

    यमदीपदान की कथा

    राजा हिम के बेटे को शादी के चौथे दिन साँप के काटने से मृत्यु का शाप था। उस रात उसकी पत्नी ने दरवाज़े पर गहनों और सिक्कों का ढेर लगाया और चारों ओर दीये जलाए।

    वह रात भर गीत गाती और कहानियाँ सुनाती जागती रही। यम साँप के रूप में आए, पर दीयों की रोशनी से उनकी आँखें चौंधिया गईं और वे अंदर न जा सके। तभी से इस दिन यम के लिए दीया जलाया जाता है।

पूजा कैसे करें?लगभग 20 मिनट

संक्षेप में: सफ़ाई, दीया, पूजा, आरती, नैवेद्य और दरवाज़े पर एक दीया। बीस मिनट काफ़ी हैं।

  1. 1घर और दरवाज़े की सफ़ाई करें, दरवाज़े पर रंगोली बनाएँ।पूजा से पहले घर साफ़ करें; दरवाज़े पर छोटी-सी रंगोली काफ़ी है।
  2. 2प्रदोष काल में चौकी पर लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की प्रतिमा रखें।चौकी पर साफ़ कपड़ा बिछाकर उस पर प्रतिमाएँ रखें।
  3. 3सिक्के, गहने या नया बर्तन सामने रखें।नया बर्तन हो तो उसे भी रखें।
  4. 4हल्दी-कुमकुम, अक्षत और फूल चढ़ाएँ।फूल और अक्षत चढ़ाते समय थोड़ा रुकें।
  5. 5धनिया और गुड़ का नैवेद्य चढ़ाएँ।धनिया और गुड़ महाराष्ट्र का सादा नैवेद्य है।
  6. 6आरती करें।आरती करें और परिवार के लिए प्रार्थना करें।
  7. 7शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके एक दीया जलाएँ। इसे यमदीपदान कहते हैं।अँधेरा होने पर दरवाज़े पर दक्षिण की ओर मुँह करके एक दीया जलाएँ।

क्या चाहिए?टिक करते जाएँ

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनत्रयोदशी कब है?

आश्विन कृष्ण त्रयोदशी को। आपके शहर की तारीख ऊपर दी गई है।

पूजा का समय क्या है?

शाम को प्रदोष काल में। आपके शहर का समय ऊपर दिया गया है।

क्या सोना खरीदना ज़रूरी है?

नहीं। कोई छोटा बर्तन या सिक्का भी चलता है। असल बात भावना की है।

क्या धनत्रयोदशी और धनतेरस एक ही हैं?

हाँ, दिन एक ही है, नाम अलग है।

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