त्योहार · आश्विन शुक्ल दशमी
दशहरा 2026
आश्विन शुक्ल दशमी को दशहरा, विजयादशमी: नवरात्रि के बाद विजय का दिन। आपटे के पत्ते सोने की तरह दीजिए, और सीमोल्लंघन कीजिए!
तारीख, तिथि और समय
समय बेंगलुरु के अनुसार। ऐप में आपके शहर का समय।
शहर के अनुसार तारीख
यह तारीख सभी शहरों में एक ही है।
अगले साल, 2027
संक्षिप्त जानकारी
- अन्य नामविजयादशमी, दसरा, दशैं (नेपाल)
- कहाँपूरा भारत; महाराष्ट्र में आपटे के पत्ते, उत्तर में रावण दहन, दक्षिण में मैसूर दशहरा
- किसकी पूजादेवी अपराजिता, शमी और आपटा; राम और दुर्गा
- एक पंक्ति मेंविजय का दसवाँ दिन: रावण पर राम की और महिषासुर पर दुर्गा की विजय। साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक।
दशहरा, थोड़ा विस्तार से
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पर्व के बारे में
विजयादशमी यानी विजय का दसवाँ दिन। रामायण में राम रावण को हराते हैं, और नवरात्रि की नौ रातों के बाद दुर्गा महिषासुर पर विजय पाती हैं। दोनों विजय आज की हैं।
दशहरा साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक है। इसलिए नया काम शुरू करने, या गाड़ी, घर, कपड़े या सोना खरीदने के लिए आज का दिन शुभ माना जाता है।
और आज की सीख: अपने भीतर के रावण पर विजय। क्रोध, लोभ और अहंकार की सीमा लाँघिए, और नई शुरुआत कीजिए।
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कौत्स और राजा रघु: आपटे का सोना
कौत्स ने वरतंतु ऋषि के पास शिक्षा पाई। शिक्षा पूरी होने पर वे गुरुदक्षिणा देने की ज़िद पर अड़ गए। आख़िर गुरु ने कहा: तुमने मुझसे चौदह विद्याएँ सीखीं, तो चौदह करोड़ स्वर्ण मुद्राएँ दो।
कौत्स राजा रघु के पास गए। पर राजा ने अभी-अभी विश्वजित यज्ञ में सारा धन दान कर दिया था। फिर भी याचक ख़ाली हाथ न लौटे, इसलिए रघु ने कुबेर पर चढ़ाई करने की ठानी। डरकर कुबेर ने पहले ही अयोध्या के आसपास आपटे के पेड़ों पर सोने की बरसात कर दी।
रघु ने सारा सोना कौत्स को देना चाहा, पर कौत्स ने सिर्फ़ चौदह करोड़ लिए। बाकी सोना लोगों में बँटा। कथा है कि वह दिन दशहरे का था। इसलिए आज आपटे के पत्ते सोने की तरह दिए जाते हैं।
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महाराष्ट्र में और दूसरी जगह
सुबह शस्त्र, औज़ार और किताबों की पूजा। बच्चे स्लेट पर सरस्वती बनाकर उनकी पूजा करते हैं। दरवाज़े पर आम के पत्तों का तोरण, और भोजन में पूरणपोळी।
शाम को नए कपड़े पहनकर सीमोल्लंघन: गाँव की सीमा पार करके शमी और आपटे की पूजा। पांडवों ने अज्ञातवास में अपने शस्त्र शमी के पेड़ में छिपाए थे। और मराठों के अभियान भी दशहरे पर निकलते थे।
लौटकर आपटे के पत्ते पहले भगवान को, फिर बड़ों को देकर प्रणाम: सोना लो, सोने जैसे रहो! कोल्हापुर का शाही दशहरा, और नागपुर की दीक्षाभूमि पर धम्मचक्र प्रवर्तन दिन: १९५६ में इसी दिन डॉ. आंबेडकर ने वहाँ बौद्ध धम्म अपनाया।
उत्तर भारत में रामलीला पूरी होती है और रावण के पुतले जलते हैं। बंगाल में दुर्गा विसर्जन, और शुभो बिजोया। मैसूर की शोभायात्रा विश्वप्रसिद्ध है, और नेपाल में दशैं पर बड़े टीका लगाकर आशीर्वाद देते हैं।
पूजा कैसे करें?
संक्षेप में: दिन में शस्त्र-पूजा और सरस्वती-पूजन, शाम को सीमोल्लंघन, और आपटे के पत्तों का सोना बाँटना।
- 1दरवाज़े पर आम के पत्तों और गेंदे के फूलों का तोरण लगाएँ।कई लोग तोरण दशहरे से एक दिन पहले लगाते हैं, और दिवाली तक रखते हैं।
- 2अगर घट अभी बैठा है, तो उसकी अंतिम पूजा करके उसे उठाएँ।घट में उगे अनाज को घर के लोग बालों में या टोपी में लगाते हैं।
- 3शस्त्र, काम के औज़ार, मशीनें और वाहनों को गेंदे की माला पहनाकर उनकी पूजा करें।वाहन धोकर, हल्दी-कुमकुम लगाकर, माला पहनाते हैं। धारदार चीज़ें बच्चों के हाथ में न दें।
- 4बच्चों को स्लेट पर सरस्वती बनाने दें, और किताबों-कॉपियों के साथ उनकी पूजा करें।कुछ घरों में सरस्वती का चित्र अंकों से बनाते हैं। आज किताबों की पूजा होती है, पढ़ाई नहीं।
- 5कई घरों में अपराजिता देवी की पूजा भी करते हैं।अपराजिता को विजय की देवी माना जाता है।
- 6पूरणपोली का नैवेद्य चढ़ाएँ।कुछ घरों में श्रीखंड-पूरी या कोई और मिठाई भी बनती है।
- 7दिन ढलते नए कपड़े पहनकर सीमोल्लंघन के लिए निकलें, और शमी और आपटे की पूजा करें।शहर में गाँव की सीमा न हो, तो घर से निकलकर पास के मंदिर या पेड़ तक जाना काफ़ी है।
- 8बड़ों को प्रणाम करके आपटे के पत्ते सोने के रूप में दें।देते समय कहते हैं: "सोना लो, सोने जैसे रहो।" आपटे के पेड़ की डाल न तोड़ें: गिनती के पत्ते ही लें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आपटे के पत्ते देते समय क्या कहते हैं?
"सोना लो, सोने जैसे रहो।" छोटे लोग बड़ों के पैर छूकर उन्हें पत्ते देते हैं, और दोस्तों, पड़ोसियों और भाई-बहनों में भी लेन-देन होता है। कुछ पत्ते पहले देवता को चढ़ाते हैं।
आपटे के पेड़ को नुकसान पहुँचाए बिना यह कैसे करें?
दशहरे पर आपटे और उससे मिलते-जुलते कचनार के पेड़ों की डालें बड़ी संख्या में तोड़ी जाती हैं। गिनती के पत्ते ही लें, डाल न तोड़ें, हर किसी को एक ही पत्ता दें, या आपटे का पौधा लगाएँ।
सीमोल्लंघन में ठीक-ठीक क्या करते हैं?
पहले गाँव की सीमा पार करके जाते थे। आज शाम को नए कपड़े पहनकर घर से निकलते हैं, शमी या आपटे की पूजा करते हैं, और लौटते समय पत्ते बाँटते हैं।
दशहरे पर लोग नई शुरुआत क्यों करते हैं?
यह साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक माना जाता है: मान्यता है कि आज कोई शुभ काम शुरू करने के लिए अलग मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं। इसलिए लोग आज नया वाहन, घर या कारोबार शुरू करते हैं।
घट नवमी को उठाएँ या दशहरे को?
दोनों रीतें हैं: अपने घर में जैसा होता आया है, वैसा करें। संदेह हो, तो घर के बड़ों से पूछें।
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