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त्योहार · मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी

चंपा षष्ठी 2026

खंडोबा के छह दिन के नवरात्र का आख़िरी दिन। भंडारा उड़ाइए: येळकोट येळकोट जय मल्हार!

15दिसमंगलवार, 15 दिसंबर 2026षष्ठी रात 9:19 तक

तारीख, तिथि और समय

तारीखमंगलवार, 15 दिसंबर 2026
हिंदू तिथिमार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी, रात 9:19 तक

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यह तारीख सभी शहरों में एक ही है।

अगले साल, 2027

4दिसचंपा षष्ठीशनिवार, 4 दिसंबर 2027 · मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी

संक्षिप्त जानकारी

  • अन्य नामखंडोबा नवरात्र, मल्हारी षष्ठी, सुब्रह्मण्य षष्ठी (कर्नाटक)
  • कहाँमहाराष्ट्र और कर्नाटक; सबसे बड़ा उत्सव जेजुरी में
  • किसकी पूजाखंडोबा (मार्तंड भैरव, मल्हारी)
  • एक पंक्ति मेंवह दिन जब खंडोबा ने मणि और मल्ल दैत्यों का नाश किया।

चंपा षष्ठी, थोड़ा विस्तार से

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    पर्व के बारे में

    मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा से षष्ठी तक खंडोबा का छह दिन का नवरात्र होता है। षष्ठी इसका आख़िरी और सबसे बड़ा दिन है: चंपा षष्ठी।

    खंडोबा महाराष्ट्र में सबसे ज़्यादा घरों के कुलदेवता हैं, किसानों और धनगरों से लेकर ब्राह्मणों और राजघरानों तक। इसलिए यह पर्व सिर्फ़ मंदिर का नहीं, घर-घर का है।

    उनका रूप योद्धा का है: घोड़े पर सवार, हाथ में खड्ग, साथ में म्हालसा और बाणाई। मान्यता है कि वे लोगों की रक्षा करते हैं और मन्नत पूरी करते हैं।

  2. 02

    मणि और मल्ल की कथा

    मणि और मल्ल नाम के दो दैत्य भाई ब्रह्मा के वर से उन्मत्त हो गए थे। वे ऋषियों के यज्ञ तोड़ते और लोगों को सताते थे। ऋषियों ने शिव को पुकारा।

    शिव ने मार्तंड भैरव का रूप लिया और छह दिन युद्ध करके षष्ठी को दोनों का नाश किया। वही छह दिन आज का नवरात्र हैं।

    मरते समय मणि ने वर माँगा कि खंडोबा के हर मंदिर में उसे जगह मिले। मल्ल का सिर मंदिर की सीढ़ी के पास गिरा, जहाँ आज भी भक्त पैर रखकर जाते हैं। उसके साहस से प्रसन्न होकर खंडोबा ने मल्लारी, यानी मल्ल के शत्रु, नाम लिया: वही आज के मल्हारी।

  3. 03

    महाराष्ट्र में और दूसरी जगह

    घर में प्रतिपदा को घट स्थापित होता है और छह दिन नंदादीप, यानी अखंड दीया, जलता है। षष्ठी को नवरात्र पूरा होता है।

    नैवेद्य में बैंगन का भरता और रोडगा या भाकरी। चातुर्मास में बैंगन न खाने वाले कई लोग आज के भरते से फिर शुरू करते हैं।

    फिर तळी भरते हैं: थाली में नारियल, भंडारा (हल्दी), सुपारी और पान रखकर सब मिलकर उसे तीन बार उठाते हैं और येळकोट येळकोट जय मल्हार बोलते हैं।

    जेजुरी के गढ़ पर बड़ी यात्रा लगती है। भक्त भंडारा उड़ाते हैं और पूरा गढ़ सुनहरा हो जाता है। कर्नाटक में यही दिन सुब्रह्मण्य षष्ठी के रूप में कुक्के सुब्रह्मण्य में मनाया जाता है।

पूजा कैसे करें?

संक्षेप में: खंडोबा के छह दिन: प्रतिपदा को घट और नंदादीप, षष्ठी को भरीत-भाकरी और तळी।

  1. 1प्रतिपदा को कुलाचार के अनुसार घट स्थापित करें, और खंडोबा का टाक या प्रतिमा रखें।हर घर की रीत अलग होती है: अपने घर में जैसा होता आया है, वैसा करें।
  2. 2नंदादीप जलाएँ, और उसे छहों दिन जलता रखें।तेल या घी पर्याप्त रखें, और दीये को पर्दों और बच्चों से दूर रखें।
  3. 3रोज़ घट पर फूलों की एक माला बढ़ाएँ, और मल्हारी माहात्म्य पढ़ें।रोज़ एक माला बढ़ने से षष्ठी तक छह मालाएँ हो जाती हैं।
  4. 4कई घरों में इन छह दिनों में एकभुक्त, यानी दिन में एक बार भोजन होता है।बीमार या बुज़ुर्ग हों, तो एकभुक्त छोड़कर सादा भोजन करें।
  5. 5षष्ठी को खंडोबा को बेलपत्र, फूल और भंडारा चढ़ाएँ।भंडारा यानी हल्दी। इसे किसी की आँखों के पास न उड़ाएँ।
  6. 6बैंगन के भरते और भाकरी या रोडगे का नैवेद्य चढ़ाएँ।नैवेद्य का थोड़ा हिस्सा खंडोबा के वाहन, कुत्ते को, उसकी पूजा करके दिया जाता है।
  7. 7तळी भरें, सब मिलकर उसे उठाएँ, और आरती करें।तळी में नारियल, भंडारा, सुपारी और पान होते हैं। उठाते समय सब "येळकोट येळकोट जय मल्हार" बोलते हैं।
  8. 8भरते-भाकरी के भोजन से नवरात्र पूरा करें।कुछ घरों में व्रत का पारण अगले दिन होता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या छहों दिन मानना ज़रूरी है?

जिन घरों में खंडोबा कुलदेवता हैं, वहाँ कुलाचार के अनुसार छह दिन का नवरात्र होता है। न हो, तो षष्ठी की पूजा, भरते-भाकरी का नैवेद्य और तळी भी काफ़ी है।

भरता-भाकरी ही क्यों?

चंपा षष्ठी को खंडोबा को बैंगन के भरते और भाकरी का नैवेद्य चढ़ाने की रीत है। कई घरों में चातुर्मास से बैंगन नहीं खाते, और इसी नैवेद्य से फिर शुरू करते हैं।

भंडारा उड़ाते समय क्या सावधानी रखें?

शुद्ध हल्दी ही इस्तेमाल करें, और आँखों से दूर रखें। आँख में जाए तो साफ़ पानी से धोएँ। छोटे बच्चों के चेहरे पर न उड़ाएँ।

आज जेजुरी जाना है। क्या ध्यान रखें?

गढ़ पर चढ़ते-उतरते बहुत भीड़ होती है। जल्दी निकलें, बच्चों और बुज़ुर्गों का हाथ थामें, सीढ़ियों पर जल्दबाज़ी न करें, और पानी साथ रखें।

बीमारी, गर्भावस्था या बुढ़ापे में एकभुक्त रखें?

सेहत पहले। सादा भोजन करें, और पूजा, नैवेद्य और तळी मन से करें। शंका हो तो डॉक्टर की सलाह लें।

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